12 दिन में खत्म हो जाएंगी इजरायली मिसाइलें?

अमेरिका की मदद नहीं मिलने पर इजरायल का अस्तित्व संकट में

तेलअवीव । ईरान और इजरायल के बीच 9 दिन से युद्ध चल रहा है। ईरान के द्वारा बैलिस्टिक मिसाइल से लगातार इजराइल पर हमले किए जा रहे हैं। ईरान की मिसाइलें इजरायल के लिए बड़ी घातक साबित हो रही हैं। दुनिया की सबसे बड़ी एयर डिफेंस प्रणाली रखने वाला इजरायल, ईरान की मिसाइलों का मुकाबला नहीं कर पा रहा है। ईरान से जो मिसाइलें छोड़ी जा रही हैं। उनसे इजराइल को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। 

इजराइल से जवाबी कार्यवाही में जो हमले किए जा रहे हैं। वह ईरान को उतना नुकसान नहीं पहुंचा पा रहे हैं। जिसके कारण इजराइल का हथियारों का जखीरा बड़ी तेजी के साथ खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है। 

एक रिपोर्ट के अनुसार इजरायली सेना के अधिकारियों का अनुमान है। यदि इसी तरह से ईरान के हमले जारी रहे। तो इजरायल के पास जो इंटरसेप्टर मिसाइलें हैं। वह खत्म हो जाएंगी। जिसके कारण इजरायल की चिंता बढ़ गई है। इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू अमेरिका तथा यूरोपीय देशों से लगातार हथियारों की मांग कर रहे हैं। लेकिन इजराइल को हथियार नहीं मिल पा रहे हैं। ईरान के साथ इजराइल का जो युद्ध शुरू हुआ है। उसमें अमेरिका को सहयोग करने के लिए दबाव बना रहा है। लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप समय पास कर रहे हैं। 

 इजराइल ने कभी सोचा भी नहीं था। ईरान के पास इस तरह उन्नत किस्म की मिसाइलें होंगी। जो इजराइल के एयर डिफेंस प्रणाली को निष्प्रभावी करते हुए इजराइल को इतने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा सकती हैं। 


युद्ध खत्म करने के कूटनीतिक प्रयास

इसराइल ने युद्ध को खत्म करने के लिए बड़े पैमाने पर कूटनीतिक प्रयास शुरू कर दिए हैं। यूरोपीय देशों में जिसमें फ्रांस जर्मनी ब्रिटेन की चर्चा ईरान के साथ चल रही है। जिनेवा में कूटनीतिक वार्ता भी शुरू हुई है। लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। इस बैठक में ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस के राजनायिक शामिल हुए हैं। ईरान इस बात पर अड़ा हुआ है, इसराइल पहले अपने हमलों को बंद करे। उसके बाद ही कोई बात हो सकेगी। ईरान कोई भी शर्त मानने के लिए तैयार नहीं है। जिसके कारण अमेरिका और यूरोपीय देश जो इजरायल के समर्थन में खड़े थे। वह असमंजस की स्थिति में है। ईरान ने सख्त चेतावनी दी है। इस युद्ध में जो भी इजरायल की मदद करेगा। ईरान उनके ऊपर सीधा हमला करेगा। चाहे अमेरिका ही क्यों ना हो। चीन और रूस का समर्थन मिल जाने के बाद ईरान की ताकत कई गुना बढ़ गई है। ईरान की मिसाइलों ने सारी दुनिया के देशों को हतप्रभ कर दिया है। इनकी मारक क्षमता और तकनीकी को लेकर सारा विश्व स्तब्ध है। जिसके कारण इजरायल की मुसीबतें बढ़ गई हैं। यह कहा जा रहा है, इजराइल 12 दिनों से ज्यादा ईरान के हमले का मुकाबला नहीं कर सकता है। जिसके कारण वह जल्द से जल्द युद्ध समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ चला है। 




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