नई दिल्ली। काफी विवादों व कंफ्यूजन के बाद भारतीय टीम के मुख्य कोच का पद रवि शास्त्री को सौंपा गया है। जितनी बहस व कंफ्यूजन इस बार कोच को लेकर हुई थी इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ है। मगर इसके बावजूद शास्त्री BCCI के ऊपर काफी मेहरबान हैं क्योंकि वो अगले कुछ सालों तक बोर्ड का पैसा बचाने वाले हैं। दरअसल, जब तक अनिल कुंबले कोच थे तब तक उन्हें बोर्ड सालाना 9 करोड़ रुपए फीस देता था लेकिन अब शास्त्री को बोर्ड सालाना 7 करोड़ रुपए देगा।

रवि शास्त्री को नहीं भा रहे जहीर

अब ऐसे में बोर्ड के दो करोड़ की बचत हो रही है। कुंबले को जो फीस दी जाती थी वो किसी भी ए ग्रेड खिलाड़ी की फीस से कम नहीं थी लेकिन शास्त्री सात करोड़ रुपए में मान गए हैं इसलिए अब उन्हें उतने रुपए मिलेंगे। कुंबले एक साल के लिए टीम के कोच थे और उनका कॉन्ट्रैक्ट चैंपियंस ट्रॉफी 2017 के बाद खत्म हुआ है।

इस बार कई दिग्गज खिलाडियों से कोच पद के बोर्ड को आवेदन भेजे थे लेकिन रवि शास्त्री इस रेस में सबसे आगे थे। अगर वीरेंद्र सहवाग ने भी शास्त्री को अच्छी टक्कर दी। खबरों के अनुसार पहले सहवाग ही CAC की पहली पसंद थे लेकिन फिर बाद सहमति न बन पाने के कारण कमेटी ने COA को रवि शास्त्री का नाम बताया, जिसपर COA भी राजी हो गया।

रवि शास्त्री को पसंद हैं भरत अरुण

CAC ने COA को शास्त्री के अलावा राहुल द्रविड़ के नाम की सिफारिश बल्लेबाजी सलाहकार के लिए की थी लेकिन COA ने अभी तक इसपर कोई भी जवाब नहीं दिया है। कमेटी ने COA को जहीर खान का नाम भी पहले गेंदबाजी कोच के लिए बताया था लेकिन शास्त्री चाहते थे कि भरत अरुण ही टीम के गेंदबाजी कोच रहें। ऐसे में कमेटी ने जहीर का नाम तेज गेंदबाजी सलाहकार के लिए COA को दिया लेकिन COA ने इसपर पर कोई जवाब नहीं दिया।

अब COA  द्रविड़ व जहीर के बारे में 22 जुलाई तक कोई फैसला सुनाएगा क्योंकि 19 जुलाई को COA शास्त्री के साथ बैठक करेगा जिसमें शास्त्री ही बताएंगे कि उनको स्पोर्ट्स स्टाफ की टीम में कौन चाहिए या कौन नहीं। साथ ही इसपर कोहली की सहमती ली जाएगी क्योंकि वो भारतीय टीम के कप्तान हैं।