आतंकवाद के खिलाफ जंग में दोहरे मापदंडों को कतई स्वीकार नहीं करेंगे भारत और ब्रिटेन
Jul 25, 2025
लंदन,। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत की आतंकवाद के खिलाफ बनी हुई ‘शून्य सहिष्णुता (जीरो टॉलरेंस) की नीति से अब तक पूरी दुनिया भली-भांति वाकिफ हो चुकी है। पाकिस्तान के समर्थन से किए गए इस हमले में आतंकियों ने कुल 26 निर्दोष लोगों की निर्ममता से हत्या कर दी था। मामला बेहद संवेदनशील है, इसलिए इसकी गूंज गुरुवार को लंदन में हुई भारत और ब्रिटेन के प्रधानमंत्रियों की द्विपक्षीय बैठक में भी जोरदार अंदाज में सुनाई दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक के बाद दिए संयुक्त प्रेस वक्तव्य में भी इसका उल्लेख किया। उन्होंने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और उनकी सरकार का पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करने के लिए आभार जताया। साथ की कहा कि दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मापदंडों को कोई स्थान न देने और चरमपंथी विचारधारा वाली शक्तियों को लोकतांत्रिक स्वतंत्रता का दुरुपयोग न करने देने को लेकर भी एकमत हैं। जो लोग लोकतंत्र द्वारा प्रदान की गई शक्तियों का गलत इस्तेमाल करते हैं। उन्हें न्याय के कटघरे में खड़ा किया जाना चाहिए यानी उनकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। जानकारों की राय में भारत-ब्रिटेन के राष्ट्राध्यक्षों की यह टिप्पणी खासतौर पर चीन और पाकिस्तान के लिए जरूरी संदेश था। जिसमें शीर्ष नेताओं ने दोनों देशों का नाम लिए बगैर स्पष्ट रूप से अपनी मत रखा। यह जानकारी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर दी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अगले दस वर्षों में हमारी व्यापक सामरिक भागीदारी को और अधिक गति और ऊर्जा प्रदान करने के लिए विजन 2035 जारी किया जा रहा है। जिसके बाद तकनीक, रक्षा, जलवायु, शिक्षा और लोगों के बीच आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में एक मजबूत, भरोसेमंद और महत्वाकांक्षी साझेदारी का रोडमैप बनेगा। रक्षा और सुरक्षा में साझेदारी के लिए रक्षा औद्योगिक रोडमैप बनाया गया है। दोनों देशों के तकनीक सुरक्षा कदम को और मजबूत करने पर काम किया जाएगा। कृत्रिम मेधा से जटिल खनिजों तक सेमीकंडक्टर से साइबर सुरक्षा तक प्रतिबद्धता के साथ दोनों देश नए भविष्य का निर्माण करेंगे। पीएम के मुताबिक, शिक्षा के क्षेत्र में दोनों देश मिलकर एक नया अध्याय लिख रहे हैं। ब्रिटेन के 6 विश्वविद्यालय भारत में कैंपस खोल रहे हैं। बीते सप्ताह ही गुरुग्राम में साउथ हैम्पटन विश्वविद्यालय के कैंपस का उद्घाटन हुआ है। ब्रिटेन में रहने वाले प्रवासी भारतीय हमारे संबंधों में एक जीवंत पुल का काम करते हैं। ये भारत से केवल करी ही नहीं लेकर आते हैं। बल्कि अपने साथ रचनात्मकता, प्रतिबद्धता और चरित्र भी लाते हैं।
प्रधानमंत्री ने व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर को लेकर प्रसन्नता जताई और कहा कि इसी के साथ ही दोहरी कराधान संधि (डीसीसी) पर भी सहमति बनी है। जिससे दोनों देशों के सेवा क्षेत्र खासकर तकनीक और वित्त को नई ऊर्जा मिलेगा। व्यापार करने में आसानी होगी, बिजनेस की लागत घटेगी और व्यापार करने में आत्मविश्वास बढ़ेगा। डीसीसी से ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को भारत की कौशलयुक्त प्रतिभा मिलेगी। उन्होंने सीईटीए को महज एक आर्थिक साझेदारी नहीं बल्कि साझा समृद्धि की योजना बताते हुए कहा कि इससे एक ओर भारतीय कपड़ा, फुटवियर, रत्न और आभूषण, समुद्री उत्पाद और इंजीनियरिंग से जुड़े उत्पादों की ब्रिटेन के बाजार में पहुंच बढ़ेगी। वहीं, भारत के कृषि उत्पादों, प्रसंस्कृत उद्योग के लिए ब्रिटेन के बाजारों में नए अवसर बनेंगे। देश के युवाओं, किसानों, मछुआरों और एमएसएमई क्षेत्र के लिए ये समझौता विशेष रूप से लाभकारी साबित होगा। दोनों समझौतों से निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए मौके उत्पन्न होंगे।