आसन । भारत की उभरती बैडमिंटन खिलाड़ी अनमोल खर्ब कोरिया मास्टर्स 2026 के प्री-क्वार्टर फाइनल में हार के साथ ही बाहर हो गयी है। विश्व रैंकिंग में 45वें स्थान पर रही अनमोल को वियतनाम की ओलंपियन वू थी ट्रांग ने तीन गेम तक चले संघर्षपूर्ण मुकाबले में 23-21, 15-21, 21-18 से हरा दिया।
यह हार अनमोल के लिए निराशाजनक रही। वह जीत के बेहद करीब पहुंचकर भी वापसी करने में विफल रही। अनमोल की विरोधी वियतनामी खिलाड़ी को उसके अनुभव का लाभ मिला।
इस मुकाबले की शुरुआत से ही अनमोल खर्ब ने बढ़त बना ली। एक समय अनमोल के पहले गेम में जीत की पूरी उम्मीद थी पर निर्णायक क्षणों में, उन्होंने चार अहम गेम अंक खो दिए। विरोधी खिलाड़ी वू थी ट्रांग ने इन अवसरों का लाभ उठाते हुए शानदार वापसी की और पहले गेम को 23-21 से जीत लिया, जिससे उन्हें शुरुआती बढ़त मिल गयी।
पहले गेम में हार के बाद भी इस भारतीय खिलाड़ी ने दूसरे गेम में वापसी का प्रदर्शन किया। उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया और अंक हासिल किये। हाफटाइम के समय 11-9 की बढ़त बनाने के बाद, अनमोल ने अपनी लय बरकरार रखी और वू थी ट्रांग को कोई अवसर नहीं दिया।
उन्होंने शानदार खेल दिखाते हुए दूसरा गेम 21-15 से जीत लिया, जिससे मैच एक निर्णायक तीसरे गेम में चला गया और रोमांच अपने चरम पर पहुंच गया। वहीं तीसरे और निर्णायक गेम में वियतनाम की खिलाड़ी ने 19-9 के से बढ़त बना ली। अनमोल ने इसके बाद भी लगातार आठ अंक हासिल कर वापसी की। जिससे स्कोर 19-17 हो गया पर अंत में वियतनामी खिलाड़ी ने दो अंक जीतकर 21-18 से गेम के साथ ही मुकाबला अपने नाम किया। इस हार के साथ ही अनमोल कोरियाई मास्टर्स से बाहर हो गयी।
भोपाल- स्थित मध्यप्रदेश मत्स्य महासंघ (सहकारी मर्यादित) के संचालक कार्यालय में गुरुवार को हलाली डैम से जुड़े सैकड़ों मछुआरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। मछुआरों ने डिफर्ड वेज की राशि, लंबित भुगतान और अधिकारियों की कथित उदासीनता के विरोध में प्रदर्शन करते हुए ज्ञापन सौंपा। इस दौरान उन्होंने दफ्तर घेर लिया।
मछुआरों का कहना था कि हर वर्ष जुलाई माह में मिलने वाला डिफर्ड वेज का भुगतान इस बार अब तक नहीं किया गया है। इसके अलावा 80-20 नाव-जाल योजना, मीनाक्षी विवाह योजना, मृत्यु सहायता राशि एवं प्रोत्साहन योजना सहित अन्य योजनाओं का भुगतान भी लंबे समय से लंबित है। इससे मछुआरा परिवार गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं।
बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगवा रहे

मछुआरों ने आरोप लगाया कि भुगतान के लिए उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगवाए जा रहे हैं। कभी नई फाइल, कभी नए दस्तावेज और कभी अधिकारियों की अनुपस्थिति का हवाला देकर उन्हें टाल दिया जाता है। उन्होंने कहा कि बच्चों की स्कूल फीस, किताबें, घरेलू खर्च, बैंक की किस्तें और इलाज जैसी आवश्यक जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है। इसके बाद उन्होंने विभाग के सीजीएम रवि गजभिए को ज्ञापन भी सौंपा।
ज्ञापन में कहा कि हलाली डैम की मछुआरा समितियों को पूर्व में उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया जा चुका है और स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा उनके कार्यों की सराहना की गई है। बावजूद इसके आज वही मछुआरे अपनी मेहनत की कमाई के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। मछुआरों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे अपनी आवाज मुख्यमंत्री, मत्स्य पालन मंत्री एवं शासन के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाते हुए आंदोलन को और व्यापक रूप देंगे।
भारत की बेटियां सीमा की रक्षा ही नहीं, युद्ध की रणनीति भी कर रहीं तय
नई दिल्ली,। भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन लीडर भावना कांत देश की पहली महिला टॉप गन कॉम्बैट पायलट बन गई हैं, जबकि भारतीय सेना की कैप्टन शिवानी सहरावत सेना प्रमुख की पहली महिला एड-डी-कैंप नियुक्त हुई हैं। ये दोनों उपलब्धियां साबित करती हैं कि भारत की बेटियां अब सिर्फ सीमा की रक्षा ही नहीं कर रहीं, बल्कि युद्ध की रणनीति तय करने और सेना के नेतृत्व में भी अहम भूमिका निभा रही हैं।
