बेहद हल्की गैलेक्सी की खोज की वैज्ञानिक ने

नई दिल्ली । अमेरिकी खगोलविदों ने एक बेहद हल्की गैलेक्सी की खोज की है। यह गैलेक्सी हमारी पड़ोसी एंड्रोमेडा गैलेक्सी के चारों ओर घूम रही है। खगोलविदों ने इस गैलेक्सी को एंड्रोमेडा एक्सएक्सएक्सवी नाम दिया गया है। यह अब तक देखी गई सबसे फीकी और सबसे छोटी गैलेक्सी है।

 वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी छोटी गैलेक्सी अब तक बची कैसे रही, क्योंकि अब तक माना जाता था कि इतनी हल्की आकाशगंगाएं ब्रह्मांड की शुरुआती गर्म और घनी परिस्थितियों में टिक नहीं पातीं। लेकिन एंड्रोमेडा एक्सएक्सएक्सवी इस धारणा को गलत साबित कर रही है। मिशिगन यूनिवर्सिटी के खगोलविद एरिक बेल का कहना है कि यह गैलेक्सी पूरी तरह से सक्रिय है, लेकिन यह हमारी मिल्की वे की तुलना में दस लाख गुना छोटी है। 

इसे इस तरह समझा जा सकता है जैसे कोई परफेक्ट इंसान जो सिर्फ एक चावल के दाने के आकार का हो। बौनी गैलेक्सियां कोई नई बात नहीं हैं, क्योंकि मिल्की वे के आसपास भी कई छोटी गैलेक्सियां पाई जा चुकी हैं। लेकिन एंड्रोमेडा के मामले में उसकी चमक इतनी ज्यादा है कि उसके चारों ओर मौजूद बौनी गैलेक्सियां अब तक हमारी नज़रों से छुपी रही थीं। यही कारण है कि पहली बार एंड्रोमेडा के पास इतनी हल्की और छोटी गैलेक्सी की खोज हुई है। मिशिगन यूनिवर्सिटी के खगोलविद मार्कोस एरियास और उनकी टीम ने कई बड़े खगोलीय डेटा सेटों का विश्लेषण किया और हबल स्पेस टेलीस्कोप की मदद से इस गैलेक्सी को पहचाना। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह केवल एक सैटेलाइट गैलेक्सी नहीं है, बल्कि इतनी छोटी है कि यह हमारी गैलेक्सी निर्माण की अवधारणाओं को चुनौती दे सकती है।

 आमतौर पर बड़ी गैलेक्सियां अपने आसपास की छोटी गैलेक्सियों से गैस खींच लेती हैं, जिससे नई तारों की उत्पत्ति रुक जाती है और गैलेक्सी धीरे-धीरे खत्म हो जाती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि मिल्की वे की बौनी गैलेक्सियां 10 अरब साल पहले ही खत्म हो गई थीं, जबकि एंड्रोमेडा की बौनी गैलेक्सियां 6 अरब साल पहले तक भी नए सितारे बना रही थीं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इन गैलेक्सियों की समाप्ति स्वाभाविक थी या एंड्रोमेडा ने इन्हें खत्म किया? वैज्ञानिकों के अनुसार, यह रहस्य एक ‘गैलेक्सी मर्डर मिस्ट्री’ जैसा लगता है। 


Subscribe to our Newsletter