बिहार में 4 वर्षों में आई 76 हजार करोड़ रुपए की नई निवेश परियोजनाएं

पटना । बिहार में वर्ष 2018-19 और 2022-23 के बीच 76,437 करोड़ रुपए की नई निवेश परियोजनाएं आई हैं और 38,057 करोड़ रुपए की लंबित परियोजनाओं को पुनर्जीवित किया गया है। जिससे बिहार परियोजनाओं में तेजी वाले अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।  

सूक्ष्म और लघु इकाई निर्यात संवर्धन परिषद और कन्फेडरेशन ऑफ ऑर्गेनिक फूड प्रोड्यूसर्स एंड मार्केटिंग एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है। एमएसएमई ईपीसी के अध्यक्ष डॉ डी एस रावत ने सोमवार को कहा कि राज्य ने 77 हजार 136 करोड़ रुपये की परियोजनाएं पूरी कर ली हैं और 2022-23 में 317 हजार 677 करोड़ रुपए की परियोजनाओं का कार्यान्वयन किया जा रहा है। नए निवेश से राज्य में सूक्ष्म, लघु और मध्यम क्षेत्र को मजबूती मिलने का दावा किया गया है जो रोजगार सृजन के मामले में कृषि के बाद दूसरे स्थान पर है। अनुमान लगाया गया है कि बिहार में करीब 40 लाख एमएसमई हैं जो देश में छठे स्थान पर है। 

डॉ रावत ने कहा कि एमएसएमई कुल उद्योगों का लगभग 95 हिस्सा है और यह 4 हजार 700 से अधिक मूल्य वर्धित उत्पादों का उत्पादन करता है। देखा गया है कि निजी क्षेत्र में रोजगार के प्रचुर अवसर और उपभोक्तावाद में उच्च वृद्धि के कारण एमएसएमई ने बुनियादी ढांचे में तेजी से निवेश आकर्षित किया है। यह क्षेत्र औद्योगिक इकाइयों के एक बड़े हिस्से को ध्यान में रखते हुए निर्माताओं, आपूर्तिकर्ताओं, वितरकों, खुदरा विक्रेताओं, ठेकेदारों और सेवा प्रदाता के रूप में घरेलू और अंतररष्ट्रीय मूल्य श्रृंखला को पोषण प्रदान करता है। सीएमआईई के आंकड़ों के अनुसार राज्य ने 2022-23 के दौरान 22667 करोड़ रुपए की परियोजनाएं पूरी कीं। वित्त वर्ष 2021-22 में 15492 करोड़ रुपये और 2020-21 में 25 हजार 395 करोड़ रुपए की परियोजनाएं पूरी कीं। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन, स्टार्टअप और कृषि-उद्यमिता को बढ़ावा देने में मदद मिली है।       





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