कृति सेनन विज्ञापन बढता देख ब्रांड ने मांगी माफी और अभियान हटाया

Aug 27, 2026

मुंबई। बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन हाल ही में एक ज्वेलरी ब्रांड के रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर विवादों में घिर गईं। विज्ञापन में कृति ऑफ-व्हाइट रंग के इंडो-वेस्टर्न परिधान में नजर आई थीं। उन्होंने ब्रालेट शैली का ब्लाउज, ड्रेप्ड स्कर्ट और केप पहना था। विज्ञापन सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने उनके पहनावे को रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक त्योहार के लिए अनुपयुक्त बताते हुए आलोचना शुरू कर दी।

देखते ही देखते यह मामला सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गया और विज्ञापन को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। विवाद बढ़ने के बाद कृति सेनन ने 25 अगस्त को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक भावुक पोस्ट साझा कर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसी भी त्योहार की असली खूबसूरती केवल कपड़ों में नहीं होती, बल्कि उससे जुड़ी भावनाओं, परंपराओं और रिश्तों में होती है।

कृति ने रक्षाबंधन को प्रेम और सुरक्षा के बंधन का प्रतीक बताते हुए कहा कि इस त्योहार का महत्व भाई-बहन के रिश्ते की भावनाओं में है। उन्होंने अपने पालतू कुत्तों को भी परिवार का हिस्सा बताया और उनके प्रति सुरक्षा तथा देखभाल की भावना का जिक्र किया।

कृति ने महिलाओं के पहनावे को लेकर समाज की सोच पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आखिर महिलाओं को यह बताना कब बंद किया जाएगा कि उन्हें क्या पहनना चाहिए। उनके मुताबिक समय के साथ भारतीय और एथनिक फैशन में काफी बदलाव आया है, लेकिन आज भी महिलाओं के संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान को उनके कपड़ों से जोड़कर देखा जाता है।

कृति ने स्पष्ट किया कि किसी महिला की संस्कृति उसके कपड़ों की नेकलाइन में नहीं, बल्कि उसके दिल और विचारों में होती है। उनकी इस टिप्पणी को विज्ञापन को लेकर की जा रही आलोचनाओं के जवाब के तौर पर देखा गया। विवाद के बीच ज्वेलरी ब्रांड ने बुधवार को विज्ञापन को अपने सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाने का फैसला किया। ब्रांड ने इंस्टाग्राम पर जारी बयान में कहा कि वह भारतीय संस्कृति, परंपराओं और त्योहारों का सम्मान करता है।

ब्रांड के अनुसार, विज्ञापन का उद्देश्य परिवार के साथ पालतू जानवरों को भी उत्सव का हिस्सा दिखाना था। हालांकि, यदि अभियान से समाज के किसी वर्ग की भावनाएं आहत हुई हैं तो ब्रांड ने इसके लिए खेद जताया।

मामले में अभिनेत्री कंगना रनौत की टिप्पणी ने भी बहस को और तेज कर दिया। कंगना ने बिना कृति का नाम लिए सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। उन्होंने सवाल उठाया कि रक्षाबंधन जैसे अवसर पर भाई को राखी बांधते समय इतने विकल्प होने के बावजूद ऐसा पहनावा क्यों चुना गया। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं की अलमारियां कई तरह के कपड़ों से भरी होती हैं, इसलिए ऐसे अवसर पर इस तरह की पोशाक का चयन सवाल खड़े करता है।

पूरे विवाद ने एक बार फिर महिलाओं के पहनावे, विज्ञापनों में उनकी प्रस्तुति और आधुनिक फैशन बनाम पारंपरिक सोच को लेकर बहस छेड़ दी है। एक पक्ष जहां त्योहारों के अनुरूप पहनावे को जरूरी मानता है, वहीं दूसरा पक्ष व्यक्तिगत पसंद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन कर रहा है। इस विवाद ने यह सवाल भी सामने रखा है कि किसी महिला के पहनावे के आधार पर उसके विचारों, संस्कृति या मूल्यों का आकलन करना कितना उचित है।




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