हाईकोर्ट में हलफनामा और शासन की अनुमति के बावजूद पदोन्नति अटकी

Sep 09, 2026

30 साल से एक ही पद पर कार्यरत निगम के मूल कर्मचारी, प्रतिनियुक्ति व्यवस्था पर उठे सवाल

भोपाल। नगर निगम भोपाल के राजस्व विभाग में वर्षों से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे मूल कर्मचारियों का मामला एक बार फिर गरमा गया है। हाईकोर्ट, जबलपुर में प्रस्तुत हलफनामे और नगरीय विकास एवं आवास विभाग की स्पष्ट अनुमति के बावजूद निगम के मूल कर्मचारियों की पदोन्नति का रास्ता अब तक पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है। नगर पालिका निगम अधिकारी कर्मचारी हित संरक्षण संघ ने महापौर को ज्ञापन देकर प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारियों-कर्मचारियों को मूल विभाग में वापस भेजने तथा निगम के पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति देने की मांग की है।

शासन ने हाईकोर्ट में स्वयं अपने आदेश को प्रस्तुत कर स्वीकार किया है कि मीटर रीडर, कुर्क अमीन एवं संग्रह लिपिक को पदोन्नति के उद्देश्य से सहायक राजस्व निरीक्षक मान्य करने की अनुमति दी जा चुकी है। इसके बावजूद नगर निगम भोपाल में मूल कर्मचारियों की पदोन्नति लंबित रखना अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि शासन के इस निर्णय अथवा न्यायालय के निर्देश की जानबूझकर अनदेखी की जा रही है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होने के साथ अवमानना का प्रश्न भी उठ सकता है।

संघ के अनुसार निगम के राजस्व विभाग में कार्यरत कुर्क अमीन, मीटर रीडर और संग्रह लिपिक डाइंग कैडर के पद हैं। इन कर्मचारियों को लंबे समय से पदोन्नति नहीं मिलने के कारण कई कर्मचारी करीब 30 वर्षों से एक ही पद पर कार्यरत हैं। वहीं वर्ष 2017 एवं उसके बाद नियुक्त सहायक राजस्व निरीक्षक एवं राजस्व निरीक्षक मूल कर्मचारियों के समकक्ष अथवा उनसे वरिष्ठ हो गए हैं।

शासन ने खुद दिया था पदोन्नति का रास्ता

मामले में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज नगरीय विकास एवं आवास विभाग का आदेश है। विभाग ने 2023 में नगर निगम भोपाल में कार्यरत मीटर रीडर, कुर्क अमीन एवं संग्रह लिपिक को पदोन्नति के उद्देश्य से सहायक राजस्व निरीक्षक मान्य किए जाने की अनुमति दी थी। आदेश में कहा गया कि इन कर्मचारियों के पद डाइंग कैडर के हैं और इनके लिए पदोन्नति चैनल नहीं है। इनके कार्य राजस्व संग्रह/वसूली से संबंधित हैं, जबकि सहायक राजस्व निरीक्षक का कार्य भी इसी प्रकृति का है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख है कि तत्कालीन अपर मुख्य सचिव द्वारा उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका क्रमांक 495/2021 के संबंध में प्रस्तुत हलफनामे में डाइंग कैडर के पदों को सहायक राजस्व निरीक्षक मान्य कर पदोन्नति दिए जाने की अनुमति का उल्लेख किया गया था।

मान्यता की तारीख स्पष्ट करने की मांग

संघ का कहना है कि वर्ष 2024 में कुछ पदोन्नतियां की गईं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि शासन द्वारा सहायक राजस्व निरीक्षक के रूप में मान्यता किस तिथि अथवा किस वर्ष से प्रभावी मानी जाएगी। संघ इसी बिंदु को पदोन्नति में सबसे बड़ी बाधा बता रहा है।

संघ की मांग है कि शासन इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी करे, ताकि पुराने कर्मचारियों की पदोन्नति का निराकरण हो सके और उनकी वरिष्ठता एवं सेवा हित सुरक्षित रहें।

रिक्त पदों के बावजूद प्रतिनियुक्ति क्यों?

ज्ञापन में राजस्व विभाग में मुख्य राजस्व निरीक्षक के 18, सहायक राजस्व अधिकारी के 08 और राजस्व अधिकारी के 04 पद रिक्त होने का भी उल्लेख है। संघ का आरोप है कि निगम के अपने पात्र कर्मचारी पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं, इसके बावजूद अन्य निकायों से अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति पर लाकर पदों पर पदस्थ किया जा रहा है।

संघ के मुताबिक इससे एक ओर मूल कर्मचारियों के पदोन्नति के अवसर प्रभावित हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर निगम पर अतिरिक्त वेतन भार भी पड़ रहा है।

जोनल अधिकारी को सहायक आयुक्त स्तर पर करने की मांग

ज्ञापन में जोनल अधिकारी के पद को सहायक आयुक्त स्तर पर व्यवस्थित किए जाने की मांग भी की गई है। संघ ने शासन स्तर पर इसकी अनुमति प्रदान करने का आग्रह किया है।

संघ का कहना है कि जब शासन ने डाइंग कैडर के कर्मचारियों के लिए पदोन्नति का वैधानिक रास्ता उपलब्ध कराने की अनुमति दे दी है, तो उसके क्रियान्वयन में देरी से वर्षों से सेवा कर रहे कर्मचारियों को नुकसान नहीं होना चाहिए। अब जरूरत इस बात की है कि शासन की अनुमति की प्रभावी तिथि स्पष्ट कर निगम स्तर पर लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को शीघ्र पूरा किया जाए और प्रतिनियुक्ति के बजाय निगम के मूल पात्र कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाए।

Subscribe to our Newsletter