व्यक्तिगत रिश्ते ठीक हैं फिर भी भारत और अमेरिका के बीच कुछ मुद्दे बने चुनौती

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पदभार ग्रहण करते ही ऐसे फरमान जारी किए हैं जिनसे पूरी दुनिया हिल गई। हालात ऐसे हैं कि अमेरिकी विरोधी देश भड़क जाएं तो हालात बद से बदतर हो सकते हैं। इससे भारत भी अछूता नहीं है। सवाल उठने लगा कि ट्रंप के कार्यकाल में भारत और अमेरिका संबंध कैसे रहेंगे। ट्रंप ने शपथ ग्रहण के बाद पहले तीन हफ्ते में ही कई कड़े फैसले लिए हैं। पीएम मोदी की आगामी यात्रा और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बैठक के संबंध में ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन अमेरिका के कार्यकारी निदेशक ध्रुव जयशंकर ने कहा, मैं इस बैठक के परिणाम में 4 अलग-अलग चीजों की उम्मीद करूंगा। 

पहली चीज ये कि वे किस तरह के व्यक्तिगत संबंध फिर से स्थापित कर सकते हैं? भारत और अमेरिका के बीच संरचित जुड़ाव के लिए मौजूदा उच्च-स्तरीय प्रारूपों की निरंतरता कैसे बरकरार रहेगी, इस पर भी नजर रहेगी। ध्रुव जयशंकर ने कहा, क्या संबंधों में कठिनाइयों, विशेष रूप से टैरिफ और आव्रजन को दूर करने का कोई रास्ता है? इस पर भी नजरें रहेंगी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच कई जटिल मुद्दे हैं, इसलिए उन्हें जल्द ही समाधान की उम्मीद नहीं है। साथ ही जयशंकर ने यह भी कहा, अगले साल दोनों देशों के बीच अहम मुद्दों को हल करने के कुछ स्पष्ट रास्ते सामने आ सकते हैं। अंत में दोनों देशों के लिए फायदे का सौदा हो, ऐसी आम सहमति बननी चाहिए।

ऐसे ही कुछ बिंदुओं के कारण ट्रंप को यह कहने का मौका भी मिलता है कि अमेरिका में व्यापार घाटे और रोजगार सृजन में भारत की भूमिका है। हालांकि, यह भी हकीकत है कि अमेरिका भारत में मेक इन इंडिया और भारत में तकनीकी विकास कार्यक्रमों में योगदान दे रहा है।

भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी नजर 

ध्रुव जयशंकर ने कहा कि पीएम मोदी के आगामी दौरे के दौरान अमेरिका के साथ भारत के व्यापारिक रिश्ते पर भी नजर रहेगी। उन्होंने कहा, हम कुछ समझौतों की उम्मीद कर सकते हैं। जिसमें दोनों पक्ष टैरिफ के एक सेट और एक अन्य व्यवस्था पर सहमत हों, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हम अगले 4 वर्षों में एक दूसरे के साथ व्यापार विवादों में न फंसें। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर स्टील का एक बहुत बड़ा उत्पादक है, इसलिए दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में व्यापारिक रिश्ते बढ़ने की संभावना वास्तविक है।

हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि इस फैसले का बड़ा असर नहीं होगा। स्टील सचिव संदीप पौंड्रिक ने कहा, स्टील आयात पर शुल्क लगाने की अमेरिकी घोषणा का भारतीय उद्योग पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि घरेलू बाजार मजबूत है और थोड़ी मात्रा में अमेरिका को निर्यात किया जाता है। हमने पिछले साल 14 करोड़ टन स्टील का उत्पादन किया, जिसमें से 95,000 टन अमेरिका को निर्यात किया गया।अमेरिका से अवैध भारतीय प्रवासियों को वापस भेजने के बारे में ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन अमेरिका के कार्यकारी निदेशक ध्रुव जयशंकर ने कहा, भारत की न केवल अमेरिका बल्कि अन्य देशों के साथ भी एक पुरानी नीति रही है... अगर प्रवासी लोगों के भारतीय पहचान की पुष्टि हो जाती है और वे अपने वीजा की अवधि से अधिक समय तक अमेरिका में रुके हैं या उनके पास अमेरिका में रहने के वैध दस्तावेज नहीं हैं। तो ऐसी स्थिति में भारत उन्हें वापस लेने के लिए तैयार है। ध्रुव जयशंकर ने कहा कि भारत पहचान के लिए तंत्र खोजने के लिए कई देशों के साथ काम कर रहा है। 


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