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MP में किसानों के हित में बड़ा कदम: मोहन कैबिनेट ने 100 करोड़ की 'कवच योजना' को दी मंजूरी, हजारों डिफाल्टर किसानों को मिलेगा लाभ

 भोपाल।  मोहन कैबिनेट ने किसानों के लिए 100 करोड़ की 'कवच योजना' को मंजूरी दी, जिससे हजारों डिफाल्टर किसानों को राहत मिलेगी। बैठक में एआई शिक्षा के लिए 'मिशन बुनियाद', उत्कृष्ट प्राचार्यों को सम्मान निधि और 'मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान' जैसे कई अहम फैसले भी लिए गए।

  1. किसानों के लिए 100 करोड़ की 'कवच योजना' स्वीकृत।

  2. एआई शिक्षा हेतु 'मिशन बुनियाद' 8 जिलों में शुरू।

  3. 100% रिजल्ट वाले प्राचार्यों को 1 लाख सम्मान निधि।


डिजिटल डेस्क, भोपाल। मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में किसानों और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े कई अहम फैसलों को मंजूरी दी गई।

बैठक में प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) के डिफाल्टर किसानों को राहत देने के लिए 'कवच योजना' को स्वीकृति दी गई है। सरकार का दावा है कि योजना से करीब 5 हजार किसान सीधे लाभान्वित होंगे।

सहकारी समितियों के ऋण खातों में हुई अनियमितताओं के कारण प्रभावित किसानों को राहत देने के उद्देश्य से यह योजना लाई गई है। सरकार का कहना है कि ऐसे मामलों में किसानों को किसी तरह का नुकसान न उठाना पड़े, इसी उद्देश्य से 'कवच योजना' लागू की जा रही है।












संगीत शिक्षक भर्ती मामले में लोक शिक्षण के अधिकारियों को अवमानना नोटिस

 जबलपुर, । संगीत शिक्षक भर्ती-2024 से जुड़े मामलों में उच्च न्यायालय के पूर्व में जारी अंतरिम आदेशों का पालन नहीं किए जाने पर न्यायालय ने लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) के संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अवमानना नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, म.प्र. उच्च न्यायालय ने 19 जून, 22 जून, 23 जून और नौ जुलाई 2026 को अलग-अलग प्रकरणों में अंतरिम आदेश जारी कर प्रयाग संगीत समिति, प्रयागराज के ‘प्रभाकर’ सहित समकक्ष योग्यता रखने वाले अभ्यर्थियों को विकल्प भरने की अनुमति देने के निर्देश दिए थे। साथ ही अंतिम नियुक्ति को न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रखा गया था। दायर याचिका में आरोपित है कि इसके बावजूद लोक शिक्षण संचालनालय ने आदेशों का पूर्ण पालन नहीं किया।

अभ्यर्थियों ने प्रभाकर को संगीत स्नातक के समकक्ष मान्यता के समर्थन में सर्वोच्च न्यायालय, केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण नई दिल्ली, दिल्ली व पटना हाई कोर्ट के निर्णयों तथा मध्य प्रदेश शासन के 19 अक्टूबर 1974 के आदेश समेत कई दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं।

अभ्यर्थियों का आरोप है कि समान योग्यता के बावजूद अलग-अलग मापदंड अपनाए गए। उच्च न्यायालय ने मामले में अधिकारियों से पूर्व में जारी किए गए आदेशों का पालन नहीं करने के संबंध में नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया है। मामले में सुनवाई के दौरान अवमानना याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रवीण वर्मा व डा.ज्योति वर्मा ने पक्ष रखा।


हरियाली महोत्सव और मित्रता दिवस मनाया

इन्दौर । महिला सशक्तीकरण का संदेश देते सुरभि मनोचा चौधरी के मुख्य आतिथ्य में म.प्र नागर ब्राह्मण महिला परिषद, शाखा इंदौर द्वारा अध्यक्ष प्रीति त्रिवेदी और महासचिव रूपा मेहता के नेतृत्व में हरियाली महोत्सव और मित्रता दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें रंग-बिरंगी लहरिया साड़ियों और सोलह श्रृंगार से सजी मातृशक्तियों ने भारतीय संस्कृति की छटा बिखेरी।

