नेपाल में बाढ़ से 1100 से अधिक हुई मौतें, हजारों लापता, अब नया खतरा
Sep 02, 2026
काठमांडू,। नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है, जिसमें मरने वालों की संख्या बढ़कर बुधवार को 1127 हो गई। सुरक्षाबलों ने आठ जिलों से और शव बरामद किए हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह आंकड़ा रुक-रुककर हो रही बारिश और कई जिलों में नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण बचावकर्मियों के लिए चुनौतियों के बावजूद सामने आया है। इस बीच, देश के कई हिस्सों में बाढ़ की नई चेतावनी भी जारी की गई है, जिससे चिंता और बढ़ गई है।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, करीब 4,000 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक और 83 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। वहीं, राहत और बचाव अभियानों के माध्यम से अब तक लगभग 12,000 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। यह भीषण आपदा 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने या हिमस्खलन के कारण आई अचानक बाढ़ का परिणाम है। इस प्राकृतिक आपदा ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों तथा गांवों में भारी विनाश किया है।
हिमालयी सीमा क्षेत्र से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी अपने साथ बाढ़ का पानी निचले इलाकों में ले गई, जिससे सैकड़ों घर, वाहन, सड़कें और पुल बह गए, साथ ही कई महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजनाओं को भी गंभीर नुकसान पहुँचा।इस आपदा का असर सीमा पार चीन पर भी पड़ा है, जहाँ 16 लोगों की मौत हुई है और तिब्बत में करीब 550 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल के भीतर, चितवन जिले में सबसे अधिक 321 शव बरामद किए गए हैं, इसके बाद नवलपरासी ईस्ट में 216, नवलपरासी वेस्ट में 170, नुवाकोट में 142, गोरखा में 65, धाडिंग में 57, रसुवा में 41 और तनहुन में 38 शव मिले हैं।
चिकित्सा केंद्रों पर अपने लापता रिश्तेदारों की तस्वीरें लिए लोगों की भारी भीड़ देखी जा रही है, जो दीवारों पर चिपकाई गई मृतकों की तस्वीरों को ध्यान से देख रहे हैं। देश भर के 21 अस्पतालों में अज्ञात शव रखे गए हैं, जिनकी पहचान एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, क्योंकि कई शव बुरी तरह सड़-गल चुके हैं या पानी के बहाव में बहकर आने के बाद केवल आंशिक अवशेषों के रूप में ही मिल पाए हैं। अधिकारियों ने बताया कि अब तक बरामद किए गए कुल शवों में से पहचान के बाद केवल 60 शव ही परिजनों को सौंपे जा सके हैं, जबकि लगभग 700 शवों को दस्तावेजीकरण और पहचान संबंधी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के बाद दफना दिया गया है।