भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में मध्यप्रदेश के सर्वांगीण विकास, बुनियादी ढांचे और जनकल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में लगभग 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। ग्रामीण विकास के लिए ‘विकसित भारत (ग्रामीण): वीबी जी राम जी विकसित भारत जी राम जी योजना’ के क्रियान्वयन हेतु 29 हजार 619 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रस्ताव का अनुसमर्थन किया गया।
दुग्ध उत्पादकों के हितों को ध्यान में रखते हुए सहकारी प्रणाली और सांची ब्राण्ड के उन्नयन के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के सहयोग से 2 हजार 973 करोड़ रुपये की डेयरी विकास योजना स्वीकृत की गई। इससे प्रदेश में दुग्ध उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
सड़क अधोसंरचना के क्षेत्र में पश्चिम भोपाल बायपास के 35.61 किलोमीटर लंबे 4-लेन मार्ग के निर्माण के लिए 3 हजार 774 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति दी गई। वहीं मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग के 67.116 किलोमीटर लंबे 4-लेन मार्ग के निर्माण के लिए 3 हजार 272 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई।
तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आरजीपीवी का पुनर्गठन कर भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में तीन पृथक प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया। स्वास्थ्य संस्थाओं में मशीन एवं उपकरणों के अनुरक्षण के लिए 488.41 करोड़ रुपये तथा चिकित्सा संस्थानों की विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 915.77 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।

इसके अलावा मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा में सामाजिक न्याय विभाग के जिला कार्यालयों के लिए 21 पद तथा निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर में जिला आयुष कार्यालयों के संचालन के लिए 20 पदों के सृजन को मंजूरी दी गई। किसानों के हित में पंजीकृत कृषकों से मूंग उपज के 60 प्रतिशत तक उपार्जन किए जाने के निर्णय का भी अनुसमर्थन किया गया।
भोपाल में एमपी नगर पुलिस ने खुद को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) का अधिकारी बताकर बेरोजगार युवाओं से ठगी करने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।
आरोपी अपनी पहचान 2016 बैच के आईपीएस अधिकारी के रूप में बताता था और सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं से पैसे वसूलता था। पुलिस ने उसके पास से फर्जी आईपीएस पहचान पत्र, नकली दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी की पहचान झांसी निवासी ऋषि कुमार यादव के रूप में हुई है। वह
कभी खुद को आईपीएस अधिकारी बताता था तो कभी आयकर विभाग का जॉइंट इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर या इंटेलिजेंस अधिकारी बताकर युवाओं को प्रभावित करता था। उसका निशाना मुख्य रूप से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे छात्र और नौकरी तलाशने वाले युवा थे।
रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई के खिलाफ मंगलवार को भोपाल में व्यापारी सड़कों पर उतर आए। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के बैनर तले बड़ी संख्या में व्यापारी सुबह 11 बजे न्यू मार्केट स्थित नानके पेट्रोल पंप पर जुटे और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलने सीएम हाउस की ओर बढ़े। रोशनपुरा चौराहे से पहले पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया।
बैरिकेड्स हटाकर आगे बढ़े व्यापारी, धक्का-मुक्की
