आरबीआई की एमपीसी छठी मौद्रिक समीक्षा में भी नीतिगत दरें बरकरार रहने की संभावना
Feb 05, 2024
- आरबीआई 8 फरवरी को मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद अपना निर्णय सुनाएगा
नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की छह सदस्यों वाली मौद्रिक नीति समिति लगातार छठी मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दरें जस की तस बनाए रख सकती है। एक सर्वेक्षण में शामिल सभी 10 प्रतिभागियों की यह राय है। आरबीआई 8 फरवरी को मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद अपना निर्णय सुनाएगा। मौद्रिक नीति समिति ने मई 2022 से फरवरी, 2023 के बीच 250 आधार अंक की बढ़ोतरी के साथ रीपो दर 6.5 फीसदी कर दी थी। उसके बाद अप्रैल, 2023 की बैठक में दर वृद्धि पर विराम लगा दिया गया था। अर्थशास्त्री कहते हैं कि पिछली मौद्रिक नीति की बैठक के बाद से वैश्विक घटनाक्रम में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, जिससे कोई वजह नहीं दिखती कि आरबीआई दरों में सख्ती करे।
फरवरी की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में सबसे अहम बात यह होगी कि बैंकिंग तंत्र में तरलता की कमी पर केंद्रीय बैंक का क्या रुख रहता है। सभी प्रतिभागियों ने एकमत से कहा कि तरलता बढ़ाने के लिए आरबीआई वेरिएबल रेट रीपो एक्शन (वीआरआर) जारी रखेगा और खुले बाजार से बॉन्ड खरीदेगा या नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) कम कर देगा। भारतीय स्टेट बैंक के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने कहा कि बैंकिंग तंत्र में नकदी की किल्लत सितंबर से ही बनी हुई है।
तरलता में अस्थायी इजाफे के लिए वीआरआर सही तरीका है क्योंकि खुले बाजार में परिचालन के जरिये नकदी स्थायी तौर पर डाली जाती है। लेकिन लगातार नकदी डाले जाने से तंत्र में तरलता बफर बनाने की जरूरत है। सभी प्रतिभागी इस बात से सहमत थे कि मौद्रिक नीति समिति रीपो दर पर यथास्थिति बनाए रखेगी लेकिन रुख के बारे में उनकी राय अलग-अलग थी। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के अर्थशास्त्री ने कहा कि अगर आरबीआई फरवरी में मौद्रिक नीति पर रुख बदलकर तटस्थ करता है तो वेटेड औसत कॉल दर को रीपो दर पर लाने के लिए तरलता बढ़ाने के बड़े उपाय करने होंगे। मौसमी तौर पर नकदी निकासी के कारण तरलता की स्थिति मार्च तक सख्त बनी रहेगी।
उनकी राय में आरबीआई फरवरी में अपने रुख में बदलाव नहीं करेगा। मगर अप्रैल में रुख तटस्थ किए जाने की उम्मीद है। कुछ प्रतिभागियों को लगता है कि वित्त वर्ष 2025 में कम उधारी से आरबीआई के पास मौद्रिक नीति को नरम बनाए रखने की गुंजाइश होगी।