प्रियजनों की भावनाओं की ’’बलि’’ देनी होगी श्रीमंत को मेटर के बीच बाक्स की हैडिंग-तोमर की नियुक्ति से सिंधिया खेमे में खलबली
Jul 17, 2023
भाजपा आलाकमान द्वारा शनिवार को मध्यप्रदेश चुनाव प्रबंध समिति के संयोजक पद पर नरेंद्र सिंह तोमर की नियुक्ति किए जाने के बाद मध्यप्रदेश की राजनीति में गर्माहट आ गई है। मध्यप्रदेश के आने वाले राजनीतिक परिदृश्य में विधानसभा चुनाव से पहले और ठीक उसके बाद चुनाव के बाद जो पलटियां राजनीतिक स्तर पर ’’ऊंट’’ मारेगा उनमें प्रदेश की सरकार और संगठन तो प्रभावित होता नजर आएगा ही लेकिन उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि विधानसभा चुनाव में ग्वालियर अंचल में उनके ’’सिपहसालार’’ सबसे अधिक प्रभावित होते नजर आएंगे।
कुल मिलाकर लबोलुआब अब यह है कि श्रीमंत को अपने उन प्रिय ’’सिपहसालारों की आशाओं की राजनीतिक बलि’’ देनी ही होगी जिनके सहारे उन्होंने मार्च 2021 में देश में कांग्रेस की राजनीति में उथल-पुथल मचाते हुए राज्य की कांग्रेसी सत्ता को गिराकर भाजपा को मध्यप्रदेश में सत्तारूढ़ कर दिया। उनके इस कदम से भाजपा को निश्चित रूप से सत्ता मिली पर सिंधिया के सिपहसालारों को परोक्ष और अपरोक्ष रूप से विधायकी, मंत्री पद और विभिन्न निगमों में नियुक्ति जैसे विषयों पर भाजपा को समझौता करना पड़ा। साथ ही सिंधिया को भाजपा की ओर से राज्यसभा का टिकट तथा केंद्र में काबिना मंत्री पद भी मिला।
कांग्रेस आलाकमान की नजर में ज्योतिरादित्य सिंधिया अब वह शख्स हैं जिन्हें विधानसभा चुनाव में ’’चित्त करना और करवाना’’ उनकी पहली प्राथमिकता है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से लेकर कांग्रेस का हर वरिष्ठ और कनिष्ठ नेता उन्हें सत्ता के लालच के लिए विभिन्न पद्वियों से विभूषित कर चुका है। इसकी झांकी नवम्बर माह में होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव में भी व्यापकता से दिखाई पड़ेगी। कमलनाथ की सरकार गिरने के बाद भाजपा ने बहुत ही कठोर ह्दय के साथ अपने कार्यकर्ताओं और उन राजनेताओं की आशाओं की बलि चढ़ाई थी जो ज्योतिरादित्य सिंधिया के हमेशा कांग्रेेस में रहते विरोधी रहे। इनमें नरेंद्र सिंह तोमर के समर्थक सबसे अधिक थे।
ग्वालियर अंचल में तोमर को भाजपा की पैठ जमाने के लिए जाना जाता रहा है। सिंधिया गुट के विधायकों के इस्तीफों के बाद कमलनाथ की सरकार गिरने के बाद विधानसभा के उपचुनाव में जब विधायकी पद छोड़ने वाले सभी नेताओं को टिकट दिये गए तो ग्वालियर अंचल का अधिकांश भाजपा कार्यकर्ता तिलमिला गया था जो सिंधिया और उनके समर्थकों के सामने हमेशा तना रहता था। हालांकि भाजपा ने उन हालात को मैनेज किया लेकिन नवम्बर में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा अपने इन टिकटोत्सुक नेताओं और कार्यकर्ताओं को नजर अंदाज नहीं कर पाएगी।
आखिर नरेंद्र सिंह तोमर को मध्यप्रदेश में चुनाव प्रबंधन समिति के संयोजक पद पर क्यों भाजपा आलाकमान ने विराजित किया...? इसके क्या कारण है जबकि शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा अपनी मजबूती का दावा करती है। हालात समझने के लिए यही काफी है कि राज्य में विधायकों के टिकटों का मसला निपटाने से लेकर चुनाव प्रबंधन तक तोमर मुख्य भूमिका में दिखाई देंगे।
इसी प्रकार भाजपा अब उन निष्ठावान कार्यकर्ताओं को ग्वालियर अंचल में समायोजित करते हुए विधायकी के टिकट देगी जो भाजपा के जमीनी और निष्ठावान कार्यकर्ता हैं। इसी प्रकार चुनाव बाद राज्य की सत्ता और नेतृत्व में परिवर्तन भी भाजपा की रणनीति का एक अहम हिस्सा है। चूंकि अब ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में हैं और उनके व्यक्तिगत हित तो प्रभावित नहीं किए जाएंगे लेकिन उनके सरकार में शामिल समर्थकों को भी अब यही संदेश दिया जाएगा कि उन्हें भाजपा के प्रति निष्ठा और समर्पण को प्राथमिकता देनी होगी।