क्या हैं ड्रैगन की डेब्ट ट्रैप डिप्लोमेसी....................जिससे दहशत में दिख रहा अमेरिका
Nov 22, 2024
वाशिंगटन । चीन इन दिनों बेहद खामोशी से दक्षिण और लैटिन अमेरिका में तेजी से पैर पसार रहा है। हाल ही में पेरू सहित ब्राजील, वेनेजुएला और इक्वाडोर में चीन की मौजूदगी देखने को तब मिली, जब चीन के इन देशों में भारी-भरकम निवेश की बात सामने आई। दक्षिण और लैटिन अमेरिका के ये वे देश हैं, जहां से अमेरिका बेहद पास है। बताया जा रहा हैं कि निवेश के बहाने चीन चारों ओर से अमेरिका घेरने में जुटा है। चीन की इस चाल को डेब्ट ट्रैप डिप्लोमेसी कहा जाता है। ड्रैगन की इस रणनीति से खुद अमेरिका भी टेंशन में है। चीन के इस पूरे मायाजाल को समझते हैं।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बीते 14 नवंबर को पेरू के चानके बंदरगाह का उद्घाटन कर इस चीन और लैटिन अमेरिका के बीच नए भूमि-समुद्र गलियारे के लिए नई शुरुआत बताया है। इस परियोजना को चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के तहत ही पैसे दिए जा रहे हैं। यह परियोजना 3.6 अरब डॉलर की है, जिसने अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि पेरू तक चीन के आने का मतलब है कि प्रशांत महासागर में चीन की मौजूदगी होना। पेरू की राजधानी लीमा से 78 किमी उत्तर में स्थित चानके करीब 60,000 की आबादी वाला एक छोटा मछली पकड़ने वाला शहर है। यह एक प्राकृतिक गहरे पानी का बंदरगाह है। चीन ने 2019 में निर्माण शुरू किया, जिसे चाइना ओशन शिपिंग कंपनी यानी सीओएससीओ ने बनाया है, जिसके पास अब बंदरगाह का 60 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि बाकी का स्वामित्व एक स्थानीय कंपनी के पास है।
दरअसल, चीन के दक्षिण अमेरिका में डेब्ट ट्रैप डिप्लोमेसी यानी कर्ज दो और फांस लो नीति कहा जाता है। इस टर्म का ईजाद भारतीय जानकार ब्रह्मा चेलानी ने 2017 में नियोलॉजिज्म के रूप में किया था। श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह के बारे में कौन नहीं जानता है। सभी को यह पता है कि जब श्रीलंका हंबनटोटा परियोजना के लिए चीनी कर्जे का भुगतान नहीं कर पाया, तब मजबूरन इसका 99 साल के लिए पट्टा एक चीनी कंपनी को देना पड़ा। पाकिस्तान, बांग्लादेश सहित कई देशों में चीन ऐसा कर चुका है, जो उसकी डेब्ट ट्रैप डिप्लोमेसी का नतीजा है।