पड़ोस में रहने वाले दंपति ने की थी सिपाही के बेटे की हत्या, शव बरामद
Jun 10, 2024
मेरठ । यूपी के मेरठ में एक सिपाही के बेटे पुनीत की हत्या इंचौली के धनपुर गांव में रविवार सुबह अपहरण कर हत्या कर दी गई। उसे छोड़ने के लिए 50 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी। यह हत्या पड़ोस में रहने वाले दंपति ने की थी और लाश को ठिकाने लगा दिया था। शक होने पर परिजनों ने पुलिस को बुलाया। पुलिस ने दंपति की निशानदेही पर शव को बरामद कर लिया है। जिससे इस हत्याकांड का खुलासा हो गया है।
पुलिस की पूछताछ में हत्याकांड की आरोपी सुमन ने खुलासा किया कि उसने शनिवार को पुनीत के दादा जय भगवान से 10 हजार रुपये उधार मांगे थे। उन्होंने इंकार कर दिया। उसी समय जयभगवान से कोई अन्य व्यक्ति भी पैसा मांगने आ गया। उसे उन्होंने पैसे दे दिए। यह बात सुमन को चुभ गई। खुन्नस में इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया। वहीं पुनीत के परिजनों का अरोप है कि रंजिश के कारण सुमन और उसके परिजनों ने हत्या की है। अब पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है।
सुमन पिछले 18 सालों से जयभगवान और उनके परिवार के यहां काम करती थी। 10 हजार रुपये कर्ज नहीं देने पर सुमन को इतना गुस्सा आ गया कि उसने जयभगवान के पूरे परिवार को सबक सिखाने के लिये उसने पुनीत की हत्या कर दी। फिरौती की चिट्ठी परिजनों और पुलिस को गुमराह करने के लिए लिखी गई थी। दूसरी तरफ परिजनों का आरोप है कि उनका गांव के रहने वाले रिश्तेदार से जमीन का विवाद चल रहा था। इसी रंजिश में दूसरे पक्ष ने सुमन और सुंदर को कुछ पैसे देकर इस घटना को अंजाम दिलाया है। परिजनों ने साजिश का खुलासा करने की मांग की है। वे पुलिस के 10 हजार रुपये उधार न देने के कारण हत्याकांड की थ्योरी को खारिज कर रहे हैं। पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के लिए अलग तरीके से काम किया। सुमन की हैंडराइटिंग का मिलान अपहरण और फिरौती की चिट्ठी के साथ कराया गया। दोनों लिखाई का मिलान हो रहा था। फॉरेंसिक टीम ने भी सुमन से पूछताछ की उसने माना कि खुद ही यह चिट्ठी लिखी थी। पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि सुमन और सुंदर दोनों नशा करते हैं। कई बार नशे की हालत में दोनों के बीच मारपीट हो चुकी है। वहीं
धनपुर नवासी जयभगवान यादव रिटायर्ड शिक्षक हैं। वह पूर्व प्रधान भी रह चुके हैं। उनका छोटा बेटा गोपाल यादव यूपी पुलिस में सिपाही है। वह अभी सहारनपुर में पोस्टेड है। गोपाल पत्नी सुप्रभा और दोनों बच्चों के साथ गंगानगर में रह रहा था। गर्मी की छुट्टी में 10 दिन पहले गोपाल के बच्चे धनपुर आए थे। रविवार सुबह 8 से साढ़े 8 बजे के बीच गोपाल का 6 वर्षीय बेटा पुनीत घर से से अगवा कर लिया गया। बच्चे की तलाश के दौरान कोई जानकारी नहीं मिली। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाली सुमन एक चिट्ठी लेकर जयभगवान के घर पहुंची। सुमन ने बताया कि यह चिट्ठी उसके घर के गेट पर पड़ी थी। इसमें पुनीत के अपहरण की बात लिखी थी। साथ ही 50 लाख के फिरौती की मांग की गई थी। इसके बाद जयभगवान के परिवार ने पुलिस को घटना की सूचना दी। पुलिस ने पूछताछ शुरू की।
इसी क्रम में सुमन और उसके पति सुंदर से भी पूछताछ हुई। पुलिस की पूछताछ में सुमन और सुंदर ने मान लिया कि उन्होंने ही पुनीत का अपहरण किया है और उसे मारकर खेत में फेंक दिया है। आरोपियों की निशानदेही पर लाश बरामद की गई। बच्चे के हाथ-पैर को रस्सी से बांधा गया था। उसकी गला दबाकर हत्या की गई थी। बच्चे के मुंह में गन्ना भी ठूंसा गया था। पुनीत के अपहरण के तुरंत बाद सुमन ने उसकी हत्या कर दी थी। पुलिस अफसरों ने जब पूछताछ शुरू की तो सुमन उन्हें गुमराह करती रही। वह अपने बयानों में फसंती चली गई। लगातार बदलते बयानों से पुलिस का शक उस पर गहरा गया। पुलिस ने जब कड़ाई से पूछताछ की तो उसने अपना जुर्म कुबूल कर लिया।
उसने बताया कि शनिवार को ही उसने अपहरण का प्लान बना लिया था। सुबह जब वह अपने बेटे सोनू के साथ जयभगवान के घर की तरफ गई तो पुनीत मिल गया। पुनीत को लेकर वह घर से करीब 500 मीटर दूर कर्मवीर के खेत में लेकर गई। पुनीत के हाथ-पैर बांधकर डाल दिया। बच्चा चिल्लाने लगा तो उसके मुंह में गन्ने का टुकड़ा डाल दिया। इसी बीच ट्यूबवेल पर कुछ किसान आ गए। उनको देखते ही सुमन ने पुनीत का मुंह दबा दिया। दम घुटने से पुनीत की मौत हो गई। इसके बाद सुमन ने जयभगवान के घर पहुंच कर फिरौती की चिट्ठी वाला नाटक किया था।