कार्यक्रम में पल्लवी व्यास के नेतृत्व में मातृशक्तियों ने सावन के गीतों पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। दिव्या मंडलोई व पुनीता व्यास के भजनों तथा रश्मि भूपेंद्र नागर की कविताएं सुनाईं। कार्यक्रम में  प्रश्नोत्तरी, सामूहिक नृत्य और मनोरंजक खेलों का भी आयोजन किया गया। समापन पौधों के वितरण के साथ हुआ। संचालन साक्षी मेहता ने किया।



पहली बार नेशनल हाईवे पर होने वाली मौतों में आई कमी, मध्यप्रदेश, यूपी में हुआ सुधार

नई दिल्ली,। भारत में कोविड महामारी के बाद पहली बार नेशनल हाईवे पर होने वाली मौतों में कमी आई है, जबकि भारत में कुल सड़क दुर्घटनाओं में मौतें बढ़ीं। पिछले हफ्ते लोकसभा में पेश किए गए सरकारी डेटा से पता चलता है कि केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे एक्सप्रेस समेत एनएच पर होने वाली मौतों में 4.1 फीसदी की गिरावट आई है।

एक्सप्रेसवे एनएव पर होने वाली मौतें 2024 में 64,772 से 4.1फीसदी घटकर 2025 में 62,122 हो गईं। वहीं राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से, 20 ने एनएच पर होने वाली मौतों की कमी दर्ज की गई है, लेकिन 15 राज्यों में बढ़ोतरी हुई है। लक्षद्वीप जहां कोई नेशनल हाईवे नहीं है, 2022 से ‘जीरो एनएच मौतें’ दर्ज करने वाला अकेला राज्य था।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लोकसभा में पेश किए गए डेटा से पता चलता है कि एनएच मौतों में सबसे ज्यादा गिरावट यूपी में दर्ज की गई, जहां 2024 में 9,560 मौतें हुई थीं, जो 2025 में घटकर 7,573 हो गईं। मध्य प्रदेश में भी कमी दर्ज की गई, जो 4,644 से घटकर 3,610 हो गईं, साथ ही पंजाब में भी इसी दौरान 1,562 से घटकर 1,022 हो गईं। वहीं जिन राज्यों में एनएच मौतों में बढ़ोतरी देखी गई, उनमें तमिलनाडु, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, आंध्र प्रदेश और गुजरात शामिल हैं।



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MP में किसानों के हित में बड़ा कदम: मोहन कैबिनेट ने 100 करोड़ की 'कवच योजना' को दी मंजूरी, हजारों डिफाल्टर किसानों को मिलेगा लाभ

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एक्सप्रेसवे एनएव पर होने वाली मौतें 2024 में 64,772 से 4.1फीसदी घटकर 2025 में 62,122 हो गईं। वहीं राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से, 20 ने एनएच पर होने वाली मौतों की कमी दर्ज की गई है, लेकिन 15 राज्यों में बढ़ोतरी हुई है। लक्षद्वीप जहां कोई नेशनल हाईवे नहीं है, 2022 से ‘जीरो एनएच मौतें’ दर्ज करने वाला अकेला राज्य था।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लोकसभा में पेश किए गए डेटा से पता चलता है कि एनएच मौतों में सबसे ज्यादा गिरावट यूपी में दर्ज की गई, जहां 2024 में 9,560 मौतें हुई थीं, जो 2025 में घटकर 7,573 हो गईं। मध्य प्रदेश में भी कमी दर्ज की गई, जो 4,644 से घटकर 3,610 हो गईं, साथ ही पंजाब में भी इसी दौरान 1,562 से घटकर 1,022 हो गईं। वहीं जिन राज्यों में एनएच मौतों में बढ़ोतरी देखी गई, उनमें तमिलनाडु, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, आंध्र प्रदेश और गुजरात शामिल हैं।



