मास कम्युनिकेशन में हैं आपार संभावनाएं

आजकल  मास मीडिया क्षेत्र में तेजी से अवसर बढ़ रहे हैं। मास मीडिया के अध्ययन को मास कम्युनिकेशन कहते हैं। इस कोर्स में श्रोता और दर्शक तक सूचनाओं को पहुंचाने वाले हर माध्यम की स्टडी की जाती है। इन माध्यमों में समाचार पत्र, पत्रिकाएं, रेडियो, टेलीविजन, फिल्म, पब्लिक रिलेशन, विज्ञापन आदि शामिल हैं। इनका अध्ययन करने के बाद प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक किसी भी माध्यम में काम कर सकती हैं। निजी चैनल की भरमार और प्रिंट मीडिया में हो रहे विस्तार के बाद इस क्षेत्र में संभावनाएं बढी हैं। 

कौन करें- 

देश-विदेश में घटनेवाली घटनाओं में रूचि रखनेवाले विद्यार्थियों के लिए इस कोर्स करना अच्छा रहेगा।  

अच्छे कम्युनिकेशन स्किल रखनेवाले स्टूडेंट्स भी इस कोर्स को कर सकते हैं। वहीं रेडियो जॉकी की तरह काम कर सकते हैं।  

बडे शहरों में जनसंपर्क अधिकारियों की मांग बढी है। अगर किसी को लगता है कि उनकी बौद्धिक क्षमता के अलावा उनका व्यक्तित्व भी काफी आकर्षक है, तो वे इस पाठयक्रम को कर सकते हैं।  

रचनात्मक लेखन शैली में यकीन रखनेवाले विद्यार्थियों के लिए पिंट मीडिया में करियर आजमाना अच्छा साबित हो सकता है।  

कहां से करें-  

इस क्षेत्र में जाने के लिए मास कम्युनिकेशन के पीजी डिप्लोमा कोर्स या डिग्री कोर्स में दाखिला लिया जा सकता है।  

पीजी डिप्लोमा कोर्स आमतौर पर १ या २ वर्षीय होते हैं, जबकि डिग्री कोर्स ३ वर्षीय होता है। वैसे अलग-अलग शिक्षण संस्थानों में पीजी डिप्लोमा और स्त्रातक कोर्सेस की अवधि अलग-अलग भी होती है। 

कई निजी संस्थानों द्वारा ३ और ६ माह की अवधि के कोर्स भी कराए जाते हैं। इसमें रेडियो जॉकी, न्यूज रीडर , एंकर आदि के पाठयक्रम शामिल हैं। 

इंदिरा गांधी नेशनल ओपन युनिवर्सिटी से १ वर्षीय पीजी डिप्लोगा इन जर्नलिज्म का पाठयक्रम पत्राचार माध्यम से किया जा सकता है। 


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