2022 के बाद 18 महीनों में शहरों के मुकाबले गांवों में ज्यादा रही महंगाई

Nov 20, 2023

- मार्च से जून 2023 के बीच ग्रामीणों को थोड़ी राहत थी

 केंद्र सरकार ने मुफ्त खाद्यान्न योजना का समय बढ़ाने की घोषणा की है और ग्रामीण इलाकों में मांग कमजोर बनी हुई है, वहीं जनवरी 2022 के बाद 22 महीनों में से 18 महीनों में ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई दर शहरों की तुलना में ज्यादा रही है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएलओ) की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित ग्रामीण खुदरा महंगाई दर शहरी महंगाई की तुलना में अक्टूबर में लगातार चौथे महीने अधिक रही है। करीब 2 साल के दौरान मार्च से जून 2023 के बीच ग्रामीणों को थोड़ी राहत थी, जब शहरी महंगाई की तुलना में गांवों में महंगाई कम थी।

अक्टूबर 2023 में ग्रामीण महंगाई 5.12 प्रतिशत थी, जबकि शहरी महंगाई दर 4.62 प्रतिशत थी। आंकड़ों से पता चलता है कि ग्रामीण ज्यादा महंगाई दर की मुख्य वजह खाद्य वस्तुओं खासकर मोटे अनाज की कीमत अधिक होना है। हालांकि इस साल की शुरुआत में जिस उच्च स्तर पर महंगाई थी, उसकी तुलना में थोड़ी राहत है, लेकिन मोटे अनाज की कीमतें ग्रामीण इलाकों में 11.5 प्रतिशत अधिक रही हैं, जबकि शहरी इलाकों में 9.8 प्रतिशत अधिक थीं। आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि खाद्य की कीमत में तेज बढ़ोतरी को पिछले साल लू चलने और धान और गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि से बल मिला है और इसके बाद इस साल सब्जियों की कीमत बढ़ गई। उन्होंने कहा ‎कि पहले अग्रिम अनुमान से ज्यादातर खरीफ फसलों के उत्पादन की धूमिल तस्वीर सामने आ रही है, साथ ही रबी की बोआई भी सुस्त है। जलाशयों का स्तर भी निचले स्तर पर है। ऐसे में उम्मीद है कि कीमतें आगे और बढ़ेंगी और ग्रामीण महंगाई बढ़ेगी।


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