पाकिस्तान में सुखदेव को राष्ट्रीय नायक और स्कूल के पाठयक्रम में शामिल करने की मांग

-लाहौर हाईकोर्ट के वकीलों ने सुखदेव की 117वीं जयंती मनाई

लाहौर,। पाकिस्तान हमेशा ही भारत विभाजन से पहले के इतिहास को नकारता रहा है, जो दोनों देशों में एक साझी संस्कृति रही है। वहीं पाकिस्तान में ही एक वर्ग ऐसा है, जो भगत सिंह, महाराजा रणजीत सिंह जैसे नायकों को सम्मान देने की मांग करता रहा है। इस बीच लाहौर हाईकोर्ट में सुखदेव की जयंती मनाई गई, जिन्हें भगत सिंह और राजगुरु के साथ ही लाहौर जेल में फांसी दी गई थी। यह कार्यक्रम लाहौर हाईकोर्ट के वकीलों ने आयोजित किया था, जिसमें सुखदेव को याद किया गया। इस दौरान वकीलों ने पाकिस्तान सरकार से मांग की कि सुखदेव को स्कूल के पाठयक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। उन्हें राष्ट्रीय नायक घोषित करना चाहिए। 

ये सभी वकील भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन से जुड़े हैं, जिसका गठन शहीदों की याद में किया गया था। हाईकोर्ट के वकीलों ने बुधवार को सुखदेव की 117वीं जयंती के मौके पर लाहौर हाईकोर्ट परिसर में केक काटकर सुखदेव की जयंती मनाई। इस मौके पर एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें मांग की गई कि सुखदेव के नाम पर लाहौर में एक सड़क बनाई जानी चाहिए। इसके अलावा सुखदेव के नाम पर डाक टिकट और स्कूली किताबों में उन पर एक चैप्टर शामिल किया जाना चाहिए। 

सुखदेव का जन्म 15 मई, 1907 को पंजाब के लुधियाना में हुआ था। भगत सिंह फाउंडेशन के चेयरमैन इम्तियाज रशीद कुरैशी ने कहा कि हम लोग इन सभी स्वतंत्रता सेनानियों की जयंती और पुण्यतिथि को मनाते हैं। हमारी पाकिस्तान सरकार से मांग है कि इन लोगों के बलिदानों को समझते हुए उन्हें राष्ट्रीय नायक घोषित किया जाए। 

बता दें कि 23 मार्च, 1931 को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को लाहौर में फांसी दी गई थी। आज भी भगत सिंह के नाम पर लाहौर में स्मारक है। भगत सिंह को पहले उम्रकैद की सजा मिली थी, लेकिन फिर साजिश के तहत उसे फांसी में बदल दिया गया था। भगत सिंह का सम्मान भारत में ही नहीं पाकिस्तान में किया जाता है। भगत सिंह फाउंडेशन ने पीएम शहबाज शरीफ से मांग की कि भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को राष्ट्रीय नायक घोषित किया जाए। 


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