इं‎डिया पर ‎छिड़ी बहस, मुलायम ने ‎किया था सं‎‎विधान में भारत नाम करने का वादा


नई दिल्ली । इस समय देश के नाम को लेकर बहस ‎छिड़ी हुई है। एक ओर जहां राष्ट्रपति भवन की ओर से जी-20 के डिनर का जो आमंत्रण पत्र भेजा गया है, उसमें प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया की बजाय प्रेसिडेंट ऑफ भारत लिखा है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस और उसके सहयोगी गठबंधन के इं‎डिया नाम को लेकर भाजपा को डरा हुआ बता रहे हैं। अब ले‎किन इसे लेकर डिबेट शुरू हो गई है कि क्या सरकार देश का नाम बदलना चाहती है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश का नाम बदलने का कोई इरादा नहीं है और भारत नाम हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है। इं‎डिया गठबंधन में शामिल कई दलों ने राष्ट्रपति भवन के न्योते में भारत लिखे जाने को सरकार का डर बताया है। इस गठबंधन में समाजवादी पार्टी भी शामिल है। इस बीच सपा का ही 2004 का घोषणापत्र इन दिनों वायरल हो रहा है। 

इस घोषणा पत्र में मुलायम सिंह के नेतृत्व वाली पार्टी ने वादा किया था कि यदि उन्हें सत्ता मिलती है और वह केंद्र में आते हैं तो फिर देश का नाम संविधान में इं‎डिया की बजाय भारत कर दिया जाएगा। इसके अलावा यूपी विधानसभा में भी मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि वह चाहते हैं कि देश का नाम भारत कर दिया जाए। मुलायम सिंह यादव खुद को समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया की विचारधारा का मानते थे। उसी को आधार बताते हुए उन्होंने कहा था कि देश में अंग्रेजी की बजाय हिंदी को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। यही नहीं देश का नाम इं‎डिया की बजाय भारत ही होना चाहिए। 

राम मनोहर लोहिया हमेशा अंग्रेजी के प्रभुत्व का विरोध करते थे। 

मुलायम सिंह यादव ने 2004 के सपा के मेनिफेस्टो में कहा था कि देश का नाम इं‎डिया की जगह भारत होना चाहिए। पार्टी का कहना था कि संविधान में देश का नाम इं‎डिया होना एक बड़ी गड़बड़ी है। इसे हटाकर नाम भारत रखना चाहिए, जिससे देश के गौरव को वापस पाया जा सके। सपा का कहना था कि 200 सालों के अंग्रेजी शासन में देश का नाम भारत से बदलकर इं‎डिया हो गया था, जबकि हमारे देश की पहचान हमेशा भारत नाम से रही है। उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री रहते हुए मुलायम सिंह यादव ने कई बार यह बात दोहराई थी। 



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