मध्यप्रदेश में बिजली के हाल-बेहाल

Aug 29, 2022

उपभोक्ताओं के साथ आंख मिचोली

- वोल्टेज और बिजली कटौती से बिजली उपकरण हो रहे हैं खराब

भोपाल (ईएमएस)। मध्य प्रदेश बिजली उत्पादन में अग्रणी राज्य है। यहां के उपभोक्ता अतिरिक्त बिजली होने के बाद भी बिजली कट से बेहाल हैं। सीएम हेल्पलाइन की रिपोर्ट के अनुसार औसत रूप से मध्यप्रदेश में प्रतिदिन 457 बार बिजली गुल होती है। 52 जिलों से जो शिकायतें बिजली विभाग की दर्ज होती हैं। उसके अनुसार लो वोल्टेज ओर बिजली ट्रिपिंग की लगभग 14 लाख 46 हजार 924 शिकायतें सीएम हेल्पलाइन में दर्ज हुई है।

उपभोक्ताओं को भारी नुकसान

बिजली की ट्रिपिंग और कम वोल्टेज के कारण उपभोक्ताओं के बिजली उपकरण खराब होते हैं। इनको सुधरवाने तथा खराब होने के बाद नए उपकरण लेना पड़ता है। जिसके कारण उपभोक्ताओं पर आर्थिक भार बढ़ता है।


बिजली बिलों में भारी गड़बड़ी और भ्रष्टाचार

उपभोक्ताओं को जो बिजली बिल दिए जाते हैं। उस में भारी गड़बड़ी होती है। सीएम हेल्पलाइन में 4 लाख 70000 उपभोक्ताओं ने शिकायत दर्ज कराई है। गलत ओर बढ़े हुए बिल आने के बाद उपभोक्ताओं को उसे ठीक कराने के लिए भारी रिश्वत देनी पड़ रही है। ज्यादा पैसे भरने को मजबूर होना पड़ रहा है। जिसके कारण बिजली उपभोक्ताओं में लगातार रोष बढ़ रहा है।

बिजली उपभोक्ताओं की जो शिकायतें सीएम हेल्पलाइन में की गई हैं। उसमें सबसे ज्यादा शिकायतें,वोल्टेज और ट्रिपिंग की हैं। उसके बाद बिजली बिल में गड़बड़ियों की शिकायत है। ट्रांसफार्मर बदलने और तार टूटने से संबंधित शिकायतें तीसरे और चौथे क्रम में है। कई कई घंटे और कई कई दिनो तक उपभोक्ताओं को गड़बड़ियों के कारण बिजली नहीं मिल पाती है। जिसके कारण उपभोक्ताओं को भारी आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।बिजली वितरण कंपनियों ने ठेके पर जब से काम देना शुरू किया है। उसके बाद से गड़बड़ियां और बढ़ गई हैं। सेवाओं में गिरावट आई है। बिजली गुल होने की शिकायतें रोजाना बढ़ रही हैं। ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी भयावह है। शहरी इलाकों में भी 5 से 10 वार बिजली जाना आम बात है। शिकायतों का निराकरण समय पर नहीं होने के कारण उपभोक्ताओं को सीएम हेल्पलाइन की शरण में जाना पड़ता है। उसके बाद भी कई घंटे ओर कई दिनों के इंतजार के बाद समस्याओं का समाधान हो पाता है।

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