प्रदेश के व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) घोटाले के चार आरोपियों को सात साल की सजा सुनाई, वहीं एक आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। मामले की सुनवाई सीबीआई की विशेष न्यायाधीश नीति राज सिंह सिसोदिया ने की। मामले में शुक्रवार को व्यापमं घोटाले से संबंधित आठ वर्ष पुराने मामले में चार आरोपितों को सात-सात वर्ष के कठोर कारावास व 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
साक्ष्य के अभाव में एक आरोपित बरी हो गया । बता दें कि व्यापमं द्वारा वर्ष 2013 में मध्य प्रदेश पुलिस आरक्षक भर्ती की परीक्षा आयोजित की गई थी। जिसमें परीक्षार्थी रहे कृष्णकांत शर्मा और राधामोहन शर्मा ने अपने स्थान पर क्रमश: मनीष और रवि शर्मा द्वारा परीक्षा देने का आरोप था।उक्त चारों आरोपितों पर मूल्यवान दस्तावेजों में हेरफेर, कूट रचित दस्तावेजों का बेईमानी पूर्वक असल के रूप में उपयोग में लाए जाने, छल और आपराधिक षड्यंत्र के लिए दोषी पाया गया था।
इस मामले में शुक्रवार को भारतीय दंड विधान की विभिन्न धाराओं और मध्य प्रदेश मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर सात-सात वर्ष का कठोर कारावास एवं दस हजार रुपये का अर्थदंड से दंडित किया है। साथ ही मध्यस्थता करने वाले आदेश शर्मा को साक्ष्य के अभाव में न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया। बता दें कि व्यापमं घोटाले को बडा घोटाला बताते हुए प्रदेश कांग्रेस ने आंदोलन कर जगह-जगह धरना प्रदर्शन किए थे, वहीं विधानसभा में यह मुददा जोरशोर से उठाया था।