डेयरी सेक्टर खुला तो 8 करोड़ किसानों को हो सकता है 1 लाख करोड़ का घाटा: एसबीआई रिसर्च
Jul 15, 2025
- भारत ने अमेरिकी मांग के अनुसार डेयरी और कृषि उत्पादों पर शुल्क में छूट देने से किया इनकार
नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता अंतिम दौर में है, लेकिन कुछ प्रमुख मुद्दों पर अब भी सहमति नहीं बन सकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, समझौते का मसौदा लगभग तैयार है, लेकिन कृषि और डेयरी उत्पादों को लेकर मतभेद बने हुए हैं। भारत ने अमेरिकी मांग के अनुसार डेयरी और कृषि उत्पादों पर शुल्क में छूट देने से इनकार कर दिया है। भारत ने आज तक किसी भी व्यापारिक साझेदार को डेयरी क्षेत्र में रियायत नहीं दी है। इसी पृष्ठभूमि में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की एक रिसर्च रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें अमेरिका को डेयरी सेक्टर में प्रवेश देने से भारत को होने वाले संभावित लाभ और हानियों का विश्लेषण किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार अगर भारत कृषि और डेयरी सेक्टर को अमेरिका के लिए खोलता है, तो इससे कुछ क्षेत्रों में लाभ की संभावना है। अमेरिका में उच्च मूल्य वाले उत्पादों जैसे ऑर्गेनिक फूड, मसाले, आम, लीची, केले और भिंडी की भारी मांग है। फिलहाल भारत इन उत्पादों का सालाना निर्यात 1 अरब डॉलर से भी कम करता है, लेकिन यह बढ़कर 3 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
इसके अलावा यदि अमेरिका भारत के आयुष और जेनेरिक दवाओं पर लगे गैर-शुल्क प्रतिबंध हटाता है, तो इन क्षेत्रों में 1–2 अरब डॉलर का अतिरिक्त निर्यात संभव है। वीजा नियमों में ढील और आउटसोर्सिंग पर सहयोग से भारतीय आईटी और सेवा क्षेत्र को भी बड़ा लाभ मिल सकता है। वहीं, अमेरिका से कोल्ड स्टोरेज, लॉजिस्टिक्स और प्रिसिशन फार्मिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश आने की उम्मीद है। हालांकि, यह समझौता भारतीय डेयरी किसानों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। अमेरिका में डेयरी सेक्टर को भारी सब्सिडी मिलती है, जिससे वहां के उत्पाद काफी सस्ते होते हैं। यदि भारत इस सेक्टर को खोलेगा, तो सस्ते अमेरिकी उत्पाद भारतीय बाजार में आ सकते हैं, जिससे घरेलू दूध की कीमतों में 15 से 25 फीसदी तक की गिरावट संभव है।
एसबीआई की रिपोर्ट बताती है कि यदि दूध की कीमतों में 15 फीसदी की गिरावट आती है, तो कुल डेयरी राजस्व में 1.8 लाख करोड़ की कमी आ सकती है। किसानों की इसमें 60 फीसदी हिस्सेदारी मानें, तो किसानों को सालाना ₹.03 लाख करोड़ तक का नुकसान हो सकता है। छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका पर इसका सीधा असर पड़ेगा। साथ ही, अमेरिका के डेयरी उत्पादों में ग्रोथ हार्मोन और जेनेटिकली तत्वों का इस्तेमाल आम है, जो भारत में प्रतिबंधित हैं। इनके कारण स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा मानकों पर भी खतरा उत्पन्न हो सकता है। सरकार के सामने अब चुनौती है कि वह व्यापारिक लाभ और देश के कृषि हितों के बीच संतुलन बनाए। यह समझौता भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभावों की अनदेखी नहीं की जा सकती।