मुंबई -मुंबई में 14 स्कूलों को बंद करने के नोटिस पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- बच्चों की पढ़ाई बीच में नहीं रुकनी चाहिए
Oct 30, 2026
- मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर को
मुंबई, । मुंबई के पश्चिमी उपनगर मालाड और मालवणी इलाके की 14 प्राथमिक स्कूलों को अवैध घोषित कर बंद करने की नोटिस जारी करने के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। दरअसल मुंबई महानगरपालिका की कार्रवाई के खिलाफ कुछ स्कूलों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
इस पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को अदालत ने स्पष्ट संकेत दिए कि मौजूदा शैक्षणिक सत्र के बीच विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य को लेकर वह गंभीर है और इस संबंध में उचित आदेश जारी किए जाएंगे।
- क्या है पूरा मामला?
मुंबई महानगरपालिका ने शहर की 164 स्कूलों पर बिना अनुमति और आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के अभाव में संचालित होने का आरोप लगाते हुए उन्हें बंद करने के नोटिस जारी किए हैं। इनमें मालवणी इलाके की कुछ स्कूलें भी शामिल हैं। इन स्कूलों में अधिकांश विद्यार्थी गरीब परिवारों से आते हैं।
याचिका में कहा गया है कि मालवणी इलाके में महानगरपालिका की स्कूलों में इन विद्यार्थियों को समायोजित करना संभव नहीं है। ऐसे में यदि स्कूल बंद कर दी जाती हैं, तो इन बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी और उनका शैक्षणिक भविष्य संकट में पड़ सकता है।
- जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई
महानगरपालिका के नोटिस को चुनौती देते हुए नाजिर खान ने जनहित याचिका दायर की है। गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान महानगरपालिका की ओर से अधिवक्ता पूर्णिमा कंथारिया ने आरोप लगाया कि स्कूलों को बार-बार नोटिस देकर नए विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं देने का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद स्कूलों में नए विद्यार्थियों को प्रवेश देकर पढ़ाई जारी रखी जा रही है। इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस पूरे मामले में महानगरपालिका के सक्षम प्राधिकरण की भूमिका की भी जांच करनी होगी।
- बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए : हाईकोर्ट
अदालत ने कहा कि मौजूदा शैक्षणिक वर्ष के बीच विद्यार्थियों की पढ़ाई किसी भी स्थिति में बाधित या अस्थिर नहीं होनी चाहिए। यदि ऐसा होता है, तो इसका बच्चों पर गंभीर असर पड़ेगा और उन्हें ऐसा नुकसान हो सकता है, जिसकी भरपाई संभव नहीं होगी। अदालत ने कहा कि उसे इन निर्दोष विद्यार्थियों के भविष्य की सबसे अधिक चिंता है।
- महानगरपालिका से मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने महानगरपालिका से स्कूलों के संबंध में विस्तृत जानकारी हलफनामे के माध्यम से पेश करने का आदेश दिया है। अदालत ने पूछा है कि-
संबंधित स्कूलें अनुदानित हैं या गैर-अनुदानित?
ये स्कूलें किस शिक्षा बोर्ड से संबद्ध हैं?
स्कूलों में शिक्षकों और विद्यार्थियों की कुल संख्या कितनी है?
ये स्कूलें कब से संचालित हो रही हैं?
इन स्कूलों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है?
अदालत ने महानगरपालिका को इन सभी सवालों का विस्तृत जवाब हलफनामे के रूप में दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर को होगी।