व्यापारियों ने बैरिकेड्स हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस ने सख्ती की और प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। धक्का-मुक्की के बीच कुछ व्यापारी नीचे भी गिर गए। प्रदर्शन में व्यापारी लगातार सीलिंग कार्रवाई रोकने और सरकार से राहत देने की मांग कर रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि चाहे लाठी खानी पड़े, लेकिन आंदोलन जारी रहेगा।
'कारोबार बंद हुआ तो रोजी-रोटी पर संकट'
व्यापारियों का कहना है कि शहर में कई दुकानें 50 से 60 साल पुरानी हैं। सरकार ने इन्हें जीएसटी नंबर, गुमाश्ता लाइसेंस और व्यावसायिक बिजली कनेक्शन तक दिए हैं। ऐसे में अब अचानक सीलिंग की कार्रवाई से हजारों कारोबारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। बैंक से लिए गए कर्ज की किस्त, कर्मचारियों की तनख्वाह और परिवार की जिम्मेदारियां भी प्रभावित होंगी। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अजय देवनानी ने कहा कि व्यापारियों की मांग है कि व्यावहारिक समाधान निकाला जाए। इसके लिए मिश्रित भू-उपयोग और क्षेत्रवार योजना लागू की जा सकती है। व्यापारियों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर तत्काल राहत देने की मांग की है।

चार दिन से नोटिस नहीं, सीधे कार्रवाई का आरोप
व्यापारियों का आरोप है कि पिछले चार दिनों से प्रतिष्ठानों को नए नोटिस नहीं दिए जा रहे हैं। इसके बावजूद कार्रवाई की जा रही है। निगम अधिकारियों का कहना है कि नोटिस देने के बाद संबंधित प्रतिष्ठानों का परीक्षण किया जा रहा है और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।
दूसरे दिन भी कैफे-होटल समेत कई प्रतिष्ठान बंद
इधर, व्यापारियों के प्रदर्शन के बीच मंगलवार सुबह 9 बजे से नगर निगम ने दूसरे दिन भी कार्रवाई शुरू कर दी। कोहेफिजा स्थित चाय लीला कैफे सहित होटल, बुक शॉप और बेकरी पर कार्रवाई की गई। कई संचालकों ने निगम की टीम पहुंचने से पहले ही अपने प्रतिष्ठान स्वैच्छिक रूप से बंद कर दिए। बैरागढ़ के चंचल चौराहे पर होटल प्रेस्टिसाइड और शैक बार, इकबाल मैदान में स्वीट बुक, करोंद में फ्रेश बेकरी और कोहेफिजा में चाय लीला को बंद कराया गया। कई प्रतिष्ठानों के बाहर संचालकों ने खुद ही बंद होने के पोस्टर लगा दिए थे। इससे पहले सोमवार को पुलिस की मौजूदगी में 7 प्रतिष्ठानों को सील किया गया था, जबकि 102 दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठान स्वैच्छिक रूप से बंद कर दिए थे।
किन इलाकों में नगर निगम की कार्रवाई?
नगर निगम की टीमें मंगलवार को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में कार्रवाई कर रही हैं। इनमें उत्तर विधानसभा के कोहेफिजा, सिंधी कॉलोनी और कबाड़खाना; नरेला विधानसभा के करोंद और सुभाष नगर; दक्षिण-पश्चिम विधानसभा के न्यू एमपी-एमएलए कॉलोनी; मध्य विधानसभा के जहांगीराबाद, शादी हॉल और करबला रोड; गोविंदपुरा के बाग मुगालिया, अमराई, सहयोग विहार, रघुनाथ नगर, रोहित नगर और ज्योतिनगर, जबकि हुजूर विधानसभा के चंचल नगर, सीहोर नाका, गांधी नगर और सीटीओ क्षेत्र शामिल हैं।
शिकायत के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामल
आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है। रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों का विरोध करने वालों का कहना है कि इससे शोर, भीड़ और सार्वजनिक शांति में व्यवधान पैदा हो रहा है। उनका आरोप है कि कुछ इलाकों में असामाजिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं। स्कूलों के आसपास बढ़ते यातायात से बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कार्रवाई सिर्फ छोटे कारोबारियों तक सीमित है और बड़े व रसूखदार लोगों को छोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि निगम की पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में लाई जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तेज हुई सीलिंग
आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त के पहले सप्ताह में सुनवाई की थी। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। साथ ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले राहत संबंधी आदेश भी निरस्त कर दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को है। इस दौरान नगर निगम को अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट भी पेश करनी है। इसी के चलते शहर में नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई तेज हुई है।
मुंबई । 1990 के दशक में बॉलीवुड अभिनेता दीपक तिजोरी ने कई यादगार फिल्मों के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई। उनके करियर से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सुपरहिट फिल्म ‘बाजीगर’ को लेकर भी अक्सर चर्चा में रहता है। दीपक तिजोरी का कहना है कि इस फिल्म का शुरुआती विचार उन्होंने निर्देशक जोड़ी अब्बास-मस्तान को दिया था, लेकिन बाद में फिल्म शाहरुख खान के साथ बनी और उनके करियर की बड़ी सफलताओं में शामिल हो गई। दीपक तिजोरी का जन्म 28 अगस्त 1961 को मुंबई में हुआ था।
पढ़ाई पूरी करने के बाद उनका रुझान अभिनय की ओर बढ़ा और उन्होंने थिएटर के माध्यम से अपने करियर की शुरुआत की। बिना किसी बड़े फिल्मी पारिवारिक पृष्ठभूमि के फिल्म उद्योग में जगह बनाना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन लगातार मेहनत और छोटे किरदारों के जरिए उन्होंने धीरे-धीरे अपनी पहचान स्थापित की। वर्ष 1990 में रिलीज हुई फिल्म ‘आशिकी’ ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने कई सफल फिल्मों में काम किया और 1990 का दशक उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण दौर बन गया।
इसी दौरान ‘बाजीगर’ की कहानी से जुड़ा घटनाक्रम सामने आया। एक इंटरव्यू में दीपक तिजोरी ने बताया था कि उन्होंने हॉलीवुड फिल्म ‘अ किस बिफोर डाइंग’ देखी थी और उसकी कहानी से काफी प्रभावित हुए थे। इसके बाद उन्होंने इस विचार को हिंदी सिनेमा के अनुरूप ढालने का प्रस्ताव अब्बास-मस्तान के सामने रखा। उनकी इच्छा थी कि इस फिल्म में मुख्य भूमिका वह स्वयं निभाएं।
शुरुआत में निर्देशक जोड़ी को यह विचार पसंद आया और ऐसा माना जा रहा था कि फिल्म उनके साथ ही बनाई जाएगी। दीपक के अनुसार, उन्होंने निर्माता पहलाज निहलानी से भी इस परियोजना को लेकर चर्चा की थी। बाद में उन्हें जानकारी मिली कि अब्बास-मस्तान इस कहानी को लेकर दूसरे निर्माताओं से भी बातचीत कर रहे हैं और इसी बीच शाहरुख खान का नाम सामने आया। उस समय शाहरुख खान उनके अच्छे मित्र थे।
दीपक इस बदलाव से हैरान जरूर हुए, लेकिन उन्होंने इसे लेकर कोई विवाद नहीं किया। दीपक तिजोरी ने कहा कि शाहरुख ने भी शुरुआत में स्थिति स्पष्ट होने तक फिल्म के लिए हामी नहीं भरी थी। बाद में दीपक ने स्वयं उन्हें फिल्म करने के लिए कहा। उनके अनुसार, शायद किस्मत को यही मंजूर था और ‘बाजीगर’ शाहरुख खान के हिस्से में ही लिखी गई थी। फिल्म ने आगे चलकर शाहरुख के करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
अभिनय के अलावा दीपक तिजोरी ने निर्देशन में भी अपनी पहचान बनाई। उन्होंने ‘ऊप्स!’, ‘टॉम, डिक एंड हैरी’ और ‘दो लफ्जों की कहानी’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया और दोनों क्षेत्रों में सक्रिय रहते हुए हिंदी फिल्म जगत में अपनी अलग जगह बनाई। बता दें कि अभिनेता के ‘आशिकी’, ‘जो जीता वही सिकंदर’, ‘खिलाड़ी’, ‘दिल है कि मानता नहीं’ और ‘कभी हां कभी ना’ जैसी फिल्मों में निभाए किरदार आज भी दर्शकों को याद हैं।
मुंबई । 1990 के दशक में बॉलीवुड अभिनेता दीपक तिजोरी ने कई यादगार फिल्मों के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई। उनके करियर से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सुपरहिट फिल्म ‘बाजीगर’ को लेकर भी अक्सर चर्चा में रहता है। दीपक तिजोरी का कहना है कि इस फिल्म का शुरुआती विचार उन्होंने निर्देशक जोड़ी अब्बास-मस्तान को दिया था, लेकिन बाद में फिल्म शाहरुख खान के साथ बनी और उनके करियर की बड़ी सफलताओं में शामिल हो गई। दीपक तिजोरी का जन्म 28 अगस्त 1961 को मुंबई में हुआ था।
