किम जोंग के हथियारों से घबराया अमेरिका, तबाही मचा सकती एआई तकनीक

प्योंगयांग। दुनिया में अमेरिका किसी से डरता है तो वो है उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग। वजह ये है कि दुनिया के सबसे खतरनाक हथियारों का परीक्षण बिना किसी की परवाह किए लगातार कर रहे हैं। अमेरिका भले ही दूसरे देशों को डराता धमकाता रहे लेकिन किम जोंग की तरफ देखता भी नहीं है। अब इस तानाशाह ने एआई की मदद से एक घातक हथियार बनाया है। उनका इस हथियार की बदौलत तबाही लाने की योजना है। रिपोर्ट के मुताबिक किम जोंग उन ने एआई तकनीक से लैस आत्मघाती ड्रोन बनवाए हैं। उत्तरी कोरिया की एजेंसी के मुताबिक किम ने कहा कि आधुनिक हथियारों के विकास में मानव रहित उपकरण और एआई तकनीक को सबसे ज्यादा महत्व देना चाहिए। उत्तर कोरिया के इस गैरजिम्मेदाराना व्यवहार से दुनिया बौखला गई है। अमेरिका सहित तमाम पश्चिम देश उत्तर कोरिया पर लगाने लगाने के लिए कई तरह के प्रतिबंध लगा चुके हैं।

किम जोंग उन ने नए और उन्नत जासूसी ड्रोन का भी निरीक्षण किया। ये ड्रोन जमीन और समुद्र पर दुश्मन के ठिकानों और गतिविधियों का पता लगाने में सक्षम हैं। किम ने कहा कि हमें सेना को आधुनिक बनाने के लिए मानव रहित उपकरणों और एआई को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने यह भी जोर दिया कि सैन्य इस्तेमाल के लिए स्मार्ट ड्रोनों की होड़ में आगे रहने के लिए लंबे समय तक चलने वाला एक मजबूत राष्ट्रीय कार्यक्रम बनाना जरूरी है। राज्य मीडिया ने तस्वीरें जारी कीं, जिनमें एक ड्रोन को टैंक जैसे लक्ष्य पर हमला करते और उसमें विस्फोट करते दिखाया गया। किम अपने सहायकों के साथ एक बड़े ड्रोन के पास खड़े दिखे, जो आकार में सामान्य लड़ाकू विमान से बड़ा लग रहा था। इसके अलावा किम एक चार इंजन वाले बड़े विमान के पास भी नजर आए, जिसके ऊपर रडार लगा था। यह विमान हवा में जल्दी चेतावनी देने वाला (एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग) विमान बताया जा रहा है, जो उत्तरी कोरिया की पुरानी हवाई रक्षा प्रणाली को बेहतर कर सकता है।

उत्तरी कोरिया ने ड्रोन विकसित करने पर जोर दिया है, जिसमें आत्मघाती ड्रोन भी शामिल हैं। माना जा रहा है कि यह प्रोजेक्ट पिछले एक साल से रूस के साथ बढ़ती सैन्य साझेदारी का हिस्सा है। रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग में उत्तर कोरिया के सैनिकों को ड्रोन युद्ध में शामिल होने की खबरें हैं, जिससे उन्हें जंग के मैदान का अनुभव मिल रहा है। किम ने अलग से जासूसी, खुफिया जानकारी जुटाने, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और हमले के लिए नए विकसित उपकरणों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि इन तकनीकों को तेजी से विकसित करना और सेना में शामिल करना जरूरी है। उत्तरी कोरिया का यह कदम उसकी सैन्य ताकत को बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है। पिछले कुछ समय से उत्तरी कोरिया और रूस के बीच सैन्य सहयोग बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस उत्तरी कोरिया को ड्रोन तकनीक में मदद दे रहा हो सकता है। 


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