आतंक और क्रूरता पर भारी पड़ रही इंसा‎नियत

मां नहीं रही ‎फिर भी हजारों ‎किमी दूर से मासूम तक पहुंच रहा मां का दूध

नई ‎दिल्ली । इजराइल और हमास के बीच चल रहे भीषण युद्ध में ‎सिर्फ लाशें ‎गिराई जा रहीं है। ‎आतंक, क्रूरता और हत्या करने की होड़ लगी हुई है। इस जंग में कई ऐसे बच्चे हैं ‎‎जिन्होंने अपनी मां गंवा दी है। तो ‎किसी की मां ‎बिछड़ गई है। अब इन दुधमुंह बच्चों के सामने मां के दूध का संकट खड़ा हो गया है। हमास के आतंकियों ने अपने हमले में ऐसे बच्चों की मांओं को या तो मार डाला या फिर अपने साथ उठाकर ले गए। ऐसे में बच्चे बिना दूध के तड़प रहे हैं। इन बच्चों की मदद के लिए अमेरिकी मम्मियां सामने आ रही हैं। वो कुछ ऐसा कर रही हैं, जो वाकई किसी का भी दिल पिघला दे।

रिपोर्ट के मुताबिक इज़रायल में बहुत से छोटे बच्चे ऐसे हैं, जो सिर्फ और सिर्फ मां के दूध पर ही निर्भर हैं। हमास के आतंकियों ने अपने हमले में ऐसे बच्चों की मांओं को या तो मार डाला या फिर अपने साथ उठाकर ले गए। ऐसे में बच्चे बिना दूध के तड़प रहे हैं। इन बच्चों की मदद के लिए अमेरिकी मम्मियां सामने आ रही हैं। वो कुछ ऐसा कर रही हैं, जो वाकई किसी का भी दिल पिघला दे।

इज़राइल और हमास के युद्ध में मरने वालों की तादाद बढ़ती जा रही है और अनाथ हो रहे बच्चों की भी। किसी की मां नहीं रही तो किसी के पिता और कोई तो बिल्कुल लावारिस हो चुका है। ऐसे में जो दुधमुंहे बच्चे हैं, उनकी मदद के लिए अमेरिका से मम्मियां अपना दूध निकालकर भेज रही हैं। रोज़ाना न्यूयॉर्क से 3000 आउंस फ्रोज़ेन ब्रेस्ट मिल्क तेल अवीव पहुंच रहा है। 32 साल की एक अमेरिकी मां ने कहा कि उनका बच्चा दूध पीना बंद कर चुका है और वे अपना दूध इज़रायल भेज रही हैं ताकि भूखे नवजातों का पेट भर सके।

कोई इंस्टाग्राम के ज़रिये को कोई दूसरे सोर्स से इस बारे में जैसे ही जान रहा है, वो बच्चों की मदद के लिए आगे आ रहा है। इसके लिए कंपनियां भी मध्यस्थता कर रही हैं और वो फ्रोज़ेन मिल्क को तेल अवीव तक पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास में लगी हैं। ऐसी एक कंपनी ‎‎मिल्कीफाई की सह संस्थापक पेड्रो सिल्वा ने बताया कि महिलाओं पैसे लेकर डोनेशन मटीरियल्स प्रोवाइड कराए जा रहे हैं। इस तरह के प्रयास से लोगों को मदद मिल रही है क्योंकि सरकारी तौर पर ब्रेस्ट मिल्क डिस्ट्रीब्यूशन के लिए काफी हेल्थ स्क्रीनिंग करानी पड़ती है।



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