पढ़ाई पूरी करने के बाद उनका रुझान अभिनय की ओर बढ़ा और उन्होंने थिएटर के माध्यम से अपने करियर की शुरुआत की। बिना किसी बड़े फिल्मी पारिवारिक पृष्ठभूमि के फिल्म उद्योग में जगह बनाना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन लगातार मेहनत और छोटे किरदारों के जरिए उन्होंने धीरे-धीरे अपनी पहचान स्थापित की। वर्ष 1990 में रिलीज हुई फिल्म ‘आशिकी’ ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने कई सफल फिल्मों में काम किया और 1990 का दशक उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण दौर बन गया।
इसी दौरान ‘बाजीगर’ की कहानी से जुड़ा घटनाक्रम सामने आया। एक इंटरव्यू में दीपक तिजोरी ने बताया था कि उन्होंने हॉलीवुड फिल्म ‘अ किस बिफोर डाइंग’ देखी थी और उसकी कहानी से काफी प्रभावित हुए थे। इसके बाद उन्होंने इस विचार को हिंदी सिनेमा के अनुरूप ढालने का प्रस्ताव अब्बास-मस्तान के सामने रखा। उनकी इच्छा थी कि इस फिल्म में मुख्य भूमिका वह स्वयं निभाएं।
शुरुआत में निर्देशक जोड़ी को यह विचार पसंद आया और ऐसा माना जा रहा था कि फिल्म उनके साथ ही बनाई जाएगी। दीपक के अनुसार, उन्होंने निर्माता पहलाज निहलानी से भी इस परियोजना को लेकर चर्चा की थी। बाद में उन्हें जानकारी मिली कि अब्बास-मस्तान इस कहानी को लेकर दूसरे निर्माताओं से भी बातचीत कर रहे हैं और इसी बीच शाहरुख खान का नाम सामने आया। उस समय शाहरुख खान उनके अच्छे मित्र थे।
दीपक इस बदलाव से हैरान जरूर हुए, लेकिन उन्होंने इसे लेकर कोई विवाद नहीं किया। दीपक तिजोरी ने कहा कि शाहरुख ने भी शुरुआत में स्थिति स्पष्ट होने तक फिल्म के लिए हामी नहीं भरी थी। बाद में दीपक ने स्वयं उन्हें फिल्म करने के लिए कहा। उनके अनुसार, शायद किस्मत को यही मंजूर था और ‘बाजीगर’ शाहरुख खान के हिस्से में ही लिखी गई थी। फिल्म ने आगे चलकर शाहरुख के करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
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मुंबई । 1990 के दशक में बॉलीवुड अभिनेता दीपक तिजोरी ने कई यादगार फिल्मों के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई। उनके करियर से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सुपरहिट फिल्म ‘बाजीगर’ को लेकर भी अक्सर चर्चा में रहता है। दीपक तिजोरी का कहना है कि इस फिल्म का शुरुआती विचार उन्होंने निर्देशक जोड़ी अब्बास-मस्तान को दिया था, लेकिन बाद में फिल्म शाहरुख खान के साथ बनी और उनके करियर की बड़ी सफलताओं में शामिल हो गई। दीपक तिजोरी का जन्म 28 अगस्त 1961 को मुंबई में हुआ था।
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शुरुआत में निर्देशक जोड़ी को यह विचार पसंद आया और ऐसा माना जा रहा था कि फिल्म उनके साथ ही बनाई जाएगी। दीपक के अनुसार, उन्होंने निर्माता पहलाज निहलानी से भी इस परियोजना को लेकर चर्चा की थी। बाद में उन्हें जानकारी मिली कि अब्बास-मस्तान इस कहानी को लेकर दूसरे निर्माताओं से भी बातचीत कर रहे हैं और इसी बीच शाहरुख खान का नाम सामने आया। उस समय शाहरुख खान उनके अच्छे मित्र थे।
दीपक इस बदलाव से हैरान जरूर हुए, लेकिन उन्होंने इसे लेकर कोई विवाद नहीं किया। दीपक तिजोरी ने कहा कि शाहरुख ने भी शुरुआत में स्थिति स्पष्ट होने तक फिल्म के लिए हामी नहीं भरी थी। बाद में दीपक ने स्वयं उन्हें फिल्म करने के लिए कहा। उनके अनुसार, शायद किस्मत को यही मंजूर था और ‘बाजीगर’ शाहरुख खान के हिस्से में ही लिखी गई थी। फिल्म ने आगे चलकर शाहरुख के करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
