पेरिस ओलंपिक में भारत का अभियान फीका रहा

पेरिस । पेरिस ओलंपिक में भारत का प्रदर्शन उम्मीद के अनुरुप नहीं रहा और उसे 6 पदक ही मिल पाये जबकि पिछले ओलंपिक में भारत ने 7 पदक जीते थे। इस बार उम्मीद थी कि पदक तालिका दो अंकों तक पहुंचेगी पर ऐसा नहीं हुआ। ओलंपिक में भारतीय दल 71वें स्थान पर रहा। इस बार भारत को एक भी स्वर्ण नहीं मिला, ऐसे में स्वदेश लौटते समय दल में उत्साह की कमी देखी गयी। 

केन्द्र सरकार ने ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए खेलो इंडिया की जो योजना शुरु की थी। उसका भी कोई लाभ नहीं दिखा। पिछली बार भाला फेंक में नीरज चोपड़ा ने स्वर्ण जीता था जबकि वह इस बार रजत ही जीत पाये। 

महिला पहलवान विनेश फोगाट के केवल 100 ग्राम अधिक वजन होने के कारण अयोग्य होने का दर्द भी भारतीय दल को हमेशा रहेगा। इसके अलावा ये भी समझना होगा कि केवल बेहतर सुविधाओं को देकर पदक जीते जा सकते हैं। एक रिपोर्ट के केंद्र सरकार ने पिछले तीन सालों में ओलंपिक के लिए 470 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। यह पहले के आंकड़ों से काफी ज्यादा है पर उसका भी लाभ नजर नहीं आया है। अगर देखें तो सबसे ज्यादा खर्च एथलेटिक्स 96.08 करोड़ रुपए हुआ, उसके बाद बैडमिंटन पर 72.02 करोड़ रुपए, मुक्केबाजी पर 60.93 करोड़ रुपए और निशानेबाजी पर 60.42 करोड़ रुपए खर्च हुआ। पेरिस में भारत ने जिन 16 खेलों में हिस्सा लिया, उन सभी को काफी पैसा मिल पर खिलाड़ियों का प्रदर्शन फिर भी अच्छा नहीं रहा। 

भारत ने पेरिस ओलंपिक में 117 खिलाड़ियों को भेजा था जिनमें 47 महिला खिलाड़ी शामिल थी। समापन समारोह में पीआर श्रीजेश और मनु भाकर ध्वजवाहक के रूप में शामिल हुए। भारत ने पेरिस ओलंपिक खेलों में अपने अभियान का समापन छह पदकों के साथ किया। मनु ने महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल में और सरबजोत सिंह के साथ 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीते। 

वहीं डोमिनिका ओलंपिक में पदक जीतने वाला सबसे छोटा देश रहा। वहीं चीन के सबसे अधिक आबादी वाला देश  रहा। उसने बिलियन लोगों ने 91 पदक जीते। जिनमें से 40 स्वर्ण पदक थे, जबकि भारत ऐसा देश था जिसकी जनसंख्या 1 बिलियन से अधिक थी, लेकिन 6 मेडल ही झोली में आए।


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