वन्यजीव संरक्षण के लिए केंद्र से 6.4 करोड़ रुपये, मिला अनुदान
Aug 03, 2026
- पिछले वर्ष से बढ़ी राशि, लेकिन 2022-23 की तुलना में अब भी कम
- आवास संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष पर विशेषज्ञों ने जताई चिंता
तिरुवनंतपुरम । केंद्र सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए संयुक्त प्रोजेक्ट टाइगर-प्रोजेक्ट एलीफेंट योजना के तहत राज्य को 6.40 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है। यह राशि पिछले वित्त वर्ष के 2.21 करोड़ रुपये की तुलना में अधिक है, हालांकि 2022-23 में दोनों योजनाओं के अलग-अलग संचालन के दौरान मिले कुल 6.88 करोड़ रुपये से अब भी कम है।
लोकसभा में पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने मानव-वन्यजीव संघर्ष से जुड़े एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकारें संरक्षित क्षेत्रों और टाइगर रिजर्व के प्रबंधन की वार्षिक कार्ययोजना के आधार पर केंद्र से वित्तीय सहायता प्राप्त करती हैं।
वर्ष 2022-23 में प्रोजेक्ट टाइगर के लिए 4.18 करोड़ रुपये और प्रोजेक्ट एलीफेंट के लिए 2.70 करोड़ रुपये मिले थे। वर्ष 2023-24 में दोनों योजनाओं का विलय कर दिया गया, जिसके बाद संयुक्त योजना के तहत अनुदान दिया जा रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि योजनाओं के विलय से संरक्षण कार्यों को अपेक्षित लाभ नहीं मिला है। उनका कहना है कि राज्य में वन क्षेत्र सिमटने और मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने के बीच केंद्रीय सहायता में कमी चिंता का विषय है।
हालांकि राज्य सरकार ने हाथियों के आवास संरक्षण के लिए 3.50 करोड़ रुपये की अपनी हिस्सेदारी मंजूर की है। इसमें से 17 लाख रुपये अनुसंधान एवं विकास कार्यों पर खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा टाइगर रिजर्व के लिए भी अतिरिक्त बजट उपलब्ध कराया गया है। केंद्र सरकार के अनुसार, पिछले चार वर्षों में राज्य ने वन्यजीव संरक्षण के लिए मिली केंद्रीय सहायता का पूर्ण उपयोग किया है। वहीं, वर्ष 2025-26 में वन्यजीव आवास विकास के लिए केंद्र से 5.97 करोड़ रुपये मिले हैं, जो पिछले वर्ष के 9 करोड़ रुपये से कम हैं।