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मुंबई । 1990 के दशक में बॉलीवुड अभिनेता दीपक तिजोरी ने कई यादगार फिल्मों के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई। उनके करियर से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सुपरहिट फिल्म ‘बाजीगर’ को लेकर भी अक्सर चर्चा में रहता है। दीपक तिजोरी का कहना है कि इस फिल्म का शुरुआती विचार उन्होंने निर्देशक जोड़ी अब्बास-मस्तान को दिया था, लेकिन बाद में फिल्म शाहरुख खान के साथ बनी और उनके करियर की बड़ी सफलताओं में शामिल हो गई। दीपक तिजोरी का जन्म 28 अगस्त 1961 को मुंबई में हुआ था।
पढ़ाई पूरी करने के बाद उनका रुझान अभिनय की ओर बढ़ा और उन्होंने थिएटर के माध्यम से अपने करियर की शुरुआत की। बिना किसी बड़े फिल्मी पारिवारिक पृष्ठभूमि के फिल्म उद्योग में जगह बनाना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन लगातार मेहनत और छोटे किरदारों के जरिए उन्होंने धीरे-धीरे अपनी पहचान स्थापित की। वर्ष 1990 में रिलीज हुई फिल्म ‘आशिकी’ ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने कई सफल फिल्मों में काम किया और 1990 का दशक उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण दौर बन गया।
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अभिनय के अलावा दीपक तिजोरी ने निर्देशन में भी अपनी पहचान बनाई। उन्होंने ‘ऊप्स!’, ‘टॉम, डिक एंड हैरी’ और ‘दो लफ्जों की कहानी’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया और दोनों क्षेत्रों में सक्रिय रहते हुए हिंदी फिल्म जगत में अपनी अलग जगह बनाई। बता दें कि अभिनेता के ‘आशिकी’, ‘जो जीता वही सिकंदर’, ‘खिलाड़ी’, ‘दिल है कि मानता नहीं’ और ‘कभी हां कभी ना’ जैसी फिल्मों में निभाए किरदार आज भी दर्शकों को याद हैं।
मुंबई । 1990 के दशक में बॉलीवुड अभिनेता दीपक तिजोरी ने कई यादगार फिल्मों के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई। उनके करियर से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सुपरहिट फिल्म ‘बाजीगर’ को लेकर भी अक्सर चर्चा में रहता है। दीपक तिजोरी का कहना है कि इस फिल्म का शुरुआती विचार उन्होंने निर्देशक जोड़ी अब्बास-मस्तान को दिया था, लेकिन बाद में फिल्म शाहरुख खान के साथ बनी और उनके करियर की बड़ी सफलताओं में शामिल हो गई। दीपक तिजोरी का जन्म 28 अगस्त 1961 को मुंबई में हुआ था।
पढ़ाई पूरी करने के बाद उनका रुझान अभिनय की ओर बढ़ा और उन्होंने थिएटर के माध्यम से अपने करियर की शुरुआत की। बिना किसी बड़े फिल्मी पारिवारिक पृष्ठभूमि के फिल्म उद्योग में जगह बनाना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन लगातार मेहनत और छोटे किरदारों के जरिए उन्होंने धीरे-धीरे अपनी पहचान स्थापित की। वर्ष 1990 में रिलीज हुई फिल्म ‘आशिकी’ ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने कई सफल फिल्मों में काम किया और 1990 का दशक उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण दौर बन गया।
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दीपक इस बदलाव से हैरान जरूर हुए, लेकिन उन्होंने इसे लेकर कोई विवाद नहीं किया। दीपक तिजोरी ने कहा कि शाहरुख ने भी शुरुआत में स्थिति स्पष्ट होने तक फिल्म के लिए हामी नहीं भरी थी। बाद में दीपक ने स्वयं उन्हें फिल्म करने के लिए कहा। उनके अनुसार, शायद किस्मत को यही मंजूर था और ‘बाजीगर’ शाहरुख खान के हिस्से में ही लिखी गई थी। फिल्म ने आगे चलकर शाहरुख के करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
अभिनय के अलावा दीपक तिजोरी ने निर्देशन में भी अपनी पहचान बनाई। उन्होंने ‘ऊप्स!’, ‘टॉम, डिक एंड हैरी’ और ‘दो लफ्जों की कहानी’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया और दोनों क्षेत्रों में सक्रिय रहते हुए हिंदी फिल्म जगत में अपनी अलग जगह बनाई। बता दें कि अभिनेता के ‘आशिकी’, ‘जो जीता वही सिकंदर’, ‘खिलाड़ी’, ‘दिल है कि मानता नहीं’ और ‘कभी हां कभी ना’ जैसी फिल्मों में निभाए किरदार आज भी दर्शकों को याद हैं।