धड़ाधड़ खुल रहे हैं म. प्र. में नए सरकारी मेडिकल कॉलेज
Oct 28, 2023
14 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 850 डॉक्टरों के पद खाली
ऑनलाइन लेक्चर के सहारे मेडिकल छात्र
मध्य प्रदेश में 6 नए मेडिकल कॉलेज अगले साल शुरू हो जाएंगे। अभी 14 सरकारी मेडिकल कॉलेज मध्य प्रदेश में है। इनमें प्रोफेसर एसोसिएट प्रोफेसर और डॉक्टर के 850 से ज्यादा पद खाली है। मेडिकल कॉलेज बडी तेजी के साथ खोले जा रहे हैं। लेकिन इनमें पढ़ने के लिए लेक्चरार ओर प्रोफेसर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। मेडिकल की पढ़ाई में पर्याप्त संख्या में टीचर नहीं होने के कारण छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है।
एमबीबीएस पढ़ने वाले छात्रों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी मेडिकल कॉलेज की फीस कम होती है। जिसके कारण यहां पर कुशाग्र,गरीबों और मिडिल क्लास के बच्चे सबसे ज्यादा पढ़ते हैं। नीट परीक्षा में इनके परीक्षा परिणाम भी सबसे अच्छे होते हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेज में आने के बाद इन्हें जब पर्याप्त संख्या मे टीचिंग स्टाफ ही नहीं होगा। ऐसे मे इन छात्रों का भविष्य क्या होगा। आसानी से समझा जा सकता है।
मध्य प्रदेश में 14 मेडिकल कॉलेज के लिए प्रोफेसर,एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के 2890 पद स्वीकृत किए गए हैं। एनएमसी के अनुसार इतना टीचिंग स्टाफ होना जरूरी है। सरकार ने जुगाड़ तुगाड़ करके 2027 पद ही भरे हैं। जबकि वास्तविक रूप से इनकी संख्या और भी कम है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार एनएमसी के रिकॉर्ड को भरने के लिए कई डॉक्टरों को एक से दूसरी जगह तैनात कर दिया जाता है। कुछ समय वह यहां रहते हैं, और कुछ समय वहां रहते हैं। फिर भी सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार 863 पदों की कमी बनी हुई है। लगभग 150 चिकित्सकों ने इस बीच में नौकरी भी छोड़ दी है। जिसके कारण मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राओं की विधिवत पढ़ाई नहीं हो पा रही है। वहीं मेडिकल फैकल्टी कम होने के कारण परीक्षा की कॉपी भी नहीं जँच पा रही है। मेडिकल यूनिवर्सिटी को बार-बार इसके लिए मेडिकल कॉलेज से फैकल्टी की जानकारी मांगी जा रही है।
ऑनलाइन लेक्चर से कर रहे हैं पढ़ाई
एमबीबीएस के छात्र और छात्राएं अब ऑनलाइन विभिन्न विषयों की पढ़ाई के लिए मजबूर है। उनके पास अन्य कोई विकल्प नहीं है। लाइब्रेरी या हॉस्टल में बैठकर टेप के जरिए वह नोट्स तैयार करने के लिए विवश हैं। प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर नहीं होने के कारण वह अपनी जिज्ञासा को किसी से पूछ भी नहीं पा रहे हैं। जिसके कारण हजारों डॉक्टरों का भविष्य अंधकार मय है। जो मेडिकल कॉलेज चल रहे हैं। उनमें पर्याप्त संख्या में एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर की नियुक्ति की जाए। जो नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं। उनके लिए भी पर्याप्त संख्या में फैकल्टी उपलब्ध हो, इसका भी ध्यान रखा जाए।