
चार धाम यात्रा के समतुल्य गोवर्धन दर्शन: श्रीमद्भागवत कथा में प्रकट हुई कृष्ण लीलाएं
Mar 28, 2025
भोपाल। पंचवटी करोंद में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस पर वृंदावन के राष्ट्रीय प्रवक्ता संत धर्मपथिक पूज्य शैलेन्द्र कृष्ण महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य बाल लीलाओं का रसपान कराया। महाराजश्री ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने मात्र सात दिन की अवस्था में अविद्या रूपी पूतना का अंत कर दिया, और एक वर्ष की उम्र में गर्गाचार्य जी ने उनका नामकरण किया। कृष्ण का अर्थ है – जो अपनी ओर सभी को आकर्षित करे।कथा में भगवान की माखन चोरी लीला का वर्णन करते हुए पूज्य महाराज जी ने बताया कि भगवान ने माखन इसलिए चुराया, क्योंकि गोकुल के ग्वालबाल और गोपियाँ परिश्रम से निकाला दूध-दही मथुरा में कंस के पहलवानों को बेचती थीं, जो श्रीकृष्ण को उचित नहीं लगा। उन्होंने मेहनतकश ग्वाल सखाओं को माखन खिलाकर परिश्रम का वास्तविक फल दिलाया।
गोवर्धन पूजन की महिमा
पूज्य महाराज जी ने गोवर्धन पूजन की महत्ता बताते हुए कहा कि जब तक धरती पर गोवर्धननाथ हैं, तब तक कोई अनाथ नहीं है। भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अभिमान को दूर करने के लिए इंद्र पूजन रोककर प्रकृति स्वरूप गोवर्धन पूजन की परंपरा शुरू की। उन्होंने कहा, कलयुग में चार धाम की दुर्लभ यात्रा के बराबर पुण्य केवल गोवर्धन के दर्शन मात्र से ही प्राप्त हो सकता है। कथा में श्रद्धालु बड़ी संख्या में सम्मिलित हुए और आयोजक परिवार ने गोवर्धननाथ को छप्पन भोग अर्पित कर दिव्य महाआरती का आयोजन किया।