बता दें भारतीय वायुसेना के सबसे कठिन और प्रतिष्ठित फाइटर कॉम्बैट लीडर कोर्स को सफलतापूर्वक पूरा कर स्क्वाड्रन लीडर भावना कांत ने इतिहास रच दिया है। ग्वालियर स्थित टैक्टिक्स एंड एयर कॉम्बैट डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट में आयोजित यह 20 सप्ताह का कोर्स इतना चुनौतीपूर्ण माना जाता है कि इसमें केवल चुनिंदा लड़ाकू पायलटों को ही प्रवेश मिलता है। वायुसेना के महज करीब एक फीसदी फाइटर पायलट ही इस स्तर तक पहुंच पाते हैं। यही कारण है कि इसकी तुलना अमेरिकी नौसेना के टॉप गन कार्यक्रम से की जाती है।
बता दें बिहार के दरभंगा में 1 दिसंबर 1992 को जन्मी भावना कांत ने बरौनी रिफाइनरी डीएवी पब्लिक स्कूल से शिक्षा प्राप्त की और बेंगलुरु के बीएमएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स में बीई की डिग्री हासिल की। कुछ समय तक टीसीएस में कार्य करने के बाद उन्होंने भारतीय वायुसेना का रास्ता चुना।
जून 2016 में वे अवनी चतुर्वेदी और मोहना सिंह के साथ देश की पहली महिला फाइटर पायलटों के बैच का हिस्सा बनीं। 2019 में वे मिग-21 बाइसन पर दिन के समय लड़ाकू अभियान के लिए योग्य घोषित होने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। बाद में उन्होंने अत्याधुनिक सुखोई-30 एमकेआई जैसे फ्रंटलाइन मल्टीरोल फाइटर विमान का संचालन किया। 2021 की गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लेने वाली पहली महिला फाइटर पायलट बनने से लेकर 2024 की गणतंत्र दिवस फ्लाईपास्ट तक उनका सफर लगातार नए कीर्तिमान स्थापित करता रहा है। वर्ष 2020 में उन्हें नारी शक्ति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
वहीं भारतीय सेना में कैप्टन शिवानी सहरावत का सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ के एड-डी-कैंप के रूप में नियुक्त होना भी ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह अत्यंत संवेदनशील और भरोसेमंद जिम्मेदारी होती है। इस पद पर वही अधिकारी चुने जाते हैं जिनका सेवा रिकॉर्ड उत्कृष्ट हो, अनुशासन अनुकरणीय हो और सैन्य प्रक्रियाओं व प्रोटोकॉल की गहरी समझ हो। किसी महिला अधिकारी का पहली बार इस पद तक पहुंचना भारतीय सेना में लैंगिक समानता की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
स्क्वाड्रन लीडर भावना कांत का टॉप गन बनना और कैप्टन शिवानी सहरावत का सेना प्रमुख की एडीसी नियुक्त होना केवल व्यक्तिगत उपलब्धियां नहीं हैं। ये उस नए भारत का प्रतीक हैं, जहां महिलाओं को अवसर नहीं, बल्कि जिम्मेदारी दी जा रही है, जहां वे युद्ध लड़ने के साथ-साथ युद्ध की रणनीति भी तय कर रही हैं। यह बदलती तस्वीर भारत की सैन्य क्षमता को नई ऊंचाई देने के साथ-साथ दुनिया को यह स्पष्ट संदेश देती है कि अब भारत की सुरक्षा व्यवस्था में उसकी बेटियां भी सर्वश्रेष्ठ योद्धा की भूमिका निभा रही हैं।
कांके। जिले के ग्राम भीरागांव में पिछले करीब एक साल से सोलर स्ट्रीट लाइट बंद पड़ी है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार संबंधित विभाग और अधिकारियों को इसकी जानकारी देने के बावजूद अब तक मरम्मत नहीं कराई गई। इसके चलते शाम होते ही गांव की गलियां अंधेरे में डूब जाती हैं और लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के मौसम में अंधेरे की समस्या और गंभीर हो गई है। गांव की गलियों में रोशनी नहीं होने के कारण सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बना रहता है। रात के समय जरूरी काम से बाहर निकलने वाले बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। ग्रामीण योगेश साहू, बबलू लाडिया, आशीष राय, ताजेश लाडिया, महेश साहू और बल्लू भास्कर ने बताया कि गांव को रोशन करने के उद्देश्य से शासन की ओर से सोलर स्ट्रीट लाइट लगाई गई थी।
लेकिन रखरखाव के अभाव में यह व्यवस्था लंबे समय से बंद पड़ी है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय उदासीनता के कारण सरकारी योजना का उद्देश्य ही पूरा नहीं हो रहा है। जिस सोलर लाइट से गांव की गलियों को रोशन होना था, वह अब केवल शो-पीस बनकर रह गई है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से जल्द से जल्द सोलर स्ट्रीट लाइट की मरम्मत कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो अंधेरे के कारण किसी अप्रिय घटना की स्थिति बन सकती है।
