अनिवार्य सेवानिवृत्ति पर भी कर्मचारी रिटायरमेंट बाद की सुविधा पाने का हकदार - हाइकोर्ट
Jun 07, 2024
इन्दौर सरकारी कर्मचारी दंडस्वरूप दी गई अनिवार्य सेवानिवृत्ति के बाद भी रिटायरमेंट के बाद की तमाम सुविधाएं पाने का हकदार है। उसे वंचित नहीं किया जा सकता। हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सरकार द्वारा अधिकारी, कर्मचारियों को दी जाने वाली अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामले में यह महत्वपूर्ण फैसला दिया है। सुनवाई प्रकरण में सशस्त्र सुरक्षा बल के एक आरक्षक को शासन ने सजा के रूप में अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया था। उसके द्वारा पेंशन व अन्य सुविधा की मांग की गई तो कहा गया कि उसकी सर्विस 20 साल से अधिक नहीं हुई है, इसलिए लाभ नहीं दे सकते।
प्रस्तुत प्रकरण में आरक्षक अभयसिंह ने अधिवक्ता आनंद अग्रवाल के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामले में शासन की लापरवाही का उल्लेख किया। याचिका में कहा गया कि नियमानुसार उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद की सारी सुविधाएं मिलना चाहिए। सर्विस रूल्स में भी इसका उल्लेख है। केवल इस सुविधा के लिए सर्विस पर्याप्त नहीं है, इसे आधार नहीं बनाया जा सकता। प्रकरण में शासन की ओर से अपना पक्ष रखते कहा गया कि सजा के रूप में रिटायरमेंट दिया है, इसलिए किसी तरह की राहत प्रदान नहीं की गई है। सरकार ने नीति के हिसाब से निर्णय लिया है।
अभयसिंह द्वारा हाई कोर्ट आने से पहले पत्राचार भी किया गया था, लेकिन उनके किसी आवेदन पर गौर नहीं किया गया। हाई कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता रिटायरमेंट के बाद की तमाम सुविधाएं पाने का हकदार है। उसे वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने समय सीमा में लाभ देने के आदेश जारी किए हैं।