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एक्सप्रेसवे एनएव पर होने वाली मौतें 2024 में 64,772 से 4.1फीसदी घटकर 2025 में 62,122 हो गईं। वहीं राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से, 20 ने एनएच पर होने वाली मौतों की कमी दर्ज की गई है, लेकिन 15 राज्यों में बढ़ोतरी हुई है। लक्षद्वीप जहां कोई नेशनल हाईवे नहीं है, 2022 से ‘जीरो एनएच मौतें’ दर्ज करने वाला अकेला राज्य था।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लोकसभा में पेश किए गए डेटा से पता चलता है कि एनएच मौतों में सबसे ज्यादा गिरावट यूपी में दर्ज की गई, जहां 2024 में 9,560 मौतें हुई थीं, जो 2025 में घटकर 7,573 हो गईं। मध्य प्रदेश में भी कमी दर्ज की गई, जो 4,644 से घटकर 3,610 हो गईं, साथ ही पंजाब में भी इसी दौरान 1,562 से घटकर 1,022 हो गईं। वहीं जिन राज्यों में एनएच मौतों में बढ़ोतरी देखी गई, उनमें तमिलनाडु, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, आंध्र प्रदेश और गुजरात शामिल हैं।



रुपया तीन पैसे मजबूत होकर 95.34 प्रति डॉलर पर खुला

नई दिल्ली,। भारत में कोविड महामारी के बाद पहली बार नेशनल हाईवे पर होने वाली मौतों में कमी आई है, जबकि भारत में कुल सड़क दुर्घटनाओं में मौतें बढ़ीं। पिछले हफ्ते लोकसभा में पेश किए गए सरकारी डेटा से पता चलता है कि केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे एक्सप्रेस समेत एनएच पर होने वाली मौतों में 4.1 फीसदी की गिरावट आई है।

एक्सप्रेसवे एनएव पर होने वाली मौतें 2024 में 64,772 से 4.1फीसदी घटकर 2025 में 62,122 हो गईं। वहीं राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से, 20 ने एनएच पर होने वाली मौतों की कमी दर्ज की गई है, लेकिन 15 राज्यों में बढ़ोतरी हुई है। लक्षद्वीप जहां कोई नेशनल हाईवे नहीं है, 2022 से ‘जीरो एनएच मौतें’ दर्ज करने वाला अकेला राज्य था।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लोकसभा में पेश किए गए डेटा से पता चलता है कि एनएच मौतों में सबसे ज्यादा गिरावट यूपी में दर्ज की गई, जहां 2024 में 9,560 मौतें हुई थीं, जो 2025 में घटकर 7,573 हो गईं। मध्य प्रदेश में भी कमी दर्ज की गई, जो 4,644 से घटकर 3,610 हो गईं, साथ ही पंजाब में भी इसी दौरान 1,562 से घटकर 1,022 हो गईं। वहीं जिन राज्यों में एनएच मौतों में बढ़ोतरी देखी गई, उनमें तमिलनाडु, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, आंध्र प्रदेश और गुजरात शामिल हैं।



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एक्सप्रेसवे एनएव पर होने वाली मौतें 2024 में 64,772 से 4.1फीसदी घटकर 2025 में 62,122 हो गईं। वहीं राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से, 20 ने एनएच पर होने वाली मौतों की कमी दर्ज की गई है, लेकिन 15 राज्यों में बढ़ोतरी हुई है। लक्षद्वीप जहां कोई नेशनल हाईवे नहीं है, 2022 से ‘जीरो एनएच मौतें’ दर्ज करने वाला अकेला राज्य था।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लोकसभा में पेश किए गए डेटा से पता चलता है कि एनएच मौतों में सबसे ज्यादा गिरावट यूपी में दर्ज की गई, जहां 2024 में 9,560 मौतें हुई थीं, जो 2025 में घटकर 7,573 हो गईं। मध्य प्रदेश में भी कमी दर्ज की गई, जो 4,644 से घटकर 3,610 हो गईं, साथ ही पंजाब में भी इसी दौरान 1,562 से घटकर 1,022 हो गईं। वहीं जिन राज्यों में एनएच मौतों में बढ़ोतरी देखी गई, उनमें तमिलनाडु, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, आंध्र प्रदेश और गुजरात शामिल हैं।



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