सूचीबद्ध कंपनियों में प्रवर्तकों की हिस्सेदारी घटकर इस साल 37 फीसदी पर पहुंची

Jul 09, 2025

प्रवर्तकों ने ब्लॉक डील के जरिये शेयर बेचने की वजह से आई गिरावट

नई दिल्ली,। भारत के शेयर बाजार में बदलाव आ रहा है और प्रवर्तक अप्रत्याशित तेजी से कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी को कम कर रहे हैं। शीर्ष 200 निजी स्वामित्व वाली सूचीबद्ध कंपनियों में प्रवर्तकों की हिस्सेदारी करीब 600 अंक घटी है। इन कंपनियों में प्रवर्तकों की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2021 में 43 फीसदी थी जो 2025 में घटकर 37 फीसदी रह गई। प्रवर्तकों द्वारा ब्लॉक डील के जरिये शेयर बेचने की वजह से यह गिरावट आई है। इनमें से ज्यादातर शेयर घरेलू म्युचुअल फंडों ने खरीदे हैं। 

वित्त वर्ष 2021 और वित्त वर्ष 2025 के बीच बीएसई 200 कंपनियों में म्युचुअल फंडों की शेयरधारिता 360 आधार अंक बढ़कर 10.9 फीसदी हो गई जबकि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की हिस्सेदारी 420 आधार अंक घटकर 24.4 फीसदी रह गई। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के मुताबिक शेयरधारिता में बदलाव प्रवर्तकों द्वारा उच्च मूल्यांकन का लाभ उठाने और म्युचुअल फंडों द्वारा उतार-चढ़ाव से खरीदार बनने को दर्शाता है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने कहा है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों की ओर से प्रवाह बना हुआ है।

2025 की पहली छमाही के दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों ने सूचीबद्ध शेयरों में 3.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया जो पिछले साल इसी अवधि में 2.4 लाख करोड़ था। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इस दौरान 82,000 करोड़ से ज्यादा की शुद्ध बिकवाली की थी।

घरेलू संस्थागत निवेश के निरंतर प्रवाह ने बाजार में बड़ी हिस्सेदारी बिक्री को अवशोषित करने की क्षमता को बढ़ाया है। इस साल की शुरुआत में ब्रिटिश अमेरिकन टोबैको ने आईटीसी में और सिंगटेल ने भारती एयरटेल में करीब 13,000-13,000 करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं। अल्फानीति फिनटेक के सह-संस्थापक यूआर भट्ट ने कहा कि कई प्रवर्तकों ने नई परियोजनाओं के लिए या कर्ज कम करने के लिए पूंजी जुटाई है।



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