युग प्रदेश, भोपाल : पंद्रह साल से प्रदेश पर राज कर रही भाजपा को पटखनी देने के लिए आठ दल एक हुए हैं। खास बात तो यह है कि इन दलों में सपा तो है पर बसपा और कांग्रेस जैसी पार्टियां नहीं हैं। हालांकि , यह गठबंधन कितना असर डाल पाता है, यह समय पर ही पता चलेगा। क्योंकि, इन दलों का विशेष अस्तित्व नहीं हैं। लोकतांत्रिक जनता दल के सलाहकार गोविन्द यादव ने बताया, ‘संवैधानिक लोकतंत्न बचाने एवं वैकिल्पक राजनीति की खातिर मध्यप्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए गैर-बीजेपी राजनैतिक दलों के गठबंधन निर्माण के लिए आठ विभिन्न राजनैतिक दलों की बैठक भोपाल में हुई। इस बैठक में लोकतांत्रिक जनता दल, सीपीआई, सीपीएम, बहुजन संघर्ष दल, गोंडवाना गणतंत्न पार्टी, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय समानता दल और प्रजातांत्रिक समाधान पार्टी शामिल हुई।’

गठबंधन से फायदा..

चूंकि, चुनाव में कई बार जातिगत फैक्टर काम करते हैं। इन दलों में सपा और समानता दल साथ हैं, ऐसे में पटेल, कुशवाहा, यादव एवं अन्य ओबीसी वोट इन्हें मिल सकते हैं। कुछ इलाकों में बहुजन संघर्ष दल का भी प्रभाव है। इसलिए एससी वोट भी शामिल हो सकते हैं। इसलिए यह गठबंधन चुनाव को प्रभावित करने की स्थिति में तो रहेगा ही।

 सपाक्स पर भी नजर..

उधर सपाक्स ने 230 सीटों पर चुनाव लडऩे का ऐलान कर दिया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रमुख दलों की नजरें इस पर टिकी हुई हैं। क्योंकि, सपाक्स का सर्वाधिक असर भाजपा पर ही पड़ेगा। इसके साथ ही कांग्रेस के वोट भी सपाक्स काटेगी।

सीपीआई और सीपीएम ने किया कांग्रेस का विरोध

सीपीआई और सीपीएम ने संपूर्ण विपक्षी एकता के लिए गैर बीजेपी गठबंधन निर्माण पर सैद्धांतिक सहमति व्यक्त की लेकिन कांग्रेस के साथ चुनाव पूर्व पूर्ण गठबंधन नहीं करने का फैसला लिया। शेष अन्य दलों ने संपूर्ण विपक्षी एकता के लिए कांग्रेस के साथ चुनाव पूर्व पूर्ण गठबंधन का समर्थन किया। बता दें कि बीएसपी द्वारा मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए 22 प्रत्याशियों की 20 सितंबर को की गई घोषणा के बाद यह कदम उठाया जा रहा है, ताकि विपक्षी दलों के वोटों का विखराव न हो और बीजेपी को लगातार चौथी बार सत्ता में आने से रोका जा सके।