मुंबई। अभिनेत्री शिवांगी जोशी ने हाल ही में वेब रियलिटी शो लॉकअप-2 में अपनी स्किन संबंधी समस्याओं और लुक्स को लेकर मिलने वाले कमेंट्स पर खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि किस तरह मुहांसे और त्वचा से जुड़ी दिक्कतें आत्मविश्वास को प्रभावित करती हैं और कैसे ये समस्याएं आम लोगों के साथ-साथ सेलेब्रिटीज़ को भी परेशान करती हैं।
शिवांगी ने स्वीकार किया कि वह जिंदगी भर मुहांसे और त्वचा संबंधी समस्याओं से जूझती रही हैं, जिससे वह काफी असुरक्षित महसूस करती थीं। उन्होंने कहा कि लोग जब उनके चेहरे या मेकअप का मजाक उड़ाते हैं, तो उन्हें बहुत बुरा लगता है। यह बातचीत तब शुरू हुई जब कंटेस्टेंट श्रेया कालरा ने शिवांगी को एनाबेला कहा।

इस पर शिवांगी ने राम कपूर के साथ चर्चा करते हुए कहा कि वह लुक्स से जुड़े कमेंट्स के गहरे असर को अच्छी तरह समझती हैं। उन्होंने बताया कि जब श्रेया के चेहरे पर एलर्जी हुई थी, तो उन्होंने श्रेया का पूरा साथ दिया था, क्योंकि वह जानती हैं कि ऐसी स्थिति में कोई भी कितना असुरक्षित महसूस कर सकता है।
शिवांगी जोशी ने श्रेया और शिल्पा शिंदे द्वारा धारावाहिकों पर किए गए कमेंट्स पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जब वे हर्षद चोपड़ा और डेली सोप की एक्टिंग की बात कर रही थीं, तो उन्हें लगा कि ये लोग खुद भी उसी इंडस्ट्री से आते हैं। शिवांगी ने यह भी बताया कि श्रेया ने खुद एक बार सीरियल्स के लिए ऑडिशन दिए थे, लेकिन उन्हें काम नहीं मिला था।
बता दें कि टीवी सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है में अपने लीड रोल के दौरान भी शिवांगी जोशी को उनके चेहरे पर मुंहासे के निशानों के लिए ऑनलाइन ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा था। उनकी यह बेबाक स्वीकारोक्ति बताती है कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले कलाकारों को भी अपनी शारीरिक बनावट को लेकर किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उनका यह बयान उन सभी लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है जो लुक्स से जुड़ी असुरक्षा से गुजरते हैं।
बर्लिन। जर्मनी में नाटो के महत्वपूर्ण एयरबेस पर बड़े ड्रोन हमले की साजिश को एक बस ड्राइवर की असाधारण बहादुरी ने नाकाम किया। जानकारी के अनुसार, यह घटना लीपजिग/हैल एयरपोर्ट पर हुई, जो नाटो और वैश्विक कार्गो लॉजिस्टिक्स के लिए एक प्रमुख केंद्र है।
सत्ताधारी कंजर्वेटिव सीडीयू पार्टी के सांसद डेटलेफ सेफ ने बताया कि बस ड्राइवर ने कम ऊंचाई पर उड़ते हुए एक ड्रोन को देखा। उसके पास ड्रोन को रोकने का कोई और साधन नहीं था, लेकिन ड्राइवर ने साहस दिखाते हुए हवा में ही लात मारकर गिरा दिया।
सांसद ने इस कार्य को बहुत साहसी लेकिन खतरों से भरा हुआ बताया। उन्होंने पुष्टि की कि यह ड्रोन पेशेवर विस्फोटकों और डेटोनेटर से लैस था। ड्राइवर के अदम्य साहस के कारण ड्रोन पास में ही गिरकर नष्ट हो गया, जिससे एयरपोर्ट पर होने वाला संभावित हमला टल गया।
जर्मनी ने घटना को अत्यंत गंभीर मानकर आतंकवाद के कोण से जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने हालांकि अभी तक उस बस ड्राइवर का नाम उजागर नहीं किया है, और न ही यह बताया गया है कि यह ड्रोन कहां से आया था और कैसे एयरपोर्ट के प्रतिबंधित इलाके में पहुंच गया।
लीपजिग/हैल एयरपोर्ट नाटो के स्ट्रैटेजिक एयरलिफ्ट इंटरनेशनल सॉल्यूशन का एक मुख्य परिचालन बेस है, जिसका उपयोग रक्षा संधि के पूर्वी हिस्से को मजबूत करने और विभिन्न मिशनों के लिए उपकरण पहुंचाने हेतु एंटोनोव विमानों के लिए किया जाता है। डीएचएल जैसी बड़ी लॉजिस्टिक्स कंपनियाँ भी इसका इस्तेमाल करती हैं।
यह हमला एक महत्वपूर्ण रणनीतिक लक्ष्य पर किया गया था, जिसे जर्मन अधिकारियों द्वारा मॉस्को पर लगाए गए हाइब्रिड हमलों के आरोपों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है, हालांकि मॉस्को इन आरोपों से इनकार करता रहा है।
इस साल 17,880 केस आए, अगस्त-सिंतबर में और बढ़ सकते हैं मामले
