कर्ज के बोझ से दबती चली जा रही है, मध्य प्रदेश सरकार
Jun 20, 2025
- हर साल बढ़ता जा रहा है, कर्ज और ब्याज
- आमदनी से ज्यादा खर्च
भोपाल । पिछले कई वर्षों से मध्य प्रदेश की सरकार लगातार विकास योजनाओं के लिए कर्ज लेती चली जा रही है। पिछले वर्षों में राज्य सरकार का कर्ज़ राज्य के कुल बजट से ज्यादा हो गया है।
मध्य प्रदेश सरकार पर इस समय 4,21,740 करोड रुपए का कर्ज है। राज्य सरकार का बजट 4,21,032 करोड रुपए का है। राज्य सरकार को समस्त रूप में 3,75,340 करोड रुपए का राजस्व की प्राप्ति होगी।
राज्य सरकार के खजाने पर कर्ज और ब्याज का बोझ साल दर साल बढ़ रहा है। सरकार के ऊपर पेंशन का बोझ भी बढ़ता चला जा रहा है। कर्ज की चिंता किए बिना सरकार लोक लुभावन योजनाओं की घोषणा करती चली जा रही है। कर्मचारियों के वेतन भत्ते और पेंशन के रूप में सरकारी खजाने का खर्च बढ़ता चला जा रहा है। कर्ज की अदाएगी, ब्याज का भुगतान तथा पेंशन का सबसे बड़ा बोझ सरकारी खजाने पर है। इसमें लगभग 21 फ़ीसदी राजस्व, इन्हीं 3 मद में खर्च हो जाता है। सरकार को बार -बार सप्लीमेंट्री बजट लाना पड़ता है। सरकार को हर साल बड़ी मात्रा में कर्ज लेना पड़ता है।
मध्य प्रदेश सरकार के ऊपर लगातार कर्ज बढ़ता चला जा रहा है। 2016-17 में सरकार के ऊपर 8793 करोड रुपए पेंशन के रूप में खर्च होता था। जो 2025-26 में बढ़कर 28961 करोड रुपए हो जाएगा। 10 साल में पेंशन का खर्च 20168 करोड रुपए बढ़ गया है।
मध्य प्रदेश सरकार का कर्ज 4,021,740 करोड रुपए का हो गया है। कुल बजट से 700 करोड रुपए ज्यादा सरकार के ऊपर कर्ज है। सरकार कर्ज और ब्याज की अदायगी का खर्च लगातार बढ़ता चला जा रहा है। मध्य प्रदेश सरकार ने जो भी कर्ज पिछले सालों में लिया है। वह 16 से 18 सालों के बीच चुकाया जाना है। जिस तरीके से सरकार के खर्च बढ़ रहे हैं। पिछले एक दशक में विभिन्न टैक्स और अन्य माध्यमों से जनता के ऊपर भारी करारोपण किया गया है। उसके बाद भी सरकार के खजाने की वित्तीय हालत खराब है। आम जनता के ऊपर टैक्सों का बोझ बहुत बढ़ गया है। जनता विरोध मे मुखर हो रही है।