पूर्व सीएमएचओ, सिविल सर्जन सहित 8 के खिलाफ प्रकरण दर्ज स्टाफ नर्स की मौत के बाद फर्जीवाड़ा करने का मामला
Oct 16, 2023
भोपाल : प्रदेश के देवास जिला अस्पताल की स्टाफ नर्स की मौत के बाद उसके स्वत्वों की राशि फर्जी तरीके से बनाए दस्तावेजों से भुगतान करने के मामले में पूर्व सीएमएचओ, सिविल सर्जन सहित 8 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लोकायुक्त द्वारा जांच की जा रही है। यह मामला वर्ष 2019 का है। मामले में पूर्व सीएमएचओ, पूर्व सिविल सर्जन और नोटरी अधिवक्ता सहित आठ जिम्मेदारों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित पद के दुरुपयोग का मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि नर्स की मृत्यु के बाद आरोपियों ने उसके पति को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर स्वत्वों की राशि का भुगतान किया था। दस्तावेजों के आधार पर तत्कालीन सीएमएचओ डा. राकेश सक्सेना एवं तत्कालीन सिविल सर्जन डा. अतुल विडबई द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से स्वत्वों की राशि का भुगतान राजीव एलेक्जेंडर के बैंक खाते में किया गया।
नियम विरुद्ध बिल जिला अस्पताल की लेखपाल इंदिरा वर्मा ने तैयार किए। इस दौरान मई 2020 में राजीव एलेक्जेंडर की कैंसर से मृत्यु हो गई। निरीक्षक लोकायुक्त उज्जैन संतोष कुमार जमरा ने बताया कि प्रकरण में डा. राकेश सक्सेना, डा. अतुल कुमार बिडवई, डा. हरिसिंह राणा, तेजकरण परमार, इंदिरा वर्मा, देवेंद्र मालवीय, आनंद सिंह बनाफर, जगदीश वर्मा के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त उज्जैन अनिल विश्वकर्मा ने बताया कि लोकायुक्त कार्यालय उज्जैन में पूर्व से पंजीबद्ध प्रकरण की विवेचना के दौरान पाया गया कि जिला अस्पताल की स्टाफ नर्स पुष्पा राठौर की अप्रैल 2019 में मृत्यु पश्चात उसके स्वत्वों की राशि का भुगतान उसके वारिसों को किया जाना था।
मृतका के पति राजीव एलेक्जेंडर को कैंसर के उपचार के लिए रुपयों की आवश्यकता थी, परंतु पुष्पा द्वारा पति के शराब पीने के चलते उसे नामिनी नहीं बनाया गया। पुष्पा के मायका पक्ष से भी किसी ने स्वत्वों की राशि प्राप्त करने में रुचि नहीं ली। कई दिनों तक कोई कार्रवाई नहीं करने से पति राजीव एलेक्जेंडर ने आरोपियों के साथ मिलकर कूट रचित नामांकन संबंधी दस्तावेज तैयार किए। इससे यह दर्शित हो कि पुष्पा ने अपने जीवन काल में पति को नामिनी बनाया है।
विवादित नामांकन दस्तावेज के परीक्षण उपरांत प्राप्त रिपोर्ट में विवादित नामिनी नामांकन दस्तावेजों में किए गए हस्ताक्षर एवं अन्य कार्यालयीन दस्तावेज, जिस पर मृतका पुष्पा के हस्ताक्षर थे, उनका मिलान कराने पर मिलान नहीं पाया गया।