सुप्रीम कोर्ट ने आतंकी के शव को कब्र से निकालने की पिता की मांग ठुकराई

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि प्रत्येक व्यक्ति के धार्मिक अधिकार 'कानून व्यवस्था' के अधीन हैं। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें एक व्यक्ति ने अपने बेटे के शव को कब्र से निकालने का अनुरोध किया था, ताकि परिवार उसका अंतिम संस्कार कर सके। आतंकी बताया जाने वाला याचिकाकर्ता का बेटा पिछले साल नवंबर में कश्मीर के हैदरपुरा में मुठभेड़ में तीन अन्य आतंकियों के साथ मारा गया था। पुलिस ने चारों के शवों को दफना दिया था।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पार्डीवाला की पीठ ने कहा कि मौलिक अधिकारों का प्रयोग निरपेक्ष नहीं है, लेकिन नैतिकता, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था को कायम रखा जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमामय जीवन का अधिकार न केवल किसी जीवित व्यक्ति को बल्कि 'मृत' को भी प्राप्त है। अदालत ने केंद्र से शव को दोबारा कब्र से निकालने पर कानून बनाने पर विचार करने को कहा, क्योंकि भारत में इसको लेकर कोई अलग कानून नहीं है। जब हत्या या मौत को लेकर विवाद या संदिग्ध अवस्था में मौत हुई हो तो आपराधिक प्रक्रिया संहिता के तहत शव को पोस्टमार्टम के लिए कब्र से निकाला जा सकता है।

न्यायालय ने आगे कहा हर व्यक्ति और हर धर्म के धार्मिक अधिकार, हालांकि, कानून व्यवस्था के अधीन हैं, जिसे बनाए रखना समाज के व्यापक हित में सर्वोपरि है। इन दोनों मौलिक अधिकारों को स्पष्ट रूप से 'कानून व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन' बनाया गया है। पीठ ने यह बात मुठभेड़ में मारे गए आमिर मागरे के पिता मोहम्मद लतीफ मागरे की याचिका पर सुनवाई के दौरान कही। पीठ ने कहा कि एक बार शव को दफना दिए जाने के बाद उसे छेड़ा नहीं जाना चाहिए, जब तक कि यह नहीं लगे कि उसे सम्मान के साथ नहीं दफनाया गया है।

जम्मू-कश्मीर ने कहा है कि शव को पूरे रीति रिवाज और धार्मिक सम्मान के साथ दफनाया गया था। कहीं से भी ऐसा नहीं लग रहा कि शव को दफनाने में उचित सम्मान नहीं दिया गया। अदालत ने कहा कि वह पिता की भावना का सम्मान करती है, लेकिन अदालत मामलों का निपटारा भावना के आधार पर नहीं कर सकती। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की तरफ से न्यायसंगत राहत दी गई है और मोहम्मद लतीफ मागरे की याचिका खारिज की जाती है। पीठ ने राज्य सरकार से कहा कि वह परिवार को पांच लाख रुपये का मुआवजा और उन्हें कब्र पर प्रार्थना करने की अनुमति देने संबंधी हाईकोर्ट के फैसले का पालन करे।

Subscribe to our Newsletter