अमेरिका-भारत के शेयर महंगे, यूरोप में ज्यादा आकर्षक एफसीएफ यील्ड: ‎रिपोर्ट

Aug 24, 2026

- यूरोपीय इक्विटी भारतीय-अमेरिकी बाजारों से अधिक आकर्षक, निवेशक अब ‘वैल्यू’ बाजारों पर केंद्रित

नई दिल्ली । एक ताजा वैश्विक रणनीति रिपोर्ट में कहा है कि जैसे-जैसे मूल्यांकन बढ़ रहे हैं, अमेरिका और भारत के शेयर बाजार, फ्री कैश फ्लो (एफसीएफ) यील्ड के मामले में कम आकर्षक होते जा रहे हैं जबकि यूरोप जैसे वैल्यू-ओरिएंटेड मार्केट काफी ज्यादा यील्ड दे रहे हैं। फ्री कैश फ्लो यील्ड असल में किसी कंपनी द्वारा अपने बाजार मूल्य के मुकाबले सृजित की गई वास्तविक नकदी का प्रतिशत में मापने का पैमाना होता है।  चूंकि अमेरिकी बाजार महंगे लगने लगे हैं, इसलिए निवेशक दूसरे बाजारों की ओर देख रहे हैं, जहां कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं और मूल्यांकन के हिसाब से अभी भी आकर्षक हैं।

उनका ज्यादा ध्यान एशिया के बजाय यूरोप पर है। टेक-प्रधान एसऐंडपी 500 इंडेक्स का एफसीएफ यील्ड 2.7 फीसदी है जबकि यूरोपीय इक्विटी के बड़े इंडेक्स स्टॉक्स 600 का एफसीएफ यील्ड 5 फीसदी है। निफ्टी 50 के लिए भी यह आंकड़ा 2.7 फीसदी है, जो एसऐंडपी 500 के बराबर है, लेकिन इसमें एआई का कोई योगदान नहीं है। फ्री कैश फ्लो यील्ड एक वित्तीय पैमाना है, जो कंपनी के बाजार पूंजीकरण के मुकाबले नकदी सृजित करने की क्षमता बताता है।

यह संख्या जितनी ज्यादा होती है, नकदी पैदा करने की क्षमता उतनी ही बेहतर मानी जाती है। पिछले कुछ सालों में अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों के पूंजीगत खर्च में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। वित्तीय संकट के बाद के लगभग एक दशक में ये कंपनियां बहुत ज्यादा मुनाफा कमाने लगीं। उन्हें सॉफ्टवेयर और क्लाउड कंप्यूटिंग की बढ़ती मांग से फायदा हुआ और साथ ही डॉट कॉम दौर में किए गए पूंजी निवेश का भी लाभ मिला।

उन्हें कम पूंजी की जरूरत थी और शून्य ब्याज दरों की वजह से उन्हें अच्छे मूल्यांकन का फायदा मिला। रिपोर्ट में कहा गया है, कम नॉमिनल वृद्धि और कई पुरानी इकॉनमी वाले उद्योगों में जरूरत से ज्यादा क्षमता वाले दौर में टेक्नॉलजी सेक्टर के शानदार मार्जिन और आरओई में बढ़ोतरी ने इसे बहुत आकर्षक बना दिया। चैटजीपीटी के आने के बाद, दिग्गज टेक कंपनियों के पूंजीगत खर्च में जबरदस्त उछाल आई है, जिससे उनके प्रीमियम कैश फ्लो पर काफी असर पड़ा है।



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