(विचार-मंथन) तेज गति से बढ़ता टोल शुल्क महंगाई का कारण बना (लेखक - सनत जैन/ईएमएस)
Aug 17, 2023
भारत में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण बड़े पैमाने पर रोड बना रहा है। भारत माला जैसी परियोजनाओं के लिए भारी कर्ज लिया जा रहा है। रोडें अब धीमी गति से बन रही है। रोड बनने के पहले ही टोल शुरू हो जा रहा है। जिन रोड़ों पर टोल टैक्स लग रहा है। बीच-बीच में उनकी हालत बड़ी खस्ता है। मरम्मत भी नहीं हो पा रही है।
इसके बाद भी वाहन चालकों से भारी टोल वसूल किया जा रहा है। पिछले 10 सालों से टोल टैक्स लगभग हर साल बढ़ाया जा रहा है। हर साल सरकार 5 से 10 फ़ीसदी टोल टैक्स बढ़ा देती है। 75 फ़ीसदी टोल वाणिज्यिक वाहनों से प्राधिकरण को प्राप्त होता है। 25 फ़ीसदी टोल टैक्स सामान्य चार पहिया वाहनों से वसूल होता है। 2 रुपये प्रति किलोमीटर से ज्यादा टोल टैक्स की वसूली, लाइट मोटर व्हीकल से की जा रही है। वाणिज्य वाहनों में यह वसूली और भी ज्यादा है। जिसके कारण तेजी के साथ हर चीज महंगी हो रही है। बाजार में महंगाई बढ़ती चली जा रही है।
वाणिज्यिक वाहनों से टोल में हजारों रुपए टैक्स के रूप में वसूल किया जा रहे हैं। जिसके कारण महंगाई दिन दूनी और रात चौगुनी गति से बढ़ रही है। लंबी दूरी पर चलने पर ट्रकों से 20 से 30000 रुपये टोल टैक्स के रूप में चुकाने होते हैं।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण कर्ज लेकर रोड बना रहा है। कर्ज लेकर जो रोड बन रही है। वह काफी धीमी गति से बन रही है। लागत के मुकाबले आय कम होने से राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण अपना कर्ज भी नहीं चुका पा रहा है। सितंबर 2022 तक राष्ट्रीय राजमार्ग का कर्ज 3.48 लाख करोड रुपए हो गया है। जो भारत की जीडीपी का 3.4 फ़ीसदी है।
2014 से 2022 के बीच में यह कर्ज 14 गुना से ज्यादा बढ़ गया है। जिसके कारण कर्ज के मकडजाल में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण बुरी तरह फंस गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने 2019 में चिट्ठी लिखकर कर्ज कम करने की चेतावनी प्राधिकरण को दी थी। उसके बाद भी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का कर्ज कम होने के स्थान पर बढ़ता ही जा रहा है।
2014 के बाद से प्राधिकरण द्वारा अंधाधुंध कर्ज लिया जा रहा है। भूमि अधिग्रहण की लागत 30 फ़ीसदी से ज्यादा बढ़ गई है। दबाव में कई ऐसी परियोजनाओं को शुरू कर लिया गया है। जो किसी भी तरीके से लाभदायक और जरूरी नहीं है। सड़क निर्माण की रफ्तार भी तेजी के साथ घट गई है। पहले प्रतिदिन 37 किलोमीटर सड़क तैयार हो रही थी। जो अब घटकर 20 किलोमीटर पर आ गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण भारी आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। पिछले 5 वर्षों में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का कर्ज 47 फ़ीसदी बढ़ गया है।
जबकि आय में केवल 7.3 फ़ीसदी का इजाफा हुआ है। प्राधिकरण चाहता है, कि सड़कों पर टोल बढ़ाया जाए। हर साल 5 से 10 फ़ीसदी बढ़ाया भी जा रहा है। टोल अब इतना ज्यादा हो गया है, कि इससे ज्यादा यदि वसूल किया गया। तो लोगों की नाराजगी सड़कों पर खुलकर सामने आ जाएगी। टोल के कारण महंगाई बड़ी तेजी के साथ बढ़ रही है। कर्ज की समस्या से निपटने के लिए सरकार,इन सड़कों को बेचकर, निजी क्षेत्र को देने का मन बना लिया है।
सरकार हाईवे बेचने के लिए ग्राहकों की तलाश कर रही है। लेकिन ढंग के ग्राहक भी सरकार को नहीं मिल पा रहे हैं। जो पुराने निवेशक हैं। वह घाटे के कारण बाहर निकालने की तैयारी कर रहे हैं। महंगाई और ब्याज दर बढ़ने के कारण टोल कंपनियों को टोल से कमाई की उम्मीद कम हो गई है। जिसके कारण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की मुसीबतें अब दिनों दिन बढ़ने वाली हैं। कर्ज के भार से राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण कराहने लगा है।
टोल प्लाजा पर जिस तरह से शुल्क बढ़ाया जा रहा है। अब उसकी नाराजी भी देखने को मिलने लगी है। टोल का खर्च और ईंधन का खर्च लगभग लगभग बराबर होने की स्थिति पर आ गया है। जो सबसे बड़ी चिंता का कारण है।