अमेरिकी हमले ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह तबाह नहीं कर सके
Jun 25, 2025
अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी की लीक रिपोर्ट में दावा जिसे ट्रंप बता रहे ‘फेक’
तेहरान,। ईरान के परमाणु ठिकानों पर हाल में हुई अमेरिकी एयरस्ट्राइक्स को लेकर अब अमेरिका में ही मतभेद सामने आ रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन हमलों को ‘इतिहास के सबसे सफल सैन्य अभियान बताया है, जबकि अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी की एक लीक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी हमले में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह तबाह नहीं किया जा सका। उधर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक बैठक रूस ने इजराइल के परमाणु कार्यक्रमों को लेकर उसे घेरा और दावा किया कि इस यहूदी देश के पास 90 परमाणु हथियार हैं।
मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी हमलों से ईरान के संवर्धित यूरेनियम का भंडार और प्रमुख सेंट्रीफ्यूज सुरक्षित है, जबकि ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ पहले ही सार्वजनिक रूप से दावा कर चुके हैं कि ईरान का पूरा परमाणु ढांचा तहस-नहस कर दिया गया है। ट्रंप ने इस रिपोर्ट को ‘फेक’ बताया है। एक मीडिया रिपोर्ट पर आरोप लगाया कि वे ‘एक ऐतिहासिक सैन्य जीत को नीचा दिखाने की साजिश कर रहे हैं। ट्रंप ने इसके साथ ही बी-2 बॉम्बर्स का एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें ये ईरानी परमाणु पर बंकर बस्टर बम गिराते दिख रहे हैं।
उधर व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने बयान जारी कर डीआईए की रिपोर्ट को सिरे से खारिज किया और कहा कि यह एक ‘गोपनीय रिपोर्ट का लीक’ है, जिसे किसी ‘नीच दर्जे के खुफिया अफसर’ ने गलत मंशा से लीक किया है। मीडिया रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फोर्दो, नतांज़ और इस्फहान में हुए हमलों से ज्यादातर नुकसान सिर्फ पावर यूनिट्स और बिल्डिंग की बाहरी दीवारों जैसी ऊपर की संरचनाओं को ही हुआ है। असल में ईरान पहले ही अपने संवेदनशील यूरेनियम स्टॉक को उन ठिकानों से हटा चुका था, जिससे अमेरिका की बमबारी का असर और कम हो गया।
उधर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मंगलवार को ईरान के यूएन दूत अमीर सईद इरावानी ने कहा कि इजराइल के साथ संघर्ष के बाद बने सीजफायर ने कूटनीति की ओर लौटने का एक नया अवसर दिया है। उन्होंने कहा कि जिस लंबी और बड़े पैमाने की जंग के ज़रिए वे ईरान को घुटनों पर लाना चाहते थे, वह पूरी तरह फेल हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति साफ तौर पर साबित करती है कि ‘डिप्लोमेसी और संवाद ही ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम पर विवाद सुलझाने का एकमात्र रास्ता है।
वहीं, सुरक्षा परिषद में रूस के प्रतिनिधि वसिली नेबेन्जिया ने भी अमेरिका और इजराइल पर निशाना साधा और कहा कि ईरान पर हमला परमाणु अप्रसार संधि के अधिकार को सीधी चुनौती देता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की सैन्य कार्रवाइयों से पूरे मध्य पूर्व में रेडियोलॉजिकल खतरा फैल सकता है। उन्होंने कहा कि हमें हैरानी है कि इजराइल इस बैठक में हिस्सा ले रहा है, जो एनपीटी के एजेंडे के तहत हो रही है। क्या यह संकेत है कि इजराइल एनपीटी में शामिल होने की सोच रहा है?
बता दें इजराइल एनपीटी का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है और माना जाता है कि उसके पास करीब 90 परमाणु हथियार हैं। एक और जहां अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप जहां ईरान पर हुई बमबारी को ऐतिहासिक जीत बता रहे हैं, वहीं उनकी ही खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट्स इस दावे पर सवाल उठा रही हैं। उधर यूएन में रूस ने इजराइल की उपस्थिति और उसकी परमाणु नीति पर कटाक्ष कर यह साफ कर दिया है कि यह मसला अब सैन्य कार्रवाई से ज्यादा कूटनीति और वैश्विक दबाव का बन चुका है।