ईरान अब आईएईए निरीक्षकों को परमाणु ठिकानों पर जाने की नहीं देगा इजाजत
Jun 26, 2025
इजराइल-अमेरिकी के परमाणु केंद्रों पर हमले के बाद ईरानी संसद ने लिया फैसला
तेहरान। परमाणु केंद्रों पर हमले के बाद ईरान ने बड़ा फैसला लिया है। उसकी संसद ने एक विधेयक पारित कर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ सहयोग को निलंबित करने का फैसला किया है। यह कदम परमाणु ठिकानों पर हुए हमलों के जवाब में उठाया गया है। इस विधेयक के तहत आईएईए के निरीक्षकों को ईरान के परमाणु ठिकानों पर जाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। जब तक परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती। यह फैसला क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता पर नए सवाल खड़े कर रहा है।
यह विधेयक ईरान की संसद में 222 मतों के पक्ष में पारित हुआ, जिसमें कोई विरोध नहीं हुआ और केवल एक सांसद ने मतदान नहीं किया। संसद के प्रवक्ता ने कहा कि आईएईए निरीक्षकों पर प्रतिबंध के साथ-साथ निगरानी कैमरों की स्थापना और नियमित रिपोर्ट जमा करने की प्रक्रिया भी निलंबित की जाएगी। यह विधेयक अब ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की मंजूरी के लिए भेजा गया है।
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालिबाफ ने कहा कि आईएईए ने अपनी जिम्मेदारियों को पूरा नहीं किया और यह एक राजनीतिक हथियार बन गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और देश परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में नहीं बढ़ रहा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक आईएईए ने जून 2025 में ईरान को परमाणु अप्रसार संधि के उल्लंघन का दोषी ठहराया था, क्योंकि ईरान ने अपनी परमाणु गतिविधियों की पूरी जानकारी नहीं दी थी। इसके जवाब में ईरान ने नए यूरेनियम संवर्धन केंद्र की स्थापना और फोर्डो में उन्नत आईआर-6 सेंट्रीफ्यूज लगाने की घोषणा की थी।
बता दें हाल ही में इजराइल और अमेरिका ने ईरान के नतांज, फोर्डो और इस्फहान परमाणु ठिकानों पर हमले किए। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने दावा किया कि इन हमलों ने ईरान की परमाणु हथियार बनाने की क्षमता को नष्ट कर दिया गया है, लेकिन ईरानी अधिकारियों ने इसे खारिज करते हुए कहा कि उनकी यूरेनियम संवर्धन सुविधाएं बरकरार हैं। आईएईए के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने बताया कि करीब 408 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम का स्थान अज्ञात है, क्योंकि ईरान ने इसे सुरक्षा उपायों के तहत पहले ही हटा दिया था।
एक्स पर कुछ पोस्ट में दावा किया गया है कि ईरान अब परमाणु हथियार बनाने की दिशा में तेजी से बढ़ सकता है, लेकिन इसकी अभी पुष्ट नहीं हुइै है। रिपोर्ट के मुताबिक यह कदम ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है, खासकर जब आईएईए के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने हाल ही में ईरान के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया था।