मुरलीकांत ने जीता था पैरालंपिक में भारत की ओर से पहला स्वर्ण

मुम्बई । पेरिस में अब 28 अगस्त से आठ सितंबर तक पैरालंपिक खेलों की धूम रहेगी। इन खेलों में दुनिया भर के पैरा खिलाड़ी भाग लेंगे। पेरालंपिक खेलों में इस बार भारत का सबसे बड़ दल भाग ले रहा है और ऐसे में खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। भारत को इन खेलों में पहली बार स्वर्ण पदक भारतीय सेना के जवान रहे मुरलीकांत पेटकर ने दिलाया था। 

मुरलीकांत ने साल 1972 के हीडलबर्ग पैरालंपिक खेलों में 50 मीटर फ्रीस्टाइल इवेंट में ये स्वर्ण पदक जीता था। तब उन्होंने जीत दर्ज करने के लिए 37.33 सेकेंड का समय निकाला, जो उस समय का विश्व रिकॉर्ड था। इस प्रकार मुरलीकांत भारत के पहले पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता हैं। उन्हीं खेलों में उन्होंने भाला फेंक, सटीक भाला फेंक और स्लैलम में भाग लिया था। वह तीनों स्पर्धाओं में फाइनल तक पहुंचे थे। मुरली ने एक मुक्केबाज के रूप में सबसे पहले खेलों में भाग लिया था। साल 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध के दौरान उन्हें नौ गोलियां लगीं, और वह विकलांग हो गए थे। मुरलीकांत का कमर से नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया। वह कुछ समय बाद ठीक तो हो गए, लेकिन उन्हें अपना एक हाथ खोना पड़ा।

अब वह मुक्केबाजी नहीं कर सकते थे। इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानने हुए तैराकी और अन्य खेलों में भाग लेना शुरू कर दिया. उन्होंने 1968 के पैरालंपिक खेलों में टेबल टेनिस में भाग लिया और पहला राउंड क्लीयर किया. उन्होंने तैराकी में कुल चार पदक जीते हैं। 


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