पूरी दिल्ली के लिए एक ही सिविक एजेंसी होनी चाहिए
Aug 20, 2025
नई दिल्ली । दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि राजधानी में सड़क निर्माण, सीवेज, कचरा प्रबंधन और नालों की सफाई जैसे सभी सिविक मुद्दों की जिम्मेदारी अलग-अलग एजेंसियों के बजाय एक ही निकाय को सौंपी जानी चाहिए। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस मनमीत पीएस अरोड़ा की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव से इस मामले पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जैसे लुटियंस दिल्ली की देखरेख केवल एनडीएमसी करती है, वैसे ही पूरे शहर के लिए एकीकृत एजेंसी होनी चाहिए। अदालत ने पाया कि फिलहाल दिल्ली में कई निकाय काम कर रहे हैं और जिम्मेदारियों की सीमाएं स्पष्ट नहीं हैं, जिससे प्रबंधन में अव्यवस्था बनी रहती है। वहीं तूफानी जल निकासी एमसीडी के पास हैं।
सीवेज लाइनें दिल्ली जल बोर्ड (DJB) संभालता है और सड़क निर्माण और मरम्मत भी अलग-अलग विभागों में बंटा हुआ है। इस लिए कोर्ट ने कहा कि इस विभाजन के कारण बरसात में जलभराव, कचरा प्रबंधन में गड़बड़ी और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं बार-बार सामने आती हैं। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा पूरी दिल्ली के लिए एक ही सिविक एजेंसी होनी चाहिए। पानी, सड़क, नाले और सीवेज सबका प्रबंधन उसी के पास होना चाहिए। आप चाहें तो उसके अंदर विभाग बना सकते हैं, लेकिन एजेंसी एक होनी चाहिए अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा बताई गई इंटीग्रेटेड ड्रेन मैनेजमेंट सेल (आईडीएमसी) की स्थिति अस्पष्ट है और यह संस्था अभी तक सभी नालों का केंद्रीकृत प्रबंधन नहीं करती। अदालत ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए अगली सुनवाई 3 सितंबर को तय की है।
दरअसल, अदालत ने 28 जुलाई को ही यह निर्देश दिया था कि दिल्ली सरकार राजधानी में सिविक निकायों की जिम्मेदारियों के केंद्रीकरण पर निर्णय ले। कोर्ट ने जलभराव और बारिश के जल संचयन से जुड़े मामलों पर सुनवाई करते हुए पाया था कि विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी सबसे बड़ी समस्या है। अदालत ने कहा कि एनडीएमसी की तरह यदि पूरे शहर की देखरेख एक संस्था के पास होगी तो जनता को सुविधाएं बेहतर ढंग से मिल सकेंगी।