पिता की जिद ने ‎ दिलवाया स्वर्गवासी बेटे को इंसाफ, चार्ज शीट हुई दा‎खिल

-8 साल पहले बेटे को कुचल गई थी कार, पु‎लिस ने अनट्रेस बताया तो खुद ने ही सबूत जुटाए

गुरुग्राम । एक पिता की जिद के कारण पुलिस ने आठ साल पुराने मामले में आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। जब‎कि इससे पहले पु‎लिस ने अनट्रेस मामला बताकर फाइल बंद कर दी थी। तो ‎फिर अपने 15 साल के बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए पिता ने खुद ही सबूत जुटाए और उन्हें कोर्ट के सामने पेश किया। जिसे देखकर कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सख्त नाराजगी जताई। जानकारी के अनुसार आठ साल पहले 2015 में किशोर को एक कार ने कुचल दिया था। हादसे के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया। वहीं छात्र की अस्पताल में मौत हो गई थी। पिता घटनास्थल पर मिले कार के साइड मिरर की मदद से आरोपी तक पहुंचा और उसे न्याय के कटघरे में खड़ा कर दिया। पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए सेक्टर-56 थाने में आईपीसी की धारा 279 (रैश ड्राइविंग) और 304 ए (दुर्घटना में मौत) के तहत मामला दर्ज किया था, लेकिन पुलिस ने हिट एंड रन मामले की जांच में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। 

पु‎लिस ने तुरंत मामले को अनट्रेस कहकर बंद कर दिया। इससे आहत मृतक छात्र के पिता ने बेटे की जान लेने वाले आरोपी को न्याय के कटघरे में लाने की प्रतिज्ञा लेकर दुर्घटनास्थल से बरामद टूटे हुए साइड मिरर की मदद से खुद ही मामले की जांच शुरू कर दी। पिता ने यह पता लगाने के लिए सभी वर्कशॉप और सर्विस सेंटरों का दौरा किया कि क्या कोई कार साइड मिरर ठीक करने के लिए आई थी। मैकेनिक उसे यह पहचानने में मदद करता है कि साइड मिरर मारुति स्विफ्ट कार का है। सर्विस सेंटर से कोई सुराग न मिलने पर शिकायतकर्ता उक्त कार बनाने वाली ऑटोमोबाइल कंपनी के पास गया। कई महीनों की जांच के बाद वाहन की पहचान करने में कामयाब रहा। 

जांच के दौरान शिकायतकर्ता ने जांच अधिकारी को एक वाहन के दो बॉडी पार्ट्स सौंपे जो दुर्घटनास्थल पर पाए गए थे। उन्होंने पंजीकरण संख्या के चार अंकों का भी खुलासा किया था, जिनका शुरुआत में एफआईआर में उल्लेख नहीं किया गया था। जनवरी 2023 में पीड़ित ने वाहन मालिक के खिलाफ आपराधिक याचिका दायर की, जबकि आपराधिक याचिका पर जेएमआईसी विक्रांत ने कहा मैंने मूल अप्राप्य रिपोर्ट को सुरक्षित रख लिया है। सबसे पहले शिकायतकर्ता को नोटिस दिए बिना अनट्रेस रिपोर्ट स्वीकार करना गैरकानूनी है। शिकायतकर्ता के मामले को फिर से खोलने के लिए पुलिस अधिकारियों से संपर्क करने की स्वतंत्रता दी गई थी। 



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