श्रीलंका पर चीन फिर मेहरबान, अब कोलंबो एयरपोर्ट पर नजर

बीजिंग। श्रीलंकाई पीएम दिनेश गुणवर्धने ने बुधवार को कहा कि चीन ने बीजिंग में अपने समकक्ष के साथ बातचीत के बाद द्वीपीय राष्ट्र के रणनीतिक गहरे समुद्री बंदरगाह और राजधानी के हवाई अड्डे को विकसित करने का वादा किया है। श्रीलंकाई प्रधानमंत्री के कार्यालय की ओर से कहा गया है कि बीजिंग 2.9 अरब डॉलर के विदेशी ऋण के पुनर्गठन में भी सहायता करेगा। हालांकि, ऋण पुनर्गठन पर बीजिंग की स्थिति सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन श्रीलंकाई अधिकारियों ने कहा है कि चीन अपने ऋणों पर कटौती ना कर उसका कार्यकाल बढ़ा सकता है और ब्याज दरों को भी समायोजित कर सकता है।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने इन दिनों चीन की छह दिनों की यात्रा पर हैं। बुधवार को उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग के साथ द्विपक्षीय बातचीत की और कुल नौ समझौतों पर हस्ताक्षर किए। गुणवर्धने के साथ अपनी बैठक में, चीनी राष्ट्रपति ने चीन और श्रीलंका के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को मजबूत करने का आह्वान किया। बैठक के बाद श्रीलंका के प्रधानमंत्री ने कहा है कि दोनों देशों के बीच हुए समझौते के मुताबिक चीन श्रीलंका के गहरे समुद्री बंदरगाह और कोलंबो हवाई अड्डे का पुनर्विकास करेगा।

बता दें कि श्रीलंका के डिफॉल्टर होने के बाद से कोलंबो हवाई अड्डे के विकास के लिए जापानी-मदद रुका हुआ है, जिसे अब चीन पूरा करेगा। दूसरी तरफ, हंबनटोटा के दक्षिणी समुद्री बंदरगाह को 2017 में ही चीन को 1.12 अरब डॉलर में 99 साल की लीज पर सौंप दिया गया था।

इससे भारत के साथ चीन की क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता और सुरक्षा चिंताएं दोनों बढ़ गई हैं। भारत के साथ-साथ अमेरिका भी चिंतित हैं कि हंबनटोटा में चीनी पैर जमाने से हिंद महासागर में उसकी नौसैनिक ताकत बढ़ सकती है। हालांकि, श्रीलंका ने जोर देकर कहा है कि उसके बंदरगाहों का उपयोग किसी भी सैन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जाएगा, लेकिन नई दिल्ली हंबनटोटा बंदरगाह पर चीनी जासूसी जहाजों को बुलाने पर आपत्ति जता चुका है। दरअसल, चीन हंबनटोटा बंदरगाह और कोलंबो एयरपोर्ट के विकास के बहाने पूरे हिन्द महासागर की जासूसी करना और उस पर सामरिक वर्चस्व स्थापित करना चाह रहा है, जो भारत-अमेरिका समेत अन्य एशियाई देशों के लिए भी चिंता की बात है।


Subscribe to our Newsletter