बिजनेस टाइकून गौतम अडानी मामले में क्या कहता हैं अमेरिकी कानून

वॉशिंगटन। बिजनेस टाइकून गौतम अडानी फिर मुश्किलों से घिर गए हैं। इस बार अमेरिकी अदालत ने गौतम अडानी सहित आठ लोगों को धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के मामले में आरोपी बनाने का फैसला कर गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। कारोबारी अडानी पर आरोप है कि उन्होंने अमेरिका के निवेशकों से पैसे जुटाए और उन पैसों से भारतीय सरकारी अधिकारियों को रिश्वत ऑफर की। ये रिश्वत भी उन प्रोजेक्ट्स के लिए दी गई, जिससे 20 वर्षों में अडानी समूह की कंपनी को 2 बिलियन डॉलर यानी भारतीय रुपयों में करीब 16 हजार 881 करोड़ रुपये का मुनाफा होने का अनुमान है। लेकिन सवाल ये उठा रहा हैं कि भारतीय कारोबारी अडानी को लेकर क्या होगा। 

क्या कहता है अमेरिकी कानून?

दरअसल, अमेरिका में एफसीपीए नाम का कानून है, जिसे फॉरन करप्ट प्रेक्टीसाइज कानून कहते हैं। इसके तहत जो कंपनियां अमेरिका के स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड होती हैं, उन पर कई तरह के निर्देश लागू होते हैं। सबसे बड़ा निर्देश ये होता है कि वे दूसरे देशों के सरकारी अधिकारियों को रिश्वत नहीं दे सकते। लेकिन इस मामले में ठीक उलट हुआ।  अमेरिका का कहना है कि इस कंपनी ने उसके निवेशकों को धोखा देकर जोखिम में डाला है। अभियोग में दावा किया गया है कि अडानी ग्रीन और एज्योर के कर्ताधर्ताओं ने व्यावसायिक लाभ हासिल करने के लिए जानबूझकर रिश्वत की पेशकश की। गौतम और सागर अडानी पर प्रतिभूति धोखाधड़ी, साजिश के आरोप हैं। अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग ने भी उनके खिलाफ एक दीवानी मामला दायर किया है। अडानी और उनके भतीजे सागर के लिए अमेरिका में गिरफ्तारी वारंट जारी हुए हैं। अदालत के रिकॉर्ड बताते हैं कि अभियोजकों ने उन वारंटों को विदेशी कानून प्रवर्तन को सौंपने की योजना बनाई है। 

वारंट जारी होने का क्या मतलब?

दरअसल, अमेरिका में अभियोग का मतलब सिर्फ एक औपचारिक लिखित आरोप होता है जिसे एक अभियोजक (शिकायत कर्ता) द्वारा दर्ज होता है। उसके बाद ग्रैंड जूरी की तरफ से अपराध के आरोपी के खिलाफ अभियोग पत्र जारी करती है। यानी अभियोग पत्र जारी होते ही आरोपी के खिलाफ स्वत: गिरफ्तारी वारंट जारी हो जाता है। अमेरिकी कानून के मुताबिक, अभियोग पत्र के बाद अब कोर्ट में पूरे मामले में बहस होगी। अभियोजन पक्ष और आरोपी पक्ष कोर्ट के पटल पर अपने-अपने सबूत रखेखा। हालांकि, अडानी अभी आरोपी हैं, इसलिए अमेरिका, भारत से प्रत्यर्पण की मांग नहीं कर सकता है। यह प्रक्रिया दोषी साबित होने के बाद आगे बढ़ेगी। 

कौन-कौन आरोपी?

जिन आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है, उसमें अडानी ग्रुप के संस्थापक और चेयरमैन गौतम अडानी और अडानी ग्रीन कंपनी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सागर अडानी (30 वर्ष), अडानी ग्रुप के पूर्व सीईओ विनीत जैन का भी नाम है।  इसके अलावा, रंजीत गुप्ता, रूपेश अग्रवाल भी आरोपी हैं। केस में सिरिल कैबेनिज, सौरभ अग्रवाल, दीपक मल्होत्रा की भूमिका का भी जिक्र है। सागर अडानी, गौतम अडानी के भाई राजेश अडानी के बेटे हैं। 


 


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