कांके। जिले के ग्राम भीरागांव में पिछले करीब एक साल से सोलर स्ट्रीट लाइट बंद पड़ी है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार संबंधित विभाग और अधिकारियों को इसकी जानकारी देने के बावजूद अब तक मरम्मत नहीं कराई गई। इसके चलते शाम होते ही गांव की गलियां अंधेरे में डूब जाती हैं और लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के मौसम में अंधेरे की समस्या और गंभीर हो गई है। गांव की गलियों में रोशनी नहीं होने के कारण सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बना रहता है। रात के समय जरूरी काम से बाहर निकलने वाले बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। ग्रामीण योगेश साहू, बबलू लाडिया, आशीष राय, ताजेश लाडिया, महेश साहू और बल्लू भास्कर ने बताया कि गांव को रोशन करने के उद्देश्य से शासन की ओर से सोलर स्ट्रीट लाइट लगाई गई थी।
लेकिन रखरखाव के अभाव में यह व्यवस्था लंबे समय से बंद पड़ी है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय उदासीनता के कारण सरकारी योजना का उद्देश्य ही पूरा नहीं हो रहा है। जिस सोलर लाइट से गांव की गलियों को रोशन होना था, वह अब केवल शो-पीस बनकर रह गई है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से जल्द से जल्द सोलर स्ट्रीट लाइट की मरम्मत कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो अंधेरे के कारण किसी अप्रिय घटना की स्थिति बन सकती है।
कांके। जिले के ग्राम भीरागांव में पिछले करीब एक साल से सोलर स्ट्रीट लाइट बंद पड़ी है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार संबंधित विभाग और अधिकारियों को इसकी जानकारी देने के बावजूद अब तक मरम्मत नहीं कराई गई। इसके चलते शाम होते ही गांव की गलियां अंधेरे में डूब जाती हैं और लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के मौसम में अंधेरे की समस्या और गंभीर हो गई है। गांव की गलियों में रोशनी नहीं होने के कारण सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बना रहता है। रात के समय जरूरी काम से बाहर निकलने वाले बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। ग्रामीण योगेश साहू, बबलू लाडिया, आशीष राय, ताजेश लाडिया, महेश साहू और बल्लू भास्कर ने बताया कि गांव को रोशन करने के उद्देश्य से शासन की ओर से सोलर स्ट्रीट लाइट लगाई गई थी।
लेकिन रखरखाव के अभाव में यह व्यवस्था लंबे समय से बंद पड़ी है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय उदासीनता के कारण सरकारी योजना का उद्देश्य ही पूरा नहीं हो रहा है। जिस सोलर लाइट से गांव की गलियों को रोशन होना था, वह अब केवल शो-पीस बनकर रह गई है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से जल्द से जल्द सोलर स्ट्रीट लाइट की मरम्मत कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो अंधेरे के कारण किसी अप्रिय घटना की स्थिति बन सकती है।
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ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के मौसम में अंधेरे की समस्या और गंभीर हो गई है। गांव की गलियों में रोशनी नहीं होने के कारण सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बना रहता है। रात के समय जरूरी काम से बाहर निकलने वाले बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। ग्रामीण योगेश साहू, बबलू लाडिया, आशीष राय, ताजेश लाडिया, महेश साहू और बल्लू भास्कर ने बताया कि गांव को रोशन करने के उद्देश्य से शासन की ओर से सोलर स्ट्रीट लाइट लगाई गई थी।
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कांके। जिले के ग्राम भीरागांव में पिछले करीब एक साल से सोलर स्ट्रीट लाइट बंद पड़ी है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार संबंधित विभाग और अधिकारियों को इसकी जानकारी देने के बावजूद अब तक मरम्मत नहीं कराई गई। इसके चलते शाम होते ही गांव की गलियां अंधेरे में डूब जाती हैं और लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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