2 साल से घर से युवती बीमार और अपाहिज मां के साथ बस स्टॉफ पर रहने को मजबूर
Apr 26, 2024
बर्मिंघम । गरीबी क्या होती है, ये उन लोगों से पूछे जिनके सिर पर छत नहीं होती, जो रोड किनारे, या रेलवे स्टेशनों पर रात बिताने के लिए मजबूर होते हैं। इसतरह की इंग्लैंड में रहने वाली एक लड़की की जिंदगी भी बहुत मुश्किल है गरीबी की वजह से बेघर है और रहने के लिए जगह खोजती रहती है। आजकल लड़की अपनी मां और प्रेमी के साथ एक बस स्टॉप में रहती है। हालांकि, उसका ये घर भी बहुत दिन उसका साथ नहीं देगा, क्योंकि उस बस स्टॉफ को भी तोड़ने की बात चल रही है।
रिपोर्ट के अनुसार डेस्टिनी मिशेल 26 साल की हैं और ऑटिज्म की कंडीशन से जूझ रही हैं। पर उससे ज्यादा जिस चीज से उन्हें जूझना पड़ रहा है, वहां है गरीबी। नगर पालिका भी उनका साथ नहीं दे रही है। बेघर डेस्टिनी अपनी मां और प्रेमी के साथ पहले सड़कों पर रहती थीं, पर अब उन्हें एक बस स्टॉप का सहारा है, जिसके नीचे वे बड़ी मुश्किल से सिर छुपा रही हैं। ये बस स्टॉप बर्मिंघम के सेली ओक में मौजूद है। वहां पिछले 7 महीनों से यहां रह रही हैं।
उनके 31 साल के बॉयफ्रेंड रायन और 44 साल की मां भी साथ हैं। मां को भी ऑटिज्म है और वहां अपाहिज भी हैं। इस वजह से जीना और भी मुश्किल है। नगर पालिका ने पहले उन्हें टेंपररी घर ऑफर किया था, पर वे वहां इसलिए नहीं रहना चाहती थीं क्योंकि वहां अन्य नशेड़ी लोग रहते थे, जिनसे उन्हें अपनी जान और इज्जत पर खतरा महसूस होता था। पहले युवती रोड के किनारे एक शेड के नीचे सोती थीं, पर पुलिस ने उन्हें वहां से भगा दिया। तब से उन्हें इस कांच के बस स्टॉप में रहने की जगह मिल गई। मगर अब उन्हें ये घर भी खाली करना पड़ेगा। काउंसिल की तरफ से कहा गया है कि उनके पास 1 महीने का वक्त है यहां से हटने के लिए, उसके बाद घर को तोड़ दिया जाएगा।
पहले उनके पास छोटा सा घर वोलवरहैंप्टन में था, पर उसे उन्हें खाली करना पड़ा। कुछ छात्रों ने उनकी मदद बस स्टॉप में रहने में की। उनकी मदद से उन्होंने टूटे हुए कांच की जगह पर टेप चिपकाया, पुराने पर्दे मिल गए तब वे लगा लिया। पुरानी जैकेट, कपड़े आदि मिले, जिससे उनका गुजारा चल रहा है। उनके पास कपड़े तक खरीदने के पैसे नहीं हैं। उनके पास अंडरगार्मेंट्स नहीं हैं। 1 महीने से वहां एक ही पैंट पहन रही हैं। कुछ छात्रों से उन्हें कपड़े मिल गए थे, जिसके जरिए उनका गुजारा जैसे-तैसे हो रहा है।