दुनिया के वैज्ञानिक चिंतित.......क्या लगातार फैलता जा रहा नरक का द्वार

ट्यूमेन। साइबेरिया में एक गड्ढा है जो लगातार बढ़ रहा है। इसका आकार किसी स्टिंग रे, हॉर्सशू क्रैब या विशालकाय टैडपोल जैसा दिख रहा है। पहले यह बेहद छोटा था, जब 1960 में इसकी पहली बार सैटेलाइट से फोटो ली गई थी। अब यह विशालकाय हो चुका है। लगातार फैलता जा रहा है। मिट्टी धंसती जा रही है। अब इस क्रेटर के अंदर पहाड़ियां और घाटियां बनती जा रही हैं। ये सारा बदलाव सैटेलाइट तस्वीरों में साफ दिख रहा है। इसका नाम है द बाटागे क्रेटर है। वैज्ञानिक हैरान इससे हैं कि यह गड्ढा लगातार बढ़ क्यों रहा है?

रिपोर्ट के मुताबिक यह गड्ढा और इसमें बना छेद 1991 की तुलना में 2018 तक ही तीन गुना बढ़ चुका है। बाटागे क्रेटर को लोग बाटागाइका भी बुलाते हैं। इसका मतलब होता है नरक का द्वार। आर्कटिक का इलाका बहुत तेजी से गर्म हो रहा है। जिसकी वजह से वहां पर्माफ्रॉस्ट पिघल रहा है। यह मिट्टी और बर्फ की मोटी परत है, जो हमेशा से जमी हुई थी। लेकिन अब नहीं। बाटागे क्रेटर असल में गड्ढा नहीं है बल्कि यह पर्माफ्रॉस्ट का एक हिस्सा है, जो तेजी से पिघल रहा है। इस रेट्रोग्रेसिव थॉ स्लंप कहते हैं।  

ऐसी जगह पर तेजी से भूस्खलन होता है। तीखी घाटियां बन जाती हैं। इसके अलावा गड्ढे बनते हैं। आर्कटिक सर्किल में इसतरह के थॉ स्लंप बहुत ज्यादा है। लेकिन बेटागे मेगास्लंप का खिताब जीत चुका है। वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के रोजर मिचेल्डिस कहते हैं कि पर्माफ्रॉस्ट फोटोजेनिक जगह नहीं होती। 

रोजर कहते हैं कि यह एक जमी हुई धूल वाली जगह है। गीली मिट्टी और बर्फ का भयानक जमावड़ा है। जो गर्मी से पिघलता है, तब बाटागे क्रेटर की तरह स्लंप बनाता है। यह गड्ढा ऐसा है कि यहां स्टडी करने से हमारी पृथ्वी का भविष्य पता चल सकता है। क्योंकि पर्माफ्रॉस्ट में मरे पौधे, जानवर होते हैं। ये सदियों से जमे हुए होते हैं। 

इसकारण पर्माफ्रॉस्ट में कार्बन डाईऑक्साइड और मीथेन जैसी गैस जमा रहती है। वायुमंडल में निकलती भी रहती है। यहां पर गर्मी सोखने वाली गैस रहती हैं। जिसकी वजह से ग्लोबल वॉर्मिंग भी बढ़ती है।


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