मुइज्‍जू ने भारत के विरोध को किया दरकिनार,चीनी जासूसी जहाज को दे दिया ठिकाना

बीजिंग। भारत के खिलाफ जहर उगल रही मालदीव की मोहम्‍मद मुइज्‍जू सरकार ने चीनी जासूसी जहाज को माले बंदरगाह पर रुकने की अनुमति दी है। बताया जा रहा है कि चीनी जहाज ने भारत, श्रीलंका और मालदीव के विशेष आर्थिक क्षेत्र में काफी लंबे समय तक सर्वे के नाम पर जासूसी की है। अब यह माले की ओर बढ़ रहा है। भारत और अमेरिका ने चीन के जासूसी जहाज को अनुमति देने का विरोध किया है लेकिन मुइज्‍जू सरकार ने इसे दरकिनार कर दिया है।

चीनी विशेषज्ञ भारत के इन चिंताओं को खारिज करते हुए कहते हैं कि हिंद महासागर में जहाज की गतिविधियां वैध वैज्ञानिक अनुसंधान हैं। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के पूर्व वरिष्ठ कर्नल झोउ बो का कहना है कि तीसरे देश के बंदरगाह में फिर से आपूर्ति के लिए रुकने की जहाज की आवश्यकता सामान्य बात है और भारत सरकार को इस पर प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए। यह पहली बार नहीं है जब चीन ने हिंद महासागर में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए भारत के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए जासूसी जहाजों को भारतीय जल क्षेत्र के करीब भेजा है। चीन का यह जहाज 28 जनवरी को भारत और श्रीलंका के पास हिंद महासागर में पहुंचा था।

इसके बाद से वह लगातार हिंद महासागर के सतह की जांच कर रहा है। अब सर्वे को पूरा करने के बाद वह मालदीव की राजधानी माले की ओर बढ़ रहा है। मालदीव में इस चीनी शोध जहाज के आने से चीन, भारत और मालदीव के बीच तनाव बढ़ गया है। जहाज श‍ियांग यांग होंग 03 आधिकारिक तौर पर चीनी कर्मियों के बदलाव और सामानों की आपूर्ति के लिए माले के बंदरगाह पर जा रहा है। वहीं भारत इसे अपने लिए खतरे के तौर पर देखता है। भारत को डर है कि यह जासूसी जहाज भविष्य में पनडुब्बी संचालन के लिए डेटा एकत्र कर सकता है।


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