डिप्टी कलेक्टर बनाने वाली परीक्षा में कापियां ही खराब
Aug 09, 2023
- - चिंता में पीएससी पहुंचे उम्मीदवार
- - राज्य सेवा परीक्षा में पहली बार दी स्टेपल की हुईं कापियां, पीएससी पर उठे सवाल
भोपाल । प्रदेश की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षा राज्य सेवा परीक्षा में उत्तर पुस्तिकाओं की गुणवत्ता ही खराब है। इस परीक्षा के जरिए डिप्टी कलेक्टर-डीएसपी जैसे शीर्ष प्रशासनिक पद मिलते हैं। उसी परीक्षा की कापियों की गुणवत्ता को लेकर पहली बार सवाल खड़े हुए हैं। जुलाई में हुई मुख्य परीक्षा में मिली उत्तर पुस्तिका की खराब स्थिति देखकर वे अभ्यर्थी अभी से चिंतित हो गए हैं, जिन्हें अक्टूबर में अगली परीक्षा देनी है। ऐसे अभ्यर्थी मप्र लोकसेवा आयोग (पीएससी) के मुख्यालय पहुंचे और मांग रखी कि उत्तर पुस्तिकाओं की गुणवत्ता सुधारी जाए।
17 जुलाई से राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2021 आयोजित हुई थी। परीक्षा देने पहुंचे अभ्यर्थी लगातार शिकायत करते रहे कि उत्तर पुस्तिकाओं का कागज खराब है। अभ्यर्थियों ने शिकायत की कि स्याही फैल रही है, साथ ही लिखावट भी पीछे के पेज पर उभरकर दिखाई दे रही है। ऐसे में उत्तर लिखना और मूल्यांकनकर्ता को स्पष्ट दिखना भी मुश्किल हो गया। और तो और, पहली बार राज्य सेवा परीक्षा में कापियों के पन्ने निकलने और बिखरने की शिकायतें सामने आईं।
दरअसल मप्र लोकसेवा आयोग (पीएससी) हर बार धागे से सिली हुई कापियां देता है। पहली बार पीएससी ने स्टेपल की हुई उत्तर पुस्तिकाएं परीक्षा में दीं। विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में भी सिली हुई उत्तर पुस्तिकाएं इसलिए दी जाती हैं ताकि पन्ने निकालकर बदले न जा सकें। ऐसे में राज्य सेवा जैसी अहम परीक्षा में स्टेपल की हुई उत्तर पुस्तिका देने के पीएससी के निर्णय पर सवाल और संदेह खड़े हो रहे हैं।
हिंदी वालों को नुकसान
पीएससी मुख्यालय पहुंचे अभ्यर्थियों ने लिखित शिकायत की कि बीती परीक्षा में जो उत्तर पुस्तिकाएं दी उसका कागज तो खराब था ही। लिखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं दी गई। दरअसल प्रश्न के नीचे ही उत्तर की जगह रिक्त रहती है। अभ्यर्थियों के अनुसार रूल यानी लाइन इतनी संकरी डाली गई कि हिंदी माध्यम वाले पूरा जवाब नहीं लिख सकते। नीचे की लाइन में लिखने पर अगले प्रश्न पर जवाब लिखना पड़ता है। इससे अंग्रेजी माध्यम वालों को ज्यादा परेशानी न हो हिंदी वाले परेशान हो रहे हैं। अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्र-तीन के प्रारूप में भी सुधार की मांग की। दरअसल अनिवार्य प्रश्नपत्र में भौतिक-रसायन और विज्ञान आधारित प्रश्न पूछे जा रहे हैं। साथ ही उनके विकल्प भी नहीं होते। ऐसे में विज्ञान विषय वालों को लाभ जबकि अन्य संकाय वाले अभ्यर्थियों को नुकसान होता है। ज्ञापन देने पहुंचे अभ्यर्थियों से पीएससी अधिकारियों ने कहा कि वे मांगों पर उचित निर्णय लेंगे।