महज 25 फीसदी बिल्डर्स ने ही कराया पंजीयन

प्रदेश में रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) को लागू होने को एक साल पूरा होने वाला है, लेकिन यह कानून अभी तक बेअसर साबित हो रहा है। रेरा के सक्त नियमों के बाद भी राजधानी समेत अन्य तीन महानगरों के महज 25 फीसदी बिल्डर्स ने ही पंजीयन करवाया है। करीब 75 फीसदी बिल्डर्स नियमों को ताक पर रखकर बिना रजिस्ट्रेशन के ही व्यवसाय कर रहे हैं। रेरा के जानकारों ने बताया कि बड़ी कार्रवाई नहीं होने और फैसलों के अभाव के कारण लोग जागरूक नहीं हो सके। 1 मई 2017 को रियल एस्टेट कारोबारियों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए रेरा कानून लागू हुआ। रेरा कानून का प्रदेश में कितना असर है इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सिर्फ चार महानगरों में नए प्रोजेक्ट के कुल 109 और निर्माणाधीन (ऑनगोइंग)प्रोजेक्ट के कुल 1020 पंजीयन कराए गए हैं। यह भी आश्चर्य है कि रेरा में पूरे प्रदेश से महज 71 रियल एस्टेट एजेंट ही पंजीकृत हैं। जबकि प्रदेश में करीब आठ हजार से ज्यादा प्रॉपर्टी एजेंट काम कर रहे हैं। यह आंकड़ा एक फीसदी से भी कम है। रियल एस्टेट जानकारों के मुताबिक प्रदेश में करीब पांच हजार ऐसे प्रोजेक्ट है जो सीधे तौर पर रेरा कानून के दायरे में आते हैं। वहीं रेरा में पूरे 51 जिलों को मिलाकर कुल 1727 प्रोजेक्ट (ऑनगोइंग व न्यू प्रोजेक्ट) का पंजीयन है। मतलब यह कि प्रदेश के 70 प्रतिशत रियल एस्टेट कारोबारी रेरा कानून को दरकिनार कर मनमाफिक कारोबार कर रहे हैं।

मात्र 324 ने कराया पंजीयन

एसोसिएशन ऑफ भोपाल रियलटर्स के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में करीब 8 हजार से ज्यादा रियल एस्टेट एजेंट्स काम कर रहे हैं। एक साल के अंदर रेरा में मात्र 324 एजेंट्स ने पंजीयन कराया है। जबकि एजेंट्स के लिए भी रेरा में सक्त नियमों का प्रावधान किया है। इस बारे में एसोसिएशन एसोसिएशन ऑफ भोपाल रियलटर्स के अध्यक्ष प्रदीप करम्बलेकर का कहना है कि रेरा कानून को लेकर एजेंट्स और बिल्डर्स दोनों में ही जागरूकता की कमी है। जब तक रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े लोगों को जागरूक नहीं किया जाएगा तब तक बहुत कुछ संभव नहीं हैं। हम समय-समय पर रियल एस्टेट क्षेत्र के सभी वर्गों को रेरा कानून से अवगत करने का काम भी खुद ही कर रहे हैं। प्राधिकरण को इस दिशा में भी काम करना चाहिए। इस बारे में वरिष्ट अधिवक्ता सचिन वर्मा का कहना है कि बड़ी कार्रवाई और बड़े फैसले ही नियम-कानून का पालन करना में सहायक होते हैं। रेरा कानून में भी सक्त प्रवधान हैं। जब तक रेरा बड़े फैसले नहीं सुनाएगा तब तक लोग इस कानून के महत्व को नहीं समझेंगे।