ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी के सिलबस में पढ़ाया जा रह हिंदु विरोधी पाठ

वॉशिंगटन। अमेरिका की ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी के सिलेबस को लेकर विवाद गहरा गया है। इस सिलेबस में हिंदू धर्म को नीचा दिखाने की कोशिश की गई है। भारतीय मूल के एक अमेरिकी छात्र ने इस सिलेबस को लेकर विरोध दर्ज कराया है। छात्रा ने सिलेबस का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें हिंदुत्व को इस्लाम के खिलाफ इस्तेमाल होने वाला हथियार करार दिया गया है। साथ ही इसके प्राचीन होने की बात को भी खारिज कर दिया गया है। इस मुद्दे पर विश्वविद्यालय ने कहा है कि वह छात्र वसंत भट्ट द्वारा उठाए गए मुद्दों की समीक्षा कर रहा है।

विश्वविद्यालय ने कहा कि यह अकादमिक स्वतंत्रता की एक महत्वपूर्ण विशेषता है जिसमें शिक्षकों को जटिल और कभी-कभी चुनौतीपूर्ण विषयों पर विचार करने की स्वतंत्रता दी जाती है। विश्वविद्यालय के बयान के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन अकादमिक स्वतंत्रता की सराहना करती है, जिसमें शिक्षक को उनके पाठ्यक्रम में जटिल और चुनौतीपूर्ण विषयों पर विचार करने की स्वतंत्रता होती है। विश्वविद्यलट सामान्यतः व्यक्तिगत व्याख्यान की समीक्षा नहीं करता, विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम की निगरानी रखता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह स्थापित शैक्षिक और शैक्षिक मानकों को पूरा करता है। ह्यूस्टन विश्वविद्यालय का लिव्ड हिंदू रिलिजन सिलेबस ऑनलाइन छात्रों के लिए उपलब्ध है, जिसमें प्रोफेसर आरोन माइकल उलरी के वीडियो लेक्चर साप्ताहिक रूप से दिए जाते हैं। वसंत भट्ट इस विश्वविद्यालय में राजनीतिक विज्ञान के छात्र हैं। उन्होंने कॉलेज ऑफ लिबरल आर्ट्स एंड सोशल साइंसेज के डीन के पास एक शिकायत दर्ज कराई है।

विश्वविद्यालय के डीन और धार्मिक अध्ययन के निदेशक ने शिकायतों की समीक्षा की और इसे शिक्षक के साथ चर्चा की। उन्होंने कहा, यह कोर्स धार्मिक अध्ययन के शैक्षिक अनुशासन पर आधारित है, जो विशिष्ट शब्दावली जैसे फंडामेंटलिज्म का उपयोग धार्मिक आंदोलनों को समझने के लिए करता है। इसमें ईसाई धर्म, इस्लाम, बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म शामिल हैं।विश्वविद्यालय ने यह भी स्पष्ट किया कि ये शैक्षिक शब्द सार्वजनिक या राजनीतिक वार्ता में उपयोग किए गए अर्थों से अलग हो सकते हैं, जिससे कभी-कभी गलतफहमियां उत्पन्न होती हैं।


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