जनता ने जिस सीएम को नकारा है उन्हें वही पसंद है: पूनावाला

Aug 26, 2026

-शहजाद का अभिजीत दीपके पर पलटवार

नई दिल्ली,। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके द्वारा कुछ मुख्यमंत्रियों को देश के सर्वश्रेष्ठ नेताओं की सूची में शामिल करने पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे शहजाद पूनावाला ने अभिजीत दीपके और उनकी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) पर तीखा हमला बोला है। पूनावाला ने कहा है कि दीपके को जिन मुख्यमंत्रियों को अच्छे लगते हैं, उन्हें जनता पहले ही नकार चुकी है। उन्होंने सीजेपी को फ्रॉड पार्टी करार देते हुए दीपके के चुने गए तीन मुख्यमंत्रियों के चयन पर गंभीर सवाल उठाए।

हाल ही में एक कार्यक्रम में अभिजीत दीपके ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम (डीएमके) के नेता एमके स्टालिन और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को देश के सबसे अच्छे मुख्यमंत्रियों में शामिल किया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शहजाद पूनावाला ने कहा, ये तीनों ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिन्हें उनकी जनता ने रिजेक्ट कर दिया है। तो सीजेपी को वो सीएम अच्छे लगते हैं, जिन्हें जनता ने रिजेक्ट कर दिया है।

उन्होंने तंज कसा कि कॉकरोच जनता पार्टी में से जनता को हटाकर सिर्फ कॉकरोच पार्टी कर देना चाहिए, क्योंकि जनता का निर्णय कुछ और रहा है। पूनावाला ने अभिजीत दीपके के दावों का खंडन करते हुए तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था पर एमके स्टालिन के कार्यकाल को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्टालिन ने तमिलनाडु की नहीं, बल्कि अपने परिवार की अर्थव्यवस्था और अपने बेटे का उदय किया।

आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि स्टालिन के पांच सालों के कार्यकाल में तमिलनाडु का कर्ज 2021 में 4.86 लाख करोड़ से बढ़कर 9.52 लाख करोड़ हो गया था। पूनावाला ने टिप्पणी की, जितना 60-70 सालों में बढ़ा, उतना पांच सालों में स्टालिन ने बढ़ाया। ये अच्छा कर रहे थे इकोनॉमी को।

केरल के पूर्व सीएम पिनराई विजयन के स्वास्थ्य मॉडल की तारीफ पर भी पूनावाला ने आपत्ति जताई। उन्होंने कोविड की दूसरी लहर का जिक्र करते हुए कहा कि केरल की आबादी साढ़े तीन करोड़ थी, और आंकड़ों के अनुसार वहां 71 हजार मौतें हुईं। इसकी तुलना में, उत्तर प्रदेश की आबादी 24 करोड़ थी और वहां कोविड से जुड़ी मौतें 23 हजार 700 हुईं थीं। पूनावाला ने इसे कुप्रबंधन बताते हुए कहा, छोटा राज्य होने के बावजूद केरल में यूपी से ज्यादा मौतें हुईं। ये था केरल हेल्थ मॉडल।



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