ढाका। बांग्लादेश में डेंगू से अब तक 59 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि इस साल अब तक 17,880 मामले सामने आए हैं। स्थानीय मीडिया ने स्वास्थ्य महानिदेशालय के हवाले से इसकी जानकारी दी। डीजीएचएस के मुताबिक ढाका डिवीजन इससे सबसे ज्यादा पीड़ित क्षेत्र है। कुल 6,871 दर्ज मामले रिपोर्ट हुए जिसमें से 4,404 मामले तो ढका के थे। 3,647 केस के साथ, बारिशाल डिवीजन दूसरे नंबर पर रहा, इसके बाद चटगांव में 3,082 और खुलना में 2,272 केस दर्ज किए गए।
रिपोर्ट के मुताबिक ढाका डिवीजन में मृतकों की संख्या भी सबसे ज्यादा है। कुल 26 में से 25 मौतें ढाका में हुईं। रिपोर्ट के मुताबिक खुलना में 12 लोगों की मौत हुई, इसके बाद चटगांव और मैमनसिंह में क्रमशः सात और छह लोगों ने जान गंवाई। डेंगू, मच्छर से होने वाली वायरल बीमारी है, जो बांग्लादेश में एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या का रूप लेती जा रही है।
यह मुख्य रूप से एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलने वाली बीमारी है। नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ बांग्लादेश में जूलॉजी डिपार्टमेंट में एसोसिएट प्रोफेसर, ने कहा कि नवीनतम आंकड़े ढाका के उच्च जनसंख्या घनत्व, लगातार एडीज मच्छर प्रजनन और अपर्याप्त वेक्टर नियंत्रण उपायों के संयोजन को दर्शाते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि सबसे असरदार स्ट्रेटेजी यह होगी कि जब डेंगू का फैलाव काफी कम हो, तब मच्छरों को कंट्रोल करना तेज किया जाए। उस समय, ब्रीडिंग साइट्स कम होते हैं, और ऐसे में उन्हें नियंत्रित करना आसान होता है। हालांकि देखा ये जाता है कि मच्छरों को कंट्रोल करने की कोशिश आमतौर पर डेंगू सीजन शुरू होने के बाद ही तेज होता है, तब तक संक्रमण काफी तेजी से फैल चुका होता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक हम एक समन्वित राष्ट्रीय नियंत्रण प्रणाली नहीं बनाते, डेंगू के मामले बढ़ते रहेंगे। जहांगीरनगर यूनिवर्सिटी में जूलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर ने चेतावनी दी कि अगस्त तक डेंगू के और बढ़ने की आशंका है और सितंबर तक यह बढ़ता रह सकता है। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि अगस्त में ये चरम पर न हो। हो सकता है कि इस साल का पीक सितंबर में आए। हम यह कह सकते हैं कि अगस्त और सितंबर तक यह बढ़ता रहेगा।
नई दिल्ली। देशभर में बढ़ती महंगाई से आम आदमी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। खाने-पीने की जरूरी चीजों के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल की ऊंची कीमतें लोगों की जेब पर भारी पड़ रही हैं। हालांकि 8 अगस्त को भारतीय पेट्रोलियम कंपनियों ने ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है, जिससे फिलहाल दाम स्थिर बने हुए हैं।
सब्जियां, दालें, तेल और अनाज जैसी बुनियादी खाद्य वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं। मई के महीने में, 2022 के बाद पहली बार, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7.5 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया था, जिसके बाद से दाम अपरिवर्तित बने हुए हैं। कंपनियों को ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के दौरान कच्चे तेल के 100 डॉलर प्रति बैरल पार जाने के बावजूद कीमतें न बढ़ाने पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था।
शनिवार को दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये में मिल रहा है। देश में सबसे सस्ता ईंधन अंडमान निकोबार में (पेट्रोल 88.66 रुपये) जबकि सबसे महंगा तेलंगाना में (पेट्रोल 115.69 रुपये) है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है, शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 83.55 डॉलर प्रति बैरल पर था।
नई दिल्ली। देशभर में बढ़ती महंगाई से आम आदमी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। खाने-पीने की जरूरी चीजों के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल की ऊंची कीमतें लोगों की जेब पर भारी पड़ रही हैं। हालांकि 8 अगस्त को भारतीय पेट्रोलियम कंपनियों ने ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है, जिससे फिलहाल दाम स्थिर बने हुए हैं।
सब्जियां, दालें, तेल और अनाज जैसी बुनियादी खाद्य वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं। मई के महीने में, 2022 के बाद पहली बार, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7.5 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया था, जिसके बाद से दाम अपरिवर्तित बने हुए हैं। कंपनियों को ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के दौरान कच्चे तेल के 100 डॉलर प्रति बैरल पार जाने के बावजूद कीमतें न बढ़ाने पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था।
शनिवार को दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये में मिल रहा है। देश में सबसे सस्ता ईंधन अंडमान निकोबार में (पेट्रोल 88.66 रुपये) जबकि सबसे महंगा तेलंगाना में (पेट्रोल 115.69 रुपये) है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है, शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 83.55 डॉलर प्रति बैरल पर था।
नई दिल्ली। देशभर में बढ़ती महंगाई से आम आदमी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। खाने-पीने की जरूरी चीजों के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल की ऊंची कीमतें लोगों की जेब पर भारी पड़ रही हैं। हालांकि 8 अगस्त को भारतीय पेट्रोलियम कंपनियों ने ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है, जिससे फिलहाल दाम स्थिर बने हुए हैं।
सब्जियां, दालें, तेल और अनाज जैसी बुनियादी खाद्य वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं। मई के महीने में, 2022 के बाद पहली बार, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7.5 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया था, जिसके बाद से दाम अपरिवर्तित बने हुए हैं। कंपनियों को ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के दौरान कच्चे तेल के 100 डॉलर प्रति बैरल पार जाने के बावजूद कीमतें न बढ़ाने पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था।
शनिवार को दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये में मिल रहा है। देश में सबसे सस्ता ईंधन अंडमान निकोबार में (पेट्रोल 88.66 रुपये) जबकि सबसे महंगा तेलंगाना में (पेट्रोल 115.69 रुपये) है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है, शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 83.55 डॉलर प्रति बैरल पर था।
नई दिल्ली। देशभर में बढ़ती महंगाई से आम आदमी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। खाने-पीने की जरूरी चीजों के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल की ऊंची कीमतें लोगों की जेब पर भारी पड़ रही हैं। हालांकि 8 अगस्त को भारतीय पेट्रोलियम कंपनियों ने ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है, जिससे फिलहाल दाम स्थिर बने हुए हैं।
सब्जियां, दालें, तेल और अनाज जैसी बुनियादी खाद्य वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं। मई के महीने में, 2022 के बाद पहली बार, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7.5 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया था, जिसके बाद से दाम अपरिवर्तित बने हुए हैं। कंपनियों को ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के दौरान कच्चे तेल के 100 डॉलर प्रति बैरल पार जाने के बावजूद कीमतें न बढ़ाने पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था।
शनिवार को दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये में मिल रहा है। देश में सबसे सस्ता ईंधन अंडमान निकोबार में (पेट्रोल 88.66 रुपये) जबकि सबसे महंगा तेलंगाना में (पेट्रोल 115.69 रुपये) है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है, शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 83.55 डॉलर प्रति बैरल पर था।
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शनिवार को दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये में मिल रहा है। देश में सबसे सस्ता ईंधन अंडमान निकोबार में (पेट्रोल 88.66 रुपये) जबकि सबसे महंगा तेलंगाना में (पेट्रोल 115.69 रुपये) है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है, शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 83.55 डॉलर प्रति